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जिल कार-हैरिस चंबल में: गांधीवादी शांति पहल का वैश्विक विस्तार

कनाडा की शांति कार्यकर्ता जिल कार-हैरिस ने मुरैना में डॉ. राजगोपाल के साथ वैश्विक शांति और अहिंसक अर्थव्यवस्था पर जोर दिया। नवंबर में कनाडाई कार्यकर्ता...

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•संवाददाता: दिनेश सिकरवार
जिल कार-हैरिस चंबल में: गांधीवादी शांति पहल का वैश्विक विस्तार

JOURA DISTRICT-MORENA | संवाददाता: दिनेश सिकरवार

द क्लिफ न्यूज़ | मुरैना | 30 अक्टूबर 2026

अंतरराष्ट्रीय शांति स्थापना के प्रयासों को गति देते हुए, एकता परिषद की महिला विंग की अंतरराष्ट्रीय संयोजक जिल कार-हैरिस पांच दिवसीय यात्रा पर चंबल क्षेत्र पहुंची हैं। उनका यह दौरा वैश्विक शांति के लिए गांधीवादी विचारधारा को आगे बढ़ाने और भारत व कनाडा के सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से हो रहा है। मुरैना रेलवे स्टेशन पर एकता परिषद के संस्थापक डॉ. राजगोपाल पी. व्ही. और बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं पत्रकारों द्वारा उनका भव्य स्वागत किया गया।

अपनी यात्रा के दौरान, जिल कार-हैरिस ने विशेष रूप से अमेरिका और कनाडा के बीच उत्पन्न हो रहे तनाव पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ऐसी वैश्विक परिस्थितियों में, राजनीतिक शांति के साथ-साथ आर्थिक व्यवस्था में भी अहिंसा, पर्यावरण संवेदनशीलता और न्याय की आवश्यकता है। कार-हैरिस ने इस बात पर जोर दिया कि गांधीवादी सिद्धांत वर्तमान दुनिया में शांति स्थापना के लिए एक ठोस आधार प्रदान कर सकते हैं।

वैश्विक शांति के लिए शांति सेना का निर्माण

जिल कार-हैरिस ने कनाडा में 'पीस मैगजीन' के माध्यम से परमाणु हथियारों की संस्कृति के विरुद्ध जनचेतना जगाने के अपने प्रयासों का उल्लेख किया। उनका महत्वाकांक्षी लक्ष्य 16,000 किलोमीटर दूर कनाडा में गांधीवादी पदयात्राओं की तर्ज पर एक 'शांति सेना' का गठन करना है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य हथियारों की प्रतिस्पर्धा को कम करना और विभिन्न राष्ट्रों के बीच संवाद तथा अहिंसा के मार्ग को प्रशस्त करना है। वह मानती हैं कि यह कदम वैश्विक स्तर पर अनावश्यक संघर्षों को कम करने में सहायक सिद्ध होगा। वह विशेष रूप से इस बात पर बल देती हैं कि ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय संबंध तनावपूर्ण हो सकते हैं, अहिंसक प्रतिरोध और संवाद ही स्थायी समाधान का मार्ग प्रशस्त कर सकते हैं। कनाडा में उनके द्वारा शुरू की गई यह पहल, स्थानीय स्तर पर अहिंसा के सिद्धांतों को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांतिपूर्ण समाधानों को बढ़ावा देने का एक प्रयास है।

अहिंसक अर्थव्यवस्था और आर्थिक न्याय पर बल

शांति स्थापना के लिए आर्थिक न्याय की अनिवार्यता को रेखांकित करते हुए, जिल कार-हैरिस ने 'अहिंसक अर्थव्यवस्था' की अवधारणा पर विशेष बल दिया। उन्होंने बताया कि कनाडा में 'पीस इकोनॉमी' के माध्यम से छोटे व्यवसायों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य शोषण और असमानता को समाप्त कर, प्रत्येक व्यक्ति के लिए सम्मानजनक आजीविका सुनिश्चित करना है। कार-हैरिस के अनुसार, पर्यावरण संरक्षण और समान कार्य के लिए समान वेतन जैसे मुद्दे एक न्यायपूर्ण और शांतिपूर्ण समाज के निर्माण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। यह आर्थिक मॉडल न केवल व्यक्तिगत गरिमा को बनाए रखता है, बल्कि सामुदायिक विकास और सामाजिक समरसता को भी बढ़ावा देता है। उनका मानना है कि आर्थिक असमानता अक्सर संघर्षों का मूल कारण बनती है, इसलिए अहिंसक अर्थव्यवस्था का विकास शांति का एक मजबूत स्तंभ है।

