उंगली के सिरे की चोट: मैलेट फ्रैक्चर और उसकी गंभीरता
मैलेट फ्रैक्चर, उंगली की सबसे आगे वाली हड्डी का फ्रैक्चर, DIP जोड़ को सीधा करने में असमर्थता का कारण बनता है। शुरुआती निदान और उपचार महत्वपूर्ण है।

द क्लिफ न्यूज़ | 21 सितंबर 2026
हाथ की उंगलियों में लगने वाली चोटों में मैलेट फ्रैक्चर एक सामान्य किंतु गंभीर स्थिति है, जिसमें उंगली के सबसे आगे वाले हिस्से की हड्डी (डिस्टल फैलेन्क्स) का एक टुकड़ा टूट जाता है। यह चोट विशेष रूप से उंगली के सिरे को सीधा करने वाले टेंडन (टर्मिनल एक्सटेंसर टेंडन) के जुड़ाव स्थल को प्रभावित करती है, जिसके परिणामस्वरूप व्यक्ति अपनी उंगली के अंतिम जोड़ (डिस्टल इंटरफैलेन्जियल या DIP) को स्वयं सीधा करने में असमर्थ हो जाता है। इस चोट के कारण उंगली का सिरा लगातार नीचे की ओर झुका हुआ प्रतीत होता है, जिसके चलते इसे 'मैलेट फिंगर' भी कहा जाता है।
यह चोट अक्सर तब होती है जब DIP जोड़ पूरी तरह सीधा होता है और उस पर अचानक विपरीत दिशा से तीव्र बल लगता है, जिससे जोड़ जबरन मुड़ जाता है। खेल के दौरान उंगली के सिरे पर तेज गेंद का लगना इसका एक आम उदाहरण है। इसके अतिरिक्त, गिरने, सामान्य घरेलू दुर्घटनाओं या दैनिक कामकाज के दौरान लगी चोटें भी मैलेट फ्रैक्चर का कारण बन सकती हैं।
मैलेट फ्रैक्चर के लक्षण और निदान
मैलेट फ्रैक्चर होने पर DIP जोड़ के आसपास तेज दर्द, सूजन और छूने पर कोमलता का अनुभव हो सकता है। इस चोट का सबसे स्पष्ट संकेत उंगली के अंतिम सिरे का नीचे की ओर झुकाव है। पीड़ित व्यक्ति DIP जोड़ को सक्रिय रूप से सीधा नहीं कर पाता है। हालांकि, शुरुआती अवस्था में, दूसरे हाथ की मदद से इस जोड़ को निष्क्रिय रूप से सीधा किया जा सकता है। कभी-कभी, दर्द या सूजन कम होने की वजह से लोग इसे एक मामूली चोट समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन उंगली के सिरे का लगातार झुका रहना हड्डी या टेंडन की गंभीर चोट का सूचक हो सकता है।
चोट की गंभीरता और प्रकार का सटीक आकलन करने के लिए एक्स-रे जांच अत्यंत महत्वपूर्ण है। आमतौर पर, डॉक्टर एपी (एंटीरियर-पोस्टीरियर), पार्श्व (लेटरल) और तिरछी (ऑब्लिक) एक्स-रे तस्वीरें लेते हैं। इन तस्वीरों के माध्यम से हड्डी के टूटे हुए टुकड़े के आकार, जोड़ की सतह पर हुए प्रभाव की सीमा, हड्डी में विस्थापन की मात्रा और DIP जोड़ में किसी प्रकार के सबलक्सेशन (आंशिक अव्यवस्था) या डिसलोकेशन (पूर्ण अव्यवस्था) की उपस्थिति का पता लगाया जाता है। इन निष्कर्षों के आधार पर ही उपचार की आगे की दिशा निर्धारित की जाती है।
उपचार के तरीके: गैर-सर्जिकल और सर्जिकल
यदि फ्रैक्चर छोटा और स्थिर है, और DIP जोड़ में कोई सबलक्सेशन नहीं है, तो अधिकांश मामलों में बिना सर्जरी के भी सफल उपचार संभव है। ऐसे में, स्प्लिंट (गट्ठर) का उपयोग करके DIP जोड़ को लगातार सीधी स्थिति में स्थिर रखा जाता है। यह स्प्लिंटिंग अवधि सामान्यतः लगभग 6 से 8 सप्ताह तक चलती है। इस अवधि के बाद, मरीज की स्थिति में सुधार के आधार पर, चिकित्सक रात के समय कुछ समय के लिए स्प्लिंट लगाने की सलाह दे सकते हैं। उपचार के प्रारंभिक चरणों में DIP जोड़ को लगातार सीधा रखना सबसे महत्वपूर्ण है। यदि स्प्लिंट को हटाते या बदलते समय जोड़ पुनः मुड़ जाता है, तो उपचार प्रक्रिया बाधित हो सकती है और चिकित्सक को स्प्लिंटिंग की अवधि बढ़ानी पड़ सकती है।
हालांकि, यदि हड्डी का टूटा हुआ टुकड़ा बड़ा हो, फ्रैक्चर में महत्वपूर्ण विस्थापन हो, या DIP जोड़ अस्थिर होकर सबलक्स हो गया हो, तो ऐसी जटिल स्थितियों में किसी अनुभवी हाथ विशेषज्ञ या ऑर्थोपेडिक सर्जन से मूल्यांकन कराना आवश्यक हो जाता है। यदि जोड़ को उसकी सही स्थिति में बनाए रखना संभव न हो या वह लगातार अस्थिर बना रहे, तो सर्जिकल फिक्सेशन (ऑपरेशन द्वारा जोड़ को स्थिर करना) पर विचार किया जा सकता है।
मैलेट फिंगर बनाम मैलेट फ्रैक्चर
मैलेट फिंगर और मैलेट फ्रैक्चर के बीच अंतर को समझना भी आवश्यक है। 'मैलेट फिंगर' शब्द का प्रयोग तब किया जाता है जब केवल टर्मिनल एक्सटेंसर टेंडन क्षतिग्रस्त होता है और एक्स-रे में हड्डी का कोई टूटा हुआ टुकड़ा दिखाई नहीं देता। इसके विपरीत, 'मैलेट फ्रैक्चर' में डिस्टल फैलेन्क्स के पृष्ठीय आधार से हड्डी का एक या अधिक टुकड़े टूट जाते हैं।
दीर्घकालिक प्रभाव और निवारण
मैलेट फ्रैक्चर का समुचित और समय पर उपचार न मिलने की स्थिति में कई जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं। इनमें लगातार एक्सटेंसर लैग (जोड़ को सीधा करने में असमर्थता), DIP जोड़ का अकड़ जाना, और स्वान-नेक विकृति (उंगली के जोड़ का असामान्य रूप से ऊपर की ओर मुड़ना) जैसी समस्याएं शामिल हैं। गंभीर जोड़-संबंधी चोटों के मामलों में, भविष्य में आघातजन्य (ट्रॉमेटिक) DIP गठिया होने का खतरा भी बढ़ जाता है।
इसलिए, यह महत्वपूर्ण है कि उंगली के सिरे पर चोट लगने के उपरांत, यदि DIP जोड़ को सीधा करने में कठिनाई हो या उंगली का अंतिम हिस्सा लगातार झुका हुआ दिखे, तो इसे सामान्य चोट समझकर नजरअंदाज न करें। समय पर एक्स-रे करवाना और किसी विशेषज्ञ चिकित्सक से सलाह लेकर उचित उपचार शुरू करना, उंगली की कार्यक्षमता को बनाए रखने और जोड़ की दीर्घकालिक स्थिति को बेहतर बनाने में अत्यंत सहायक सिद्ध हो सकता है।
