देवरी के शासकीय छात्रावासों में सुरक्षा और बजट पर सवाल, जांच की मांग तेज
देवरी के शासकीय छात्रावासों में सुरक्षा, भोजन और अधीक्षकों की अनुपस्थिति पर चिंता। एक अधीक्षक को कई छात्रावासों का प्रभार देने पर उठाए गए सवाल।...

देवरी जिला सागर मध्यप्रदेश | संवाददाता: त्रिवेंद्र जाट
द क्लिफ न्यूज़ | 22 सितंबर 2026
मध्य प्रदेश के सागर जिले के देवरी विधानसभा क्षेत्र में संचालित लगभग 10 शासकीय छात्रावासों की व्यवस्थाओं पर स्थानीय निवासियों ने गंभीर प्रश्नचिह्न लगाए हैं। गौरझामर, केसली, सहजपुर और महाराजपुर जैसे स्थानों पर स्थित इन छात्रावासों में विद्यार्थियों की सुरक्षा, भोजन की गुणवत्ता और विभागीय निगरानी को लेकर चिंताएं जताई जा रही हैं। अभिभावकों की मुख्य चिंता छात्रावास अधीक्षकों की रात्रिकालीन अनुपस्थिति को लेकर है, जो बच्चों की सुरक्षा पर सवाल खड़े करती है।
वर्तमान व्यवस्थाओं में सबसे अधिक चर्चा एक ही अधीक्षक को एक से अधिक छात्रावासों का अतिरिक्त प्रभार सौंपे जाने के निर्णय को लेकर है। शिकायतकर्ताओं का तर्क है कि इससे किसी भी एक छात्रावास पर पर्याप्त ध्यान देना और नियमित निगरानी करना अधीक्षकों के लिए व्यावहारिक रूप से संभव नहीं हो पाता। क्षेत्रवासियों ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यदि किसी अधीक्षक के विरुद्ध पहले से ही अनियमितताएं या शिकायतें लंबित हैं, तो ऐसे में उन्हें अतिरिक्त प्रभार देने का प्रशासनिक औचित्य क्या है। इन परिस्थितियों में वरिष्ठ अधिकारियों और संबंधित कर्मियों के बीच मिलीभगत की आशंकाएं भी व्यक्त की जा रही हैं।
जांच की मांग और वित्तीय अनियमितताओं की आशंका
इन गंभीर आरोपों के मद्देनजर, स्थानीय लोगों ने प्रशासनिक स्तर पर जांच की मांग तेज कर दी है। उनका आग्रह है कि जिला स्तरीय टीम द्वारा इन छात्रावासों का अचानक औचक निरीक्षण किया जाए। निवासियों ने पिछले एक वर्ष में जारी किए गए सभी अतिरिक्त प्रभार आदेशों की समीक्षा करने और प्रत्येक छात्रावास में भोजन, सामग्री, स्टॉक रजिस्टर तथा बजट व्यय के रिकॉर्ड का भौतिक सत्यापन करने की भी मांग की है। यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि विद्यार्थियों को शासन के नियमों के अनुसार स्वच्छ पेयजल, बिजली और निर्धारित मीनू के अनुसार भोजन मिल रहा हो।
विभागीय अधिकारियों से हस्तक्षेप का आग्रह
छात्रावासों की व्यवस्थाओं को लेकर उठ रहे इन सवालों के बीच, विभागीय अधिकारियों की भूमिका पर भी लोगों की नजरें टिकी हैं। स्थानीय लोगों ने जनजातीय कार्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से स्वयं मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेने का आग्रह किया है। यदि जांच में किसी भी प्रकार की वित्तीय या प्रशासनिक अनियमितता पाई जाती है, तो नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही, बच्चों की सुरक्षा के प्रति बरती जा रही कथित लापरवाही पर स्पष्टीकरण भी मांगा गया है, ताकि छात्रावासों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के भविष्य और सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता न हो सके।
