गौरझामर में झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई, अस्पताल सील करने के निर्देश
सागर जिले के गौरझामर में संदिग्ध अस्पतालों के खिलाफ सीएमएचओ डॉ. देवेश पटेरिया ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने बीएमओ देवरी को दोनों अस्पतालों को...

देवरी जिला सागर मध्यप्रदेश | संवाददाता: त्रिवेंद्र जाट
द क्लिफ न्यूज़ | 21 अक्टूबर 2026
मध्य प्रदेश के सागर जिले की देवरी तहसील के गौरझामर में कथित तौर पर बिना उचित चिकित्सा योग्यता के मरीजों का इलाज कर रहे झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने कड़े कदम उठाने का निर्णय लिया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. देवेश पटेरिया ने इस मामले की गंभीरता को समझते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने देवरी की ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) को संबंधित अस्पतालों को सील करने और उनका संचालन बंद कराने का स्पष्ट आदेश दिया है।
सीएमएचओ डॉ. पटेरिया ने कहा कि यह पूरा प्रकरण उनके संज्ञान में है और नियमों के अनुसार दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उनके अनुसार, किसी भी ऐसे व्यक्ति को चिकित्सा व्यवसाय करने की अनुमति नहीं दी जा सकती, जिसके पास आवश्यक योग्यता, लाइसेंस और पंजीयन न हो। यह सुनिश्चित करना स्वास्थ्य विभाग का प्राथमिक कर्तव्य है कि जनता को सुरक्षित और योग्य चिकित्सा सेवाएं मिलें।
संदिग्ध अस्पतालों का निरीक्षण और नोटिस जारी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बीएमओ देवरी, डॉ. पूजा परमार, ने बुधवार को गौरझामर पहुंचकर डॉक्टर टी.के. विश्वास और डॉक्टर अश्वनी मजूमदार के अस्पतालों का निरीक्षण किया था। यह निरीक्षण क्षेत्र में कथित तौर पर चल रहे अवैध चिकित्सालयों की शिकायतों के जवाब में किया गया था। निरीक्षण के दौरान, यह पाया गया कि दोनों चिकित्सक अपने-अपने अस्पतालों में अनुपस्थित थे। इस स्थिति ने विभाग की चिंता को और बढ़ा दिया, क्योंकि यह दर्शाता है कि या तो वे अपनी अनुपस्थिति को छुपाने की कोशिश कर रहे थे, या उनका संचालन बिना उनकी प्रत्यक्ष निगरानी के चल रहा था।
इस गंभीर लापरवाही और संभावित अवैध संचालन को देखते हुए, स्वास्थ्य विभाग ने दोनों डॉक्टरों को सात दिनों का नोटिस जारी किया है। इस नोटिस के माध्यम से, उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है कि किन परिस्थितियों में वे अपने अस्पतालों का संचालन कर रहे थे और क्या उनके पास सभी आवश्यक वैध प्रमाण पत्र और सरकारी अनुमतियाँ हैं। विभाग को उम्मीद है कि इस नोटिस के माध्यम से डॉक्टरों द्वारा उठाए गए कदमों और उनकी योग्यता के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त की जा सकेगी।
हालांकि, यह भी खबरें सामने आ रही हैं कि नोटिस जारी होने के बावजूद, इन अस्पतालों का संचालन पूर्ववत जारी रहने की चर्चाएं स्थानीय स्तर पर बनी हुई हैं। इस बात ने स्थानीय निवासियों और मीडिया कर्मियों के बीच कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रश्न यह उठ रहा है कि क्या विभाग की कार्रवाई केवल कागजी कार्यवाही तक ही सीमित रहेगी, या फिर वास्तव में उन पर ताला लगाया जाएगा और दोषियों पर मुकदमा चलाया जाएगा। यह स्थिति स्थानीय लोगों के विश्वास को भी प्रभावित कर सकती है।
अस्पतालों के संचालन पर सीएमएचओ का कड़ा रुख
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. देवेश पटेरिया ने किसी भी प्रकार के संरक्षण के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बीएमओ या किसी अन्य स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारी को किसी भी चिकित्सक को अस्पताल संचालित करने की अनुमति देने या उसे संरक्षण देने का अधिकार कतई नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि बीएमओ द्वारा इस तरह का कोई दावा किया जा रहा है या किसी प्रकार का संरक्षण प्रदान किया जा रहा है, तो यह पूर्णतः गलत, अनैतिक और कानून के विरुद्ध है। डॉ. पटेरिया ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि बुधवार के निरीक्षण के बाद, या किसी भी अन्य समय पर, कार्रवाई में किसी भी प्रकार की ढिलाई बरती गई है, तो वे स्वयं पूरे प्रकरण की गहन समीक्षा करेंगे और दोषी अधिकारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेंगे।
स्थानीय स्तर पर ऐसे भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि स्वास्थ्य विभाग के निरीक्षण दल के वहां से निकलने के तुरंत बाद, कथित तौर पर इन अस्पतालों को फिर से खोलकर मरीजों का इलाज शुरू कर दिया गया था। यह आरोप यदि सत्य साबित होते हैं, तो यह विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाता है और यह दर्शाता है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले लोग किस हद तक निर्भीक हो सकते हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से अभी तक पुष्टि नहीं हो पाई है और विभाग इस संबंध में भी जांच कर सकता है। यह पूरा मामला अब स्वास्थ्य विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है, जहां न केवल मरीजों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है, बल्कि प्रदेश में अवैध चिकित्सा पद्धतियों पर प्रभावी ढंग से अंकुश लगाना भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
भविष्य की कार्रवाई और उम्मीदें
यदि आगामी जांच में यह कड़ाई से पुष्टि होती है कि संबंधित डॉक्टर बिना वैध चिकित्सकीय योग्यता, आवश्यक पंजीयन या किसी भी प्रकार की सरकारी अनुमति के मरीजों का इलाज कर रहे थे, तो उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता और भारतीय चिकित्सा परिषद के नियमों के तहत कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसमें न केवल अस्पताल को सील करना, बल्कि भारी जुर्माना लगाना और भविष्य में चिकित्सा व्यवसाय करने पर रोक लगाना भी शामिल हो सकता है। स्वास्थ्य विभाग अब इस बात पर केंद्रित है कि क्या वह केवल नोटिस जारी करने और जवाब मांगने की औपचारिक प्रक्रिया तक ही सीमित रहेगा, या फिर वास्तव में ऐसे अस्पतालों को सील करने, उपकरण जब्त करने और दोषियों को गिरफ्तार करने जैसे निर्णायक और ठोस कदम उठाएगा।
मामले की वास्तविक और पूर्ण स्थिति विस्तृत जांच पूरी होने और संबंधित सरकारी निकायों द्वारा आधिकारिक पुष्टि के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम पर स्थानीय निवासियों, मीडिया कर्मियों और स्वास्थ्य isc.com.in की नजरें टिकी हुई हैं। सभी संबंधित डॉक्टरों से मिलने वाले जवाब और उसके बाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा की जाने वाली अगली प्रतिक्रिया का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है। गौरझामर क्षेत्र में मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, और इस दिशा में प्रभावी कदम उठाए जाने की उम्मीद है। यह मामला अन्य क्षेत्रों के लिए भी एक चेतावनी साबित हो सकता है, ताकि वे समय रहते ऐसे अवैध चिकित्सालयों पर कार्रवाई कर सकें।
