माधव महाविद्यालय के स्वयंसेवकों ने दीपावली पर स्वच्छता का संदेश फैलाया
ग्वालियर में माधव महाविद्यालय के एनएसएस स्वयंसेवकों ने दीपावली पर सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता संबंधी स्टीकर लगाकर जागरूकता बढ़ाई।

Gwalior | संवाददाता: संजय पांडेय
द क्लिफ न्यूज़ | ग्वालियर | 5 नवंबर 2026
दीपावली के पावन अवसर पर स्वच्छता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ग्वालियर के माधव महाविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना (एन.एस.एस.) इकाई ने शहर भर में एक जन जागरूकता अभियान चलाया है। इस अभियान के तहत महाविद्यालय के स्वयंसेवकों ने शहर के विभिन्न सार्वजनिक स्थलों और बाजारों में स्वच्छता संदेश वाले स्टीकर चिपकाकर नागरिकों को प्रेरित किया। इस पहल का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि पर्व के दौरान लोग अपने घरों के साथ-साथ आसपास के सार्वजनिक स्थानों को भी स्वच्छ रखें।
महाविद्यालय के प्राचार्य, डॉ. शिव कुमार शर्मा ने इस अभियान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दीपावली पर लोग अपने घरों की विशेष सफाई करते हैं, परंतु यह आवश्यक है कि वे सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकने की अपनी आदत में सुधार लाएं। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि वे गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग इकट्ठा करें और उसका उचित निपटान नगर निगम की कचरा संग्रहण गाड़ियों में ही करें। प्राचार्य के अनुसार, इस प्रकार का व्यवहार शहर के समग्र वातावरण को स्वच्छ और स्वस्थ बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
स्वच्छता संदेश और नागरिक सहभागिता
एन.एस.एस. इकाई के स्वयंसेवकों ने केवल स्टीकर चिपकाने तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने नगर निगम की कचरा संग्रहण गाड़ियों का उपयोग करने के लिए भी लोगों को प्रेरित किया। इस अभियान का नेतृत्व जिला संगठक डॉ. मनोज अवस्थी, वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी डॉ. संजय कुमार पाण्डेय और कार्यक्रम अधिकारी डॉ. सरिता दीक्षित ने किया। इस दौरान डॉ. विजय पाण्डेय, डॉ. विकास शुक्ला और डॉ. लाल जी सहित महाविद्यालय के कई शिक्षक भी मौजूद रहे।
स्वयंसेवकों में देवाशीष शर्मा, राज राठौर, तनीष्का सूर्यवंशी, दिलीप चौहान, नकुल शर्मा, शिवम गोड्याले और आशुतोष पालीवाल ने सक्रिय रूप से भाग लिया। माधव महाविद्यालय की इस सामुदायिक सेवा पहल को स्थानीय स्तर पर सराहा जा रहा है, क्योंकि यह दीपावली के उल्लास के बीच स्वच्छता के महत्व को रेखांकित करता है और कचरा प्रबंधन के सही तरीकों के प्रति लोगों को शिक्षित करता है। स्वयंसेवकों का यह प्रयास न केवल एक संदेश देता है, बल्कि भविष्य में भी ऐसे अभियानों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत बनता है।
