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कूनो में चीते के शावक की मौत पर भागीरथ तिवारी ने उठाए सुरक्षा पर सवाल, उच्चस्तरीय जांच की मांग

शरीर से मिले बंदूक के पांच छर्रे, केंद्र ने गठित की जांच टीम; दोषियों पर सख्त कार्रवाई और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की...

Few hours ago
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कूनो में चीते के शावक की मौत पर भागीरथ तिवारी ने उठाए सुरक्षा पर सवाल, उच्चस्तरीय जांच की मांग

द क्लिफ़ न्यूज़, करेली/श्योपुर

 

मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से जुड़े 19 माह के नर चीते की गोली के छर्रे लगने से हुई मौत ने वन्यजीव सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भारतीय जीव-जंतु कल्याण बोर्ड से नियुक्त मानद पशु कल्याण प्रतिनिधि एवं राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण से नियुक्त प्रतिनिधि भागीरथ तिवारी ने घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए विशेष जांच दल से निष्पक्ष जांच कराने, दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही निर्धारित करने की मांग की है।

 

भागीरथ तिवारी ने जारी विज्ञप्ति में कहा कि भारत की महत्वाकांक्षी ‘प्रोजेक्ट चीता’ परियोजना के अंतर्गत संरक्षित चीतों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। करोड़ों रुपये खर्च करने और निगरानी व्यवस्था विकसित करने के बावजूद चीते के शावक पर गोली चलने की घटना अत्यंत गंभीर है। उन्होंने सवाल उठाया कि आधुनिक निगरानी तकनीक और वनकर्मियों की तैनाती के बावजूद वन्यजीवों की सुरक्षा में ऐसी चूक कैसे हुई।

 

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अनुसार, मादा चीता निर्वा का 19 माह का नर शावक KNG22 गत 25 अक्टूबर 2026 को कूनो राष्ट्रीय उद्यान के संरक्षित क्षेत्र से बाहर मुरैना के वन क्षेत्र में घायल मिला था। उसे बचाकर जबलपुर में गहन चिकित्सा और आपातकालीन सर्जरी की गई। ऑपरेशन के दौरान शरीर से बंदूक के पांच छर्रे निकाले गए। गंभीर आंतरिक चोटों के कारण 27 अक्टूबर को उसकी मौत हो गई। Press Information Bureau

 

तिवारी ने आशंका व्यक्त की कि घटना के पीछे अवैध शिकार अथवा मानव-वन्यजीव संघर्ष की परिस्थितियां हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि जांच में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि गोली किसने चलाई, किस हथियार का इस्तेमाल हुआ और घटना के समय संबंधित क्षेत्र में वन विभाग की निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी थी।

 

मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने 28 अक्टूबर को उच्चस्तरीय जांच टीम नियुक्त की है। इसमें राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के वन महानिरीक्षक तथा वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। मध्य प्रदेश सरकार भी वन एवं पुलिस अधिकारियों का विशेष कार्यबल गठित कर चुकी है। केंद्रीय टीम सुरक्षा प्रोटोकॉल, निगरानी व्यवस्था और घटना से जुड़े साक्ष्यों की जांच करेगी। Press Information Bureau

 

भागीरथ तिवारी ने मांग की कि जांच में वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो और विशेष कार्यबल की प्रभावी भूमिका सुनिश्चित की जाए। साथ ही जिन अधिकारियों की लापरवाही प्रमाणित हो, उनके विरुद्ध निलंबन सहित नियमानुसार विभागीय कार्रवाई की जाए।

 

उन्होंने कहा कि कूनो राष्ट्रीय उद्यान के आसपास फैले वन्यजीव गलियारों में गश्त बढ़ाई जाए, अवैध हथियारों और शिकार गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जाए तथा स्थानीय ग्रामीणों के साथ समन्वय मजबूत किया जाए।

 

तिवारी ने केंद्र और राज्य सरकार से आग्रह किया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर ठोस सुधारात्मक कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट चीता की सफलता केवल चीतों की संख्या बढ़ाने में नहीं, बल्कि प्रत्येक चीते की सुरक्षित प्राकृतिक जीवन-व्यवस्था सुनिश्चित करने में निहित है।

 

 

 

 

 

 

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