वन केवल भौतिक संपत्ति नहीं, मानसिक शांति के लिए भी आवश्यक: वन अधिकारी
ग्वालियर में एनएसएस शिविर में वन मंडल अधिकारी अवधेश कुमार मीना ने कहा कि वनों का संरक्षण राजस्व तक सीमित नहीं, यह मानसिक संतुलन के...

Gwalior | संवाददाता: संजय पांडेय
द क्लिफ न्यूज़ | ग्वालियर | 29 सितंबर 2026
ग्वालियर के जीवाजी विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के नेतृत्व एवं प्रशिक्षण शिविर के दौरान वन मंडल अधिकारी अवधेश कुमार मीना ने वनों को केवल भौतिक संपदा के बजाय एक अमूल्य मनोवैज्ञानिक संपदा के रूप में संरक्षित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वन मानवीय अवचेतन को शांत कर सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करते हैं, जो आज के तनावपूर्ण दौर में अत्यंत महत्वपूर्ण है।
विश्वविद्यालय स्तरीय एनएसएस शिविर के तीसरे दिन आयोजित बौद्धिक सत्र में प्रकृति और मानवीय चेतना के बीच गहरे संबंधों पर गहन चर्चा की गई। कार्यक्रम समन्वयक डॉ. हरिशंकर सिंह कंसाना के निर्देशन में संचालित इस सत्र का संचालन डॉ. हिन्दू सिंह धाकड़ ने किया। मुख्य वक्ता के तौर पर वन मंडल अधिकारी मीना ने कहा कि वनों को केवल राजस्व या काष्ठ तक सीमित मानना अनुचित है।
युवाओं में राष्ट्र निर्माण और नेतृत्व के संस्कार
जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. राजीव मिश्रा ने एनएसएस को युवाओं में अनुशासन और राष्ट्रसेवा के संस्कार विकसित करने वाली महत्वपूर्ण कार्यशाला बताया। उन्होंने शिविर में उपस्थित छात्रों को प्रशासनिक दक्षता के महत्व से भी अवगत कराया। इस अवसर पर डॉ. रविकांत द्विवेदी ने भारतीय दर्शन के पंचकोश सिद्धांत की व्याख्या करते हुए व्यक्तित्व विकास और आत्म-परिष्कार के सूत्र साझा किए, जो युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिए आवश्यक हैं।
डिजिटल युग में विवेकपूर्ण तकनीक उपयोग पर बल
डिजिटल युग की चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए डॉ. वासुदेव सिंह जादौन ने युवाओं को आगाह किया कि वे सोशल मीडिया के केवल उपभोक्ता बनकर न रह जाएं। उन्होंने तकनीक का विवेकपूर्ण उपयोग कर उसे राष्ट्र निर्माण का एक सशक्त माध्यम बनाने पर विशेष जोर दिया। कार्यक्रम के अंत में प्रो. हीरालाल पटेल, डॉ. विनोद कुशवाह और डॉ. नरेंद्र कुमार वर्मा ने अतिथियों का सम्मान किया। डॉ. विनोद कुशवाह ने सभी का आभार व्यक्त किया। अनुशासन और पर्यावरण चेतना के संदेश के साथ यह महत्वपूर्ण दिन संपन्न हुआ।
