नवीन न्याय संहिताओं पर आधारित प्रदर्शनी का सफल समापन, डीजीपी ने की सराहना
भोपाल में पांच दिवसीय प्रदर्शनी का समापन हुआ, जिसमें नवीन न्याय संहिताओं को सरल रूप में समझाया गया। डीजीपी श्री कैलाश मकवाणा ने आधुनिक पुलिसिंग और फॉरेंसिक तकनीक के प्रदर्शन की प्रशंसा की।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 7 अक्टूबर 2026
मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय द्वारा आयोजित नवीन न्याय संहिताओं पर आधारित पांच दिवसीय भव्य प्रदर्शनी का आज भोपाल के भेल दशहरा मैदान में सफलतापूर्वक समापन हो गया। इस प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य आमजन को भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) एवं भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) जैसे नए कानूनों के प्रावधानों को सरल, सहज और व्यावहारिक तरीके से समझाना था। पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और आधुनिक पुलिसिंग, फॉरेंसिक तकनीक तथा न्याय प्रक्रिया के सजीव प्रदर्शनों की विशेष रूप से सराहना की।
प्रदर्शनी में अपराध की सूचना मिलने से लेकर पुलिस कार्रवाई, वैज्ञानिक अनुसंधान, फॉरेंसिक जांच, अभियोजन और अंततः न्यायालयीन प्रक्रिया तक की पूरी व्यवस्था को 14 विशेष जोन में मॉडल, डिजिटल डिस्प्ले, वीडियो, लाइव डेमो और सजीव नाट्य मंचन के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। श्री मकवाणा ने कहा कि इस तरह की पहल पुलिस की कार्यप्रणाली और नई न्याय व्यवस्था को आमजन और युवाओं के लिए अधिक सुलभ बनाती है। उन्होंने पुलिस, फॉरेंसिक, चिकित्सा, अभियोजन और न्यायिक प्रक्रिया के बीच बेहतर समन्वय पर भी प्रकाश डाला।
नवीन संहिताओं के प्रावधानों का व्यावहारिक प्रदर्शन
केंद्रीय गृह मंत्रालय के मार्गदर्शन में आयोजित इस प्रदर्शनी में नवीन आपराधिक न्याय प्रणाली के विभिन्न पहलुओं को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रखकर, उसे क्रियान्वित रूप में दिखाया गया। इसमें पुलिस, फॉरेंसिक, चिकित्सा, अभियोजन, न्यायपालिका और जेल प्रशासन की समन्वित भूमिका को प्रमुखता से दर्शाया गया। नागरिकों को आधुनिक आपराधिक न्याय प्रणाली की पूरी कार्यप्रणाली को करीब से जानने और समझने का अवसर मिला, जो कि प्रदर्शनी का एक महत्वपूर्ण पहलू था।
अभियोजन एवं न्यायालय चरण का सजीव मंचन
प्रदर्शनी के अंतिम दिन तृतीय चरण, जिसमें अभियोजन और न्यायालयीन कार्यवाही को समझाया गया, उसका विशेष रूप से सजीव नाट्य मंचन किया गया। इस प्रस्तुति में यह दर्शाया गया कि किस प्रकार विवेचना के उपरांत प्रकरण अभियोजन के लिए तैयार होता है, अभियोजन की भूमिका क्या होती है, न्यायालयीन कार्यवाही कैसे संचालित होती है और अंततः न्याय कैसे प्राप्त होता है।
इस दौरान CCTNS (Crime and Criminal Tracking Network & Systems) और ICJS (Inter-Operable Criminal Justice System) जैसी आधुनिक डिजिटल प्रणालियों के महत्व को भी रेखांकित किया गया। प्रस्तुति के माध्यम से यह स्पष्ट किया गया कि कैसे विभिन्न चरणों के बीच डिजिटल सूचना और कार्यप्रणाली का समन्वय त्वरित और व्यवस्थित न्याय प्रदान करने में सहायक होता है।
ICJS के माध्यम से ‘एंड-टू-एंड’ डिजिटल न्याय प्रक्रिया
प्रदर्शनी में ICJS और CCTNS के माध्यम से पूरी आपराधिक न्याय प्रक्रिया को शुरुआत से अंत तक डिजिटल रूप में प्रदर्शित किया गया। ‘वन डेटा, वन एंट्री’ के सिद्धांत पर आधारित इस व्यवस्था में पुलिस से लेकर अभियोजन, स्वास्थ्य, फॉरेंसिक, जेल और न्यायालय तक विभिन्न चरणों में तकनीक के उपयोग और आपसी समन्वय को समझाया गया।
