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रानी दुर्गावती विवि: 47 दिन से अनशन जारी, कुलगुरु को हटाने की मांग

रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में शैक्षणेत्तर कर्मचारियों का अनशन 47वें दिन भी जारी है। कर्मचारी संघ ने कुलगुरु पर उदासीनता का आरोप लगाते हुए उन्हें हटाने...

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संवाददाता: डॉ. भूपेंद्र कुमार सुल्लेरे
रानी दुर्गावती विवि: 47 दिन से अनशन जारी, कुलगुरु को हटाने की मांग

Jabalpur | संवाददाता: डॉ. भूपेंद्र कुमार सुल्लेरे

द क्लिफ न्यूज़ | जबलपुर | 22 सितंबर 2026

रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर में शैक्षणेत्तर कर्मचारी संघ द्वारा अपनी लंबित मांगों और विश्वविद्यालय की प्रशासनिक अव्यवस्था के विरोध में चलाया जा रहा क्रमिक अनशन आज 47वें दिन भी जारी रहा। कर्मचारी संघ ने विश्वविद्यालय के कुलगुरु, प्रो. राजेश वर्मा पर कर्मचारियों की जायज मांगों के प्रति गंभीर उदासीनता बरतने का आरोप लगाया है। आंदोलनकारी कर्मचारियों का कहना है कि 47 दिनों के निरंतर विरोध प्रदर्शन, कई ज्ञापनों और वार्ताओं के बावजूद पदोन्नति, वेतन विसंगतियों, अनुकंपा नियुक्तियों और पेंशन जैसे महत्वपूर्ण प्रकरणों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।

कर्मचारी संघ ने विश्वविद्यालय प्रशासन के भीतर समन्वय के घोर अभाव की ओर इशारा किया है। उनके अनुसार, इस स्थिति के कारण प्रशासनिक कामकाज में निरंतर टकराव और निर्णयहीनता की स्थिति बनी हुई है। इस अव्यवस्था का सीधा प्रभाव अब विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के शैक्षणिक जीवन पर पड़ने लगा है। हाल ही में बीए-एलएलबी चतुर्थ सेमेस्टर की परीक्षा में पाठ्यक्रम से बाहर प्रश्न पूछे जाने की घटना ने विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। इससे पहले भी आरडीवीवी परीक्षा प्रकरण में 20 प्रश्नों को गलत पाए जाने के बाद परिणाम संशोधित करने पड़े थे, जिसके कारण विश्वविद्यालय को आर्थिक क्षति हुई और सत्र पिछड़ गया था।

कुलगुरु की नियुक्ति और कार्यप्रणाली पर सवाल

कर्मचारी संघ ने कुलगुरु की नियुक्ति और उनकी कार्यप्रणाली को लेकर पूर्व में भी कई आपत्तियां दर्ज कराई हैं। संघ ने इस बात पर जोर दिया है कि कुलगुरु की योग्यता से संबंधित मामला वर्तमान में उच्च न्यायालय में लंबित है। इसके अतिरिक्त, विश्वविद्यालय में एक महिला अधिकारी से कथित अभद्रता का एक प्रकरण भी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। इन गंभीर परिस्थितियों को देखते हुए, कर्मचारी संघ ने अब जनप्रतिनिधियों से संपर्क साधना शुरू कर दिया है। संघ के पदाधिकारियों ने सांसद और विधायकों को अपने रक्त से हस्ताक्षरित पत्र सौंपकर कुलगुरु को उनके पद से हटाने की मांग को पुरजोर तरीके से उठाया है।

धारा 52 लागू करने की मांग

संघ ने शासन से विश्वविद्यालय में धारा 52 लागू करने का आग्रह किया है। इस धारा के लागू होने से संस्था की प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यवस्था की उच्चस्तरीय समीक्षा की जा सकेगी, जिससे समस्याओं के मूल कारणों का पता लगाया जा सके। अनशन स्थल पर विभिन्न सामाजिक और श्रमिक संगठनों का समर्थन भी प्राप्त हो रहा है। संघ पदाधिकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अब केवल मौखिक आश्वासनों से काम नहीं चलेगा, बल्कि उन्हें कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान हेतु स्पष्ट और लिखित आदेशों की आवश्यकता है। जब तक सभी मांगों का पूर्ण निराकरण नहीं हो जाता, तब तक यह आंदोलन निर्णायक स्तर तक जारी रहेगा।