बच्चों में रिकेट्स का बढ़ता खतरा: जीवनशैली और पोषण पर चिंता
बढ़ता स्क्रीन टाइम, फास्ट फूड का सेवन और धूप का अभाव बच्चों में रिकेट्स (सूखा रोग) के बढ़ते खतरे का कारण बन रहे हैं, जो उनकी हड्डियों के विकास को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।

द क्लिफ न्यूज़ | 3 नवंबर 2026
आज के तेजी से बदलते परिवेश में बच्चों की जीवनशैली में आए आमूल-चूल परिवर्तन एक गंभीर स्वास्थ्य चिंता का विषय बन गए हैं। पढ़ाई के बढ़ते दबाव, लंबे स्कूल घंटों, कोचिंग कक्षाओं, और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स जैसे मोबाइल फोन, टेलीविजन तथा ऑनलाइन गेमिंग में अत्यधिक समय व्यतