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नरसिंहगढ़ में शरद पूर्णिमा की भव्यता: मंदिरों में उमड़ा जनसैलाब, सजीं आकर्षक झांकियां

नरसिंहगढ़ में शरद पूर्णिमा का पर्व धूमधाम से मनाया गया। जल मंदिर और मंदिर श्री जमात में विशेष झांकियां सजीं, जबकि राधा-कृष्ण मंदिर में 200...

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•संवाददाता: महेंद्र शर्मा
नरसिंहगढ़ में शरद पूर्णिमा की भव्यता: मंदिरों में उमड़ा जनसैलाब, सजीं आकर्षक झांकियां

नरसिंहगढ़ | संवाददाता: महेंद्र शर्मा

द क्लिफ न्यूज़ | नरसिंहगढ़ | 26 अक्टूबर 2026

नरसिंहगढ़ में रविवार रात को शरद पूर्णिमा का पर्व अत्यंत श्रद्धा और भव्यता के साथ मनाया गया। इस अवसर पर नगर के प्रमुख मंदिरों को रंग-बिरंगी विद्युत सज्जा से जगमग किया गया, जिससे संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक हो गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मंदिरों में पहुंचकर भगवान के दर्शन किए और देर रात तक चले इस उत्सव का आनंद लिया।

जल मंदिर स्थित पशुपतिनाथ मंदिर में विशेष विद्युत सज्जा की गई थी और भगवान का मनमोहक श्रृंगार श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना रहा। वहीं, मंदिर श्री जमात में महंत दीपेंद्र दास जी खाकी के निर्देशन में भगवान कार्तिकेय और गणेश की कथाओं पर आधारित चलित झांकियां प्रदर्शित की गईं। इन झांकियों के माध्यम से सनातन संस्कृति और धार्मिक प्रसंगों को जीवंत रूप दिया गया। इसके अतिरिक्त, परिसर में गुरुदेव 1008 नंदराम दास जी के जीवन पर आधारित एक लघु फिल्म भी दिखाई गई, जिसे बड़ी संख्या में लोगों ने देखा।

200 साल पुरानी परंपरा का निर्वहन

बड़ा बाजार स्थित राधा-कृष्ण मंदिर में लगभग 200 वर्षों से चली आ रही परंपरा का निर्वहन करते हुए उत्सव संपन्न हुआ। इस अवसर पर भगवान को विशेष रूप से सुंदर वस्त्रों और चांदी के मुकुट से अलंकृत किया गया। स्थानीय श्रद्धालुओं ने बताया कि उनके परिवार की कई पीढ़ियां इस उत्सव में भाग लेती आ रही हैं। मंदिर श्री जमात में शरद पूर्णिमा से संबंधित आयोजनों की तैयारियां करीब 20 दिन पहले ही शुरू हो जाती हैं, जिसमें स्थानीय सेवाभावी लोग बढ़-चढ़कर अपना योगदान देते हैं।

सुरक्षा और व्यवस्था

शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर मंदिरों में देर रात तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। इस दौरान सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी सक्रिय रहे। चंद्रमा की सोलह कलाओं से युक्त इस पवित्र रात में भक्तों ने विशेष पूजा-अर्चना कर पुण्य लाभ अर्जित किया। नगर की यह सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत, जो आस्था का केंद्र है, इस वर्ष भी भक्ति और परंपरा के सुंदर संगम के रूप में जीवंत रही।

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