जौरा में अहिंसा के पुरोधा डॉ. सुब्बाराव को पांचवीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि
जौरा स्थित महात्मा गांधी सेवा आश्रम में प्रख्यात गांधीवादी डॉ. एस.एन. सुब्बाराव 'भाईजी' की पांचवीं पुण्यतिथि पर सर्वधर्म प्रार्थना और पुष्पांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया...

JOURA DISTRICT-MORENA | संवाददाता: दिनेश सिकरवार
द क्लिफ न्यूज़ | जौरा | 27 अक्टूबर 2026
चंबल अंचल में शांति, सद्भावना और अहिंसा का संदेश फैलाने वाले प्रख्यात गांधीवादी समाजसेवी डॉ. एस.एन. सुब्बाराव, जिन्हें 'भाईजी' के नाम से जाना जाता था, की पांचवीं पुण्यतिथि पर मंगलवार, 27 अक्टूबर को जौरा स्थित महात्मा गांधी सेवा आश्रम में एक गरिमामय श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर हवन-पूजन, उनकी समाधि पर पुष्पांजलि और सर्वधर्म प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया, जिसमें जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों और बड़ी संख्या में नागरिकों ने भाग लिया। उपस्थित लोगों ने भाईजी के विचारों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम के दौरान, महात्मा गांधी सेवा आश्रम के अध्यक्ष डॉ. राजगोपाल पी.वी. ने अपने संदेश में डॉ. सुब्बाराव को अहिंसा का पुजारी और मानवता का सच्चा सेवक बताया। उन्होंने कहा कि भाईजी ने चंबल अंचल में शांति की राह प्रशस्त करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। डॉ. राजगोपाल ने इस बात पर जोर दिया कि भाईजी को सच्ची श्रद्धांजलि तभी सार्थक होगी जब उनके अधूरे कार्यों और शांति के संकल्प को आगे बढ़ाया जाए। उन्होंने नफरत और युद्ध के मौजूदा दौर में संवाद और विश्वबंधुत्व को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
जौरा विधायक पंकज उपाध्याय ने डॉ. सुब्बाराव के जीवन को समाज के लिए एक प्रेरणास्रोत बताया। उन्होंने कहा कि भाईजी ने चंबल की धरती पर यह सिद्ध किया कि स्थायी शांति विश्वास और मानवीय संवेदनाओं के माध्यम से ही स्थापित की जा सकती है। पूर्व विधायक महेश दत्त मिश्रा ने भी भाईजी के विचारों की समाज को जोड़ने की अद्भुत शक्ति को रेखांकित किया और नई पीढ़ी से उनकी विचारधारा को अपनाने का आह्वान किया।
भाईजी के आदर्शों को स्मरण
आश्रम के सचिव दिलीप जैन ने अपने संबोधन में कहा कि भाईजी का संदेश किसी विशेष वर्ग तक सीमित नहीं था, बल्कि वे सर्वधर्म सम्मान और सामाजिक एकता में गहरा विश्वास रखते थे। एकता परिषद के प्रदेश संयोजक डोंगर शर्मा ने भाईजी द्वारा किए गए अहिंसक संघर्षों को याद किया और शोषित समुदायों के अधिकारों के लिए एकजुट प्रयास जारी रखने की आवश्यकता पर बल दिया। आश्रम के संयुक्त सचिव प्रफुल्ल श्रीवास्तव ने भाईजी को मानवता की एक अमर मिसाल बताते हुए कहा कि उनके आदर्शों का व्यवहार में पालन ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
डॉ. सुब्बाराव के जीवन की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक 14 अप्रैल 1972 को पगारा मैदान में 654 बागियों का हथियार डालकर किया गया आत्मसमर्पण था। यह घटना विश्वास और संवाद की शक्ति का एक ऐतिहासिक प्रतीक बनी, जिसने चंबल के बीहड़ों में शांति की नई सुबह का मार्ग प्रशस्त किया।
युवा पीढ़ी से आह्वान और सांस्कृतिक प्रस्तुति
कार्यक्रम में भाईजी बाल मंदिर स्कूल के विद्यार्थियों ने 'वैष्णव जन तो' और 'रघुपति राघव राजा राम' जैसे प्रिय भजनों की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। इन प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों को भाईजी की स्मृतियों में सराबोर कर दिया। विद्यालय के संचालक जिम्मी जार्ज और उनके स्टाफ के आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान रहा। कार्यक्रम के दौरान, यह विचार प्रमुखता से उभरा कि युवा पीढ़ी को राष्ट्र निर्माण और सामाजिक समरसता के कार्यों में सक्रिय रूप से भाग लेना चाहिए।
कार्यक्रम का समापन सर्वधर्म प्रार्थना के साथ हुआ। इस अवसर पर उदयभान सिंह परिहार, आत्मसमर्पित बागी बहादुर सिंह, डॉ. जगदीश शुक्ला और हाजी साकिर हमीद सहित अनेक गणमान्य नागरिक और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में प्रफुल्ल श्रीवास्तव ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस श्रद्धांजलि सभा ने एक बार फिर डॉ. सुब्बाराव के अहिंसक मार्ग और मानवीय मूल्यों के प्रति समाज की प्रतिबद्धता को पुष्ट किया।