'एक्सपेरिएंसिंग गांधी' से मजबूत होंगे द्विपक्षीय संबंध

इस यात्रा का एक महत्वपूर्ण पहलू भारत और कनाडा के बीच अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूती प्रदान करना है। इसी क्रम में, नवंबर माह में कनाडा से कार्यकर्ताओं का एक दल चंबल घाटी स्थित महात्मा गांधी सेवा आश्रम का दौरा करेगा। इस 'एक्सपेरिएंसिंग गांधी' नामक कार्यक्रम के तहत, विदेशी कार्यकर्ता चंबल की पावन धरती पर गांधीवादी विचारधारा, अहिंसक आंदोलनों के संचालन के तरीके और सामाजिक परिवर्तन के व्यावहारिक प्रयोगों को गहनता से समझेंगे। यह प्रयास न केवल दोनों देशों के सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच संबंधों को एक नई दिशा देगा, बल्कि गांधी के सिद्धांतों के वैश्विक प्रसार में भी मील का पत्थर साबित होगा। इस आदान-प्रदान से प्राप्त ज्ञान और अनुभव भविष्य में दोनों देशों में शांति और सामाजिक न्याय के आंदोलनों को और अधिक प्रभावी बनाएंगे। यह पहल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गांधीवादी मूल्यों को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

आदिवासी महिलाओं के सशक्तिकरण में अग्रणी भूमिका

जिल कार-हैरिस ने अपने पेशेवर जीवन में आदिवासी और वंचित समुदायों की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने इन महिलाओं को जल, जंगल और जमीन जैसे उनके मौलिक अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाली सशक्त नेतृत्वकर्ताओं के रूप में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई है। डॉ. राजगोपाल पी. व्ही. के साथ मिलकर, उन्होंने एकता परिषद के बैनर तले भूमिहीनों और गरीबों के अधिकारों के लिए कई सफल जन सत्याग्रह आंदोलनों का नेतृत्व भी किया है। उनके प्रयासों का उद्देश्य हाशिए पर पड़े समुदायों को सशक्त बनाना और उन्हें सामाजिक न्याय दिलाना रहा है। उन्होंने यह सुनिश्चित करने की दिशा में काम किया है कि महिलाओं की आवाज सुनी जाए और वे अपने अधिकारों के लिए खड़े होने में सक्षम हों।

मुरैना रेलवे स्टेशन पर जिल कार-हैरिस और डॉ. राजगोपाल का स्वागत करने वालों में जगदीश सिराधना, जयंत सिंह तोमर, दिलीप जैन, प्रफुल्ल श्रीवास्तव, उदयभान सिंह परिहार, रेनू कमल गुप्ता, कमल गुप्ता, शशांक डंडौतिया, जोनू श्रीवास और योगेश श्रीवास्तव सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे। जिल कार-हैरिस का चंबल प्रवास स्थानीय गांधीवादी आंदोलनों को वैश्विक पटल से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है, जो हिंसा के विरुद्ध मानवता के संरक्षण का एक महत्वपूर्ण और सार्थक संदेश दे रहा है। चंबल की धरती एक बार पुनः अंतरराष्ट्रीय शांति संवाद और अहिंसक आंदोलनों के केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना रही है। यह यात्रा स्थानीय आंदोलनों को अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान करने के साथ-साथ गांधीवादी सिद्धांतों की सार्वभौमिक प्रासंगिकता को भी रेखांकित करती है।

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