सागर: झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई पर उठते सवाल, स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर संदेह
सागर जिले के गौरझामर में झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई सवालों के घेरे में है। सात दिन के नोटिस के बाद भी...

देवरी जिला सागर मध्यप्रदेश | संवाददाता: त्रिवेंद्र जाट
द क्लिफ न्यूज़ | 24 अक्टूबर 2026
सागर जिले की देवरी तहसील के गौरझामर में कथित झोलाछाप डॉक्टरों के विरुद्ध स्वास्थ्य विभाग द्वारा की गई कार्रवाई की प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं। स्थानीय निवासियों ने इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर असंतोष व्यक्त किया है, क्योंकि निरीक्षण और नोटिस जारी होने के बावजूद अवैध रूप से संचालित हो रहे अस्पतालों का संचालन अभी भी जारी है।
स्थानीय लोगों द्वारा डॉ. अश्वनी मजूमदार और डॉ. टी.के. विश्वास के अस्पतालों की वैधानिकता और उनकी शैक्षणिक योग्यताओं पर संदेह व्यक्त किया जा रहा है। इन कथित चिकित्सकों के खिलाफ लगातार शिकायतें मिलने के बाद, जिला प्रशासन के सख्त निर्देशों के क्रम में, देवरी की ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) डॉ. पूजा परमार ने संबंधित अस्पतालों का निरीक्षण किया था।
निरीक्षण और नोटिस के बाद भी अस्पतालों का संचालन जारी
निरीक्षण के दौरान, यह पाया गया कि संबंधित डॉक्टर अनुपस्थित थे, जिसके बाद बीएमओ डॉ. पूजा परमार ने दोनों चिकित्सकों को सात दिनों का नोटिस जारी किया था। हालांकि, ग्रामीणों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग की टीम के निरीक्षण के कुछ ही समय बाद, अस्पताल पुनः खोल दिए गए और वहां मरीजों का इलाज पहले की तरह ही जारी रहा। इस घटनाक्रम ने स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई को अप्रभावी साबित कर दिया है।
अधिकारियों के बयानों में विरोधाभास, स्थिति जस की तस
इस पूरे प्रकरण में एक चौंकाने वाली स्थिति तब उत्पन्न हुई जब कथित तौर पर संबंधित डॉक्टरों ने दावा किया कि उनके अस्पताल बीएमओ के आदेशों के अनुसार ही संचालित हो रहे हैं। दूसरी ओर, ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. पूजा परमार ने किसी भी प्रकार के संरक्षण या अनियमितता की बात को सिरे से खारिज कर दिया है। दोनों पक्षों के बयानों में विरोधाभास और जमीनी हकीकत में कार्रवाई के अभाव ने मामले को और जटिल बना दिया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की सुलभता और गुणवत्ता एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। बिना वैध डिग्री और पंजीकरण के चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने वाले झोलाछाप डॉक्टरों के कारण मरीजों के स्वास्थ्य को गंभीर जोखिम का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे केंद्रों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की जा रही है ताकि आम जनता सुरक्षित रहे और उन्हें गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। वरिष्ठ अधिकारियों से इस मामले की निष्पक्ष जांच और अनियमितता पाए जाने पर प्रभावी कार्यवाही की उम्मीद है।
