गुना में फसल अवशेष जलाने पर रोक, प्रशासन किसानों को कर रहा जागरूक
गुना जिले में मक्का और पराली जलाने पर सख्ती, बमोरी विकासखंड में चौपाल लगाकर किसानों को जागरूक किया जा रहा है। उल्लंघन पर जुर्माना और...

गुना | संवाददाता: राजा हतम वेग
द क्लिफ न्यूज़ | गुना | 30 अक्टूबर 2026
गुना जिले में मक्का, पराली और फसल अवशेष जलाने की घटनाओं पर कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल के निर्देशानुसार कड़े कदम उठाए जा रहे हैं। जिला प्रशासन इस दिशा में किसानों को लगातार जागरूक कर रहा है कि वे अपने खेतों में फसल अवशेष न जलाएं। इसी प्रयास के तहत, बमोरी विकासखंड के ग्राम मगरोडा में राजस्व और कृषि विभाग की एक संयुक्त टीम ने एक विशेष चौपाल का आयोजन किया।
इस जागरूकता चौपाल में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व शिवानी पाठक, जनपद सीईओ पुष्पेंद्र व्यास, तहसीलदार देवदत्त गोलिया और नायब तहसीलदार जयप्रकाश गौतम जैसे वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। इनके साथ ही कृषि विभाग के भी प्रमुख अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक के दौरान, किसानों को विशेष रूप से स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम (एसएमएस) और कंबाइन हार्वेस्टर के उपयोग के लाभों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। अधिकारियों ने समझाया कि एसएमएस या कटर अटैचमेंट जैसे उपकरण फसल अवशेषों को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर खेत में समान रूप से बिखेर देते हैं। इससे बिना आग लगाए ही अगली फसल की बुआई संभव हो जाती है।
फसल अवशेष प्रबंधन के फायदे और विकल्प
किसानों को जैविक खेती को अपनाने और उर्वरकों के संतुलित उपयोग के महत्व पर भी जोर दिया गया। इस चौपाल का मुख्य उद्देश्य किसानों को यह समझाना था कि फसल अवशेष जलाना न केवल पर्यावरण के लिए हानिकारक है, बल्कि इससे भूमि की उर्वरता भी कम होती है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिले में फसल अवशेष जलाना पूर्णतः प्रतिबंधित है।
उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई
प्रशासन ने यह भी आगाह किया है कि आदेश का उल्लंघन करने वाले किसानों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। नियमों का पालन न करने पर मौके पर ही पंचनामा तैयार किया जाएगा और ऐसे किसानों पर जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अतिरिक्त, प्रतिबंधित आदेशों की अवहेलना करने वाले कृषकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
प्रशासन का दृढ़ मत है कि आधुनिक कृषि यंत्रों के उचित प्रबंधन से न केवल पर्यावरण को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी, बल्कि भूमि की उपजाऊ शक्ति भी संरक्षित रहेगी। विभाग ने सभी किसानों से आग्रह किया है कि वे आग लगाने की बजाय वैकल्पिक और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाएं, ताकि वे किसी भी कानूनी कार्रवाई से बच सकें और साथ ही पर्यावरण संरक्षण में अपना योगदान दे सकें।
