महोबा में चार नवजात बालिकाओं का उत्सव, महिला कल्याण विभाग ने बांटीं बेबी किट
महोबा के ग्राम ग्योड़ी में महिला कल्याण विभाग ने चार नवजात बालिकाओं के सम्मान में जन्मोत्सव मनाया और बेबी किट वितरित कीं। कार्यक्रम का उद्देश्य...

MAHOBA | संवाददाता: अभिनय सिंह चंदेल
द क्लिफ न्यूज़ | महोबा | 5 नवंबर 2026
उत्तर प्रदेश के महोबा जिले के ग्राम ग्योड़ी में महिला कल्याण विभाग द्वारा एक अनूठा कन्या जन्मोत्सव एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम के माध्यम से समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने और उन्हें शिक्षित करने के महत्व को रेखांकित किया गया। इस अनूठी पहल के तहत, चार नवजात कन्याओं के जन्म का उत्सव मनाया गया और उन्हें बेबी किट वितरित की गईं। यह आयोजन न केवल नवजात शिशुओं के प्रति स्नेह व्यक्त करने का एक माध्यम बना, बल्कि लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण के व्यापक संदेश को भी बढ़ावा देने में सहायक सिद्ध हुआ।
कबरई ब्लॉक के ग्राम ग्योड़ी में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बेटियों के जन्म पर गर्व और खुशी का माहौल बनाना था, जो अक्सर सामाजिक पूर्वाग्रहों के कारण दबा दिया जाता है। इस आयोजन ने 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभियानों को भी मजबूती प्रदान की, ताकि समाज की सोच में सकारात्मक बदलाव लाया जा सके। कार्यक्रम में उपस्थित विभागीय अधिकारियों और ग्रामवासियों ने बेटियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की और उनके विकास के प्रति प्रतिबद्धता जताई।
कन्या जन्मोत्सव के जरिए 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' का संदेश
महिला कल्याण विभाग द्वारा आयोजित इस कन्या जन्मोत्सव कार्यक्रम का एक प्रमुख लक्ष्य समाज में व्याप्त लैंगिक असमानता को दूर करना और बेटियों के जन्म को एक उत्सव के रूप में मनाना था। इस प्रकार के आयोजन समाज में यह संदेश पहुंचाते हैं कि बेटियां बेटों से कम नहीं हैं और उन्हें भी समान अवसर और सम्मान मिलना चाहिए। विभाग का मानना है कि जब तक समाज की मानसिकता में बदलाव नहीं आएगा, तब तक 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' जैसे अभियान पूरी तरह सफल नहीं हो सकते। चार नवजात कन्याओं को बेबी किट वितरित कर, विभाग ने उनके स्वस्थ भविष्य की कामना की और उनके परिवारों को भी बेटियों के पालन-पोषण और शिक्षा के प्रति प्रेरित किया।
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने हेतु स्वरोजगार के अवसर
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला मिशन कोऑर्डिनेटर प्रिया गुप्ता ने उपस्थित महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने सिलाई, जैविक खाद निर्माण और जैविक खरपतवारनाशक तैयार करने जैसे विभिन्न कौशलों को सीखने पर जोर दिया। गुप्ता ने बताया कि इन कौशलों को सीखकर महिलाएं अपना स्वरोजगार शुरू कर सकती हैं और आर्थिक रूप से सशक्त बन सकती हैं। उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि महिलाओं का कौशल विकास और उनकी आर्थिक स्वतंत्रता बुंदेलखंड के समृद्ध और खुशहाल भविष्य की नींव है। विभाग ऐसी योजनाओं पर भी काम कर रहा है जिनसे महिलाओं को इन कौशलों को सीखने और स्वरोजगार स्थापित करने में मदद मिल सके।
बालिकाओं की सुरक्षा, शिक्षा और सम्मान पर जोर
जेंडर स्पेशलिस्ट रुचि दीक्षित और रीता चौरसिया ने इस बात पर विशेष बल दिया कि बेटियों की शिक्षा और महिलाओं के कौशल विकास से ही एक मजबूत और खुशहाल समाज का निर्माण संभव है। उन्होंने उपस्थित महिलाओं को बालिकाओं की सुरक्षा, उनके शिक्षा के अधिकार और उनके सम्मान के प्रति जागरूक किया। उन्होंने बताया कि विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाकर महिलाएं अपने जीवन स्तर को सुधार सकती हैं। इस अवसर पर ग्राम प्रधान सिद्ध नारायण यादव और ग्राम पंचायत सचिव सर्वेश कुमार मिश्रा सहित लगभग 80 महिलाएं और विभागीय अधिकारी मौजूद रहे। यह पहल समाज में कन्या भ्रूण हत्या जैसी गहरी जड़ें जमा चुकी कुरीतियों को समाप्त करने और बेटियों के प्रति सम्मान की भावना को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और साहसिक कदम है। अधिकारियों ने महिलाओं को सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए भी प्रेरित किया और उन्हें हर संभव सहायता का आश्वासन दिया।