पुलिस स्तर पर CCTNS और e-साक्ष्य के माध्यम से FIR दर्ज करने, डिजिटल साक्ष्य एकत्र करने, e-Zero FIR और जांच प्रबंधन की प्रक्रियाओं को प्रदर्शित किया गया। तलाशी, जब्ती और अपराध स्थल से संबंधित ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग तथा e-Summon जैसी डिजिटल सुविधाओं की जानकारी भी दी गई। अभियोजन स्तर पर e-Prosecution पोर्टल के माध्यम से आरोप-पत्र के त्वरित मूल्यांकन और केस फाइलों की डिजिटल जांच को समझाया गया। स्वास्थ्य एवं फॉरेंसिक स्तर पर MedLEaPR के माध्यम से मेडिको-लीगल जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मानकीकृत निर्माण व हस्तांतरण तथा e-Forensics के माध्यम से वैज्ञानिक केस ट्रैकिंग को प्रदर्शित किया गया। जेल प्रशासन के लिए e-Prisons प्रणाली और न्यायालयीन प्रक्रिया के लिए e-Courts, न्याय श्रुति एवं e-Summon जैसी व्यवस्थाओं को भी सजीव रूप में प्रस्तुत किया गया।
रंगमंचीय प्रस्तुति से ‘घटना से न्याय तक’ की यात्रा
अपराध अनुसंधान विभाग के तत्वावधान में तैयार की गई रंगमंचीय प्रस्तुति ने घटना घटित होने से लेकर पुलिस सहायता, थाने की कार्यप्रणाली, अपराध की खोजबीन, चिकित्सकीय सहायता, वैज्ञानिक अनुसंधान, फॉरेंसिक परीक्षण, अभियोजन और न्यायालयीन कार्यवाही तक की पूरी प्रक्रिया को सजीव रूप से दर्शाया। श्री आनंद यादव द्वारा निर्देशित इस प्रस्तुति में नवीन न्याय संहिताओं के व्यावहारिक उपयोग को भी प्रदर्शित किया गया, जिसकी वरिष्ठ अधिकारियों ने सराहना की।
आधुनिक फॉरेंसिक तकनीकों का प्रदर्शन
प्रदर्शनी में NAFIS (National Automated Fingerprint Identification System) के माध्यम से घटनास्थल से प्राप्त फिंगरप्रिंट व पामप्रिंट के आधार पर पहचान की प्रक्रिया को समझाया गया। MCU (Measurement Collection Unit) के माध्यम से अपराधियों के बायोमेट्रिक और पहचान संबंधी विवरण संकलन की प्रक्रिया भी प्रदर्शित की गई, जिसमें आइरिस स्कैन और डिजिटल फोटोग्राफी जैसे मापदंडों का उपयोग दिखाया गया। 3D क्राइम सीन मॉडल के माध्यम से घटनास्थल को सुरक्षित करने, साक्ष्यों का वैज्ञानिक संकलन, फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की भूमिका को स्पष्ट किया गया। Mobile Forensic Units, FSL तथा DNA, Biology, Chemistry, Toxicology, Ballistics, Physics और Voice Analysis जैसी विभिन्न वैज्ञानिक जांच विधियों की जानकारी भी दी गई।
तकनीक आधारित पुलिस सेवाएं: डायल-112 से साइबर सुरक्षा तक
प्रदर्शनी में डायल-112 के माध्यम से आपातकालीन कॉल प्राप्त होने से लेकर सूचना संकलन, डिस्पैच और वरिष्ठ अधिकारियों की मॉनिटरिंग तक की प्रक्रिया का लाइव प्रदर्शन किया गया। साइबर सुरक्षा जोन में ऑनलाइन ठगी से बचाव, 1930 पर तत्काल सूचना, साइबर फ्रॉड के ‘गोल्डन ऑवर’ और सुरक्षित डिजिटल व्यवहार से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी नागरिकों को प्रदान की गई।
इसके अतिरिक्त, ‘ऑपरेशन मुस्कान’ के माध्यम से गुम हुए बालक-बालिकाओं की तलाश और उन्हें परिजनों तक पहुंचाने की पुलिस कार्यप्रणाली को भी समझाया गया। महिला हेल्प डेस्क के माध्यम से महिलाओं को उपलब्ध पुलिस सहायता और उनके विधिक अधिकारों की जानकारी भी दी गई।
युवाओं और विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण सहभागिता
पांच दिनों के दौरान नागरिकों, विद्यार्थियों और युवाओं ने प्रदर्शनी में बड़ी संख्या में भाग लिया। उन्होंने फॉरेंसिक विज्ञान, डायल-112, पुलिसिंग, अभियोजन और न्यायालयीन प्रक्रिया से जुड़े प्रदर्शनों को देखा तथा लाइव क्विज में भी हिस्सा लिया। युवा आगंतुकों ने आधुनिक तकनीक, फॉरेंसिक अनुसंधान और नागरिक सुरक्षा से जुड़ी प्रस्तुतियों को बेहद उपयोगी और ज्ञानवर्धक बताया।
यह प्रदर्शनी आमजन को कानून और न्याय व्यवस्था से जोड़ने की एक अभिनव पहल साबित हुई, जिसने न केवल कानूनों की जानकारी दी, बल्कि यह भी समझाया कि किसी घटना के बाद न्याय प्रणाली किस प्रकार कार्य करती है। तकनीक-सक्षम, वैज्ञानिक, समन्वित और नागरिक-केंद्रित आधुनिक आपराधिक न्याय व्यवस्था की कार्यप्रणाली को सरल भाषा, डिजिटल तकनीक और सजीव प्रस्तुतियों के माध्यम से आमजन तक सफलतापूर्वक पहुंचाया गया।
