रबी सीजन 2026-27: कम पानी वाली फसलें और नई तकनीकें होंगी प्राथमिकता
कृषि उत्पादन आयुक्त ने रबी सीजन 2026-27 की तैयारियों की समीक्षा की। किसानों को कम पानी में अधिक उपज देने वाली फसलों और जल संरक्षण...

गुना | संवाददाता: राजा हतम वेग
द क्लिफ न्यूज़ | गुना | 26 अक्टूबर 2026
कृषि उत्पादन आयुक्त के.सी. गुप्ता ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से गुना सहित ग्वालियर एवं चंबल संभाग के जिलों में रबी सीजन 2026-27 की तैयारियों की गहन समीक्षा की। इस समीक्षा बैठक में मुख्य रूप से उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने और विभिन्न कृषि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर बल दिया गया। आयुक्त गुप्ता ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे किसानों को ऐसी फसलों को अपनाने के लिए प्रेरित करें जो कम पानी में भी अधिक उपज दे सकें। इसके अतिरिक्त, उन्हें उन्नत कृषि तकनीकों के प्रयोग के प्रति भी जागरूक किया जाए।
बैठक में फसल विविधीकरण, ड्रिप एवं स्प्रिंकलर जैसी सिंचाई पद्धतियों को अपनाने और नमी संरक्षण की तकनीकों के महत्व पर जोर दिया गया। यह कदम जल संसाधनों के कुशल उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य बताए गए।
उर्वरक उपलब्धता और कालाबाजारी पर नियंत्रण
रबी सीजन के लिए उर्वरकों की वितरण व्यवस्था को लेकर बैठक में विशेष चर्चा हुई। अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए कि किसानों को उनकी आवश्यकतानुसार डीएपी, यूरिया और एनपीके जैसे महत्वपूर्ण उर्वरक समय पर उपलब्ध कराए जाएं। यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया कि निजी विक्रेताओं और सहकारी संस्थाओं के स्टॉक का भौतिक सत्यापन किया जाए। किसी भी प्रकार की कालाबाजारी या अधिक मूल्य पर उर्वरक बेचने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं।
उद्यानिकी और गुलाब की खेती की सराहना
गुना जिले में कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल के नेतृत्व में संचालित उद्यानिकी गतिविधियों और विशेष रूप से गुलाब की खेती की प्रगति पर आयुक्त ने संतोष व्यक्त किया। जिले में उद्यानिकी क्षेत्र में हो रहे कार्यों को संतोषजनक बताया गया और किसानों को मुख्य कृषि के साथ-साथ आय बढ़ाने वाली अन्य गतिविधियों में भी संलग्न होने के लिए प्रोत्साहित करने पर जोर दिया गया।
पशुपालन और मत्स्य पालन को प्रोत्साहन
बैठक में अधिकारियों को पशुपालन, डेयरी विकास और मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों को किसानों की आय के प्रमुख माध्यम के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए गए। पशुपालकों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने और दुग्ध संग्रहण समितियों को अधिक सक्रिय बनाने पर बल दिया गया। यह भी निर्देशित किया गया कि ई-मंडी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी एवं प्रभावी बनाया जाए, ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित और लाभकारी मूल्य मिल सके। कृषि उत्पादन बढ़ाने तथा संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विशेष जोर दिया गया है।
