नई पेंशन व्यवस्था लागू, पेंशनर्स भुगतान में देरी से परेशान
नई पेंशन व्यवस्था के कारण मध्य प्रदेश में PPO जारी होने व भुगतान में देरी से पेंशनर्स परेशान हैं। पेंशनर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने तत्काल सुधार की मांग की है।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 23 अगस्त 2026
मध्य प्रदेश में 1 अप्रैल 2026 से लागू की गई नई पेंशन व्यवस्था के क्रियान्वयन के बाद सेवानिवृत्त कर्मचारियों और पेंशनर्स को अपने मामलों के निपटारे में अत्यधिक देरी का सामना करना पड़ रहा है। पेंशन भुगतान आदेश (PPO) जारी होने में महीनों का विलंब, इसके बाद बैंक तक पहुंचने में लगने वाला अतिरिक्त समय और सेवानिवृत्ति लाभों के भुगतान में हो रही देरी ने पेंशनर्स के बीच गहरी नाराजगी पैदा कर दी है। पेंशन वेलफेयर एसोसिएशन ने इस स्थिति को चिंताजनक बताते हुए शासन और वित्त विभाग से अविलंब व्यवस्था में सुधार की वकालत की है।
वित्त विभाग द्वारा पेंशन संबंधी कार्यों को केंद्रीकृत करने के उद्देश्य से पूर्व में संचालित संभागीय पेंशन कार्यालयों को बंद कर संचालनालय स्तर पर एकीकृत पेंशन कार्यालय स्थापित किया गया था। इस व्यवस्था का मुख्य लक्ष्य पेंशन प्रक्रियाओं को अधिक सुव्यवस्थित, पारदर्शी और कुशल बनाना था। हालांकि, धरातल पर इस नई प्रणाली के लागू होने के बाद कई गंभीर व्यावहारिक समस्याएं उत्पन्न हो गई हैं, जिससे पेंशनर्स को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
PPO और सेवानिवृत्ति लाभों के भुगतान में भारी विलंब
पेंशन वेलफेयर एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष एस.के. शर्मा ने बताया कि संगठन को लगातार उन पेंशनर्स और सेवानिवृत्त कर्मचारियों से शिकायतें प्राप्त हो रही हैं, जिनके पेंशन भुगतान आदेश (PPO) जारी होने में दो से तीन महीने तक का समय लग रहा है। इसके उपरांत, जारी किए गए PPO को संबंधित बैंक तक पहुंचने में भी लगभग दो महीने या उससे अधिक समय लग रहा है। इस पूरी प्रक्रिया में हो रही देरी के कारण पेंशन शुरू होने में अनावश्यक विलंब हो रहा है, जिससे पेंशनर्स की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है।
इसी प्रकार, संचालनालय स्तर से भुगतान की जाने वाली उपादान (ग्रेच्युटी) राशि के भुगतान में भी देरी की शिकायतें आम हो गई हैं। सेवानिवृत्ति के बाद प्राप्त होने वाले ये वित्तीय लाभ, जो कर्मचारी और उसके परिवार की आर्थिक सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं, के भुगतान में महीनों की देरी हो रही है। एसोसिएशन का मानना है कि यह स्थिति केवल एक प्रशासनिक समस्या तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बुजुर्ग पेंशनर्स के लिए गंभीर आर्थिक कठिनाइयाँ भी उत्पन्न कर रही है, खासकर ऐसे समय में जब उनकी नियमित आय बंद हो चुकी होती है।
दूरदराज के पेंशनर्स के लिए परेशानी का सबब
नई व्यवस्था के तहत सबसे अधिक परेशानी प्रदेश के दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले सेवानिवृत्त कर्मचारियों को हो रही है। उन्हें अपनी पेंशन और PPO से संबंधित जानकारी प्राप्त करने के लिए भोपाल स्थित संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। कार्यालय पहुंचने के बाद भी, उन्हें अपने मामले की वर्तमान स्थिति या भुगतान की अनुमानित समय-सीमा के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाती।
पेंशनर्स ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय तक जानकारी की तलाश में जाने के बावजूद उनकी समस्या का संतोषजनक समाधान नहीं हो पा रहा है। उम्रदराज कर्मचारियों के लिए बार-बार भोपाल आना-जाना न केवल शारीरिक रूप से थकाने वाला है, बल्कि आर्थिक रूप से भी यह एक अतिरिक्त बोझ है। कई पेंशनर्स अंततः अपनी समस्याओं के समाधान के लिए पेंशन वेलफेयर एसोसिएशन से संपर्क करने को मजबूर हो रहे हैं।
अधिकारियों के आश्वासन के बावजूद अनिश्चितता
एसोसिएशन द्वारा पेंशन प्रकरणों की स्थिति जानने के लिए संबंधित अधिकारियों से संपर्क किए जाने पर भी, कई मामलों में प्रकरण की वर्तमान स्थिति और उसके निराकरण की निश्चित समय-सीमा के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाती है। इस अनिश्चितता के कारण पेंशनर्स के बीच असमंजस और असंतोष की भावना बनी हुई है।
एसोसिएशन का तर्क है कि यदि नई व्यवस्था का उद्देश्य पेंशनर्स को बेहतर और त्वरित सेवा प्रदान करना है, तो इसके लिए पर्याप्त प्रशासनिक ढांचा, स्पष्ट जवाबदेही और समयबद्ध प्रक्रिया सुनिश्चित करना अनिवार्य है। केवल कार्यालयों का एकीकरण कर देने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि प्रत्येक पेंशन प्रकरण की बारीकी से निगरानी और निर्धारित समय-सीमा के भीतर उसके निष्पादन की एक मजबूत प्रणाली स्थापित करनी होगी।
समयबद्ध भुगतान और पारदर्शी सूचना व्यवस्था की मांग
पेंशन वेलफेयर एसोसिएशन ने प्रदेश सरकार और वित्त विभाग से पुरजोर मांग की है कि लंबित PPO प्रकरणों की तत्काल समीक्षा की जाए और उनका शीघ्रताशीघ्र निपटारा किया जाए। जिन पेंशनर्स के PPO पहले ही जारी हो चुके हैं, उन्हें संबंधित बैंकों तक समय पर पहुंचाने के लिए प्रभावी तंत्र विकसित किया जाए। इसके अतिरिक्त, लंबित पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों के भुगतान के लिए एक स्पष्ट और बाध्यकारी समय-सीमा निर्धारित की जानी चाहिए।
एसोसिएशन ने यह भी आग्रह किया है कि पेंशनर्स को अपने प्रकरण की अद्यतन स्थिति जानने के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता न पड़े। इसके लिए एक पारदर्शी सूचना प्रणाली विकसित की जाए, जिससे पेंशनर्स अपने प्रकरण की स्थिति और संभावित भुगतान की जानकारी घर बैठे ही प्राप्त कर सकें।
एस.के. शर्मा ने कहा कि सरकार की नई व्यवस्था के पीछे का उद्देश्य भले ही नेक हो, लेकिन इसका वास्तविक लाभ तभी संभव है जब इसका क्रियान्वयन संवेदनशीलता, पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ किया जाए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जिन पेंशनर्स ने वर्षों तक शासन की सेवा की है, सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें अपने वैधानिक लाभों के लिए किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े, यह राज्य सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
एसोसिएशन ने शासन से अनुरोध किया है कि वर्तमान व्यवस्था की व्यावहारिक कठिनाइयों को अविलंब दूर किया जाए और लंबित पेंशन, PPO एवं उपादान के मामलों का शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित किया जाए, ताकि प्रदेश के सेवानिवृत्त कर्मचारियों और पेंशनर्स को राहत मिल सके और वे सम्मानजनक जीवन जी सकें।
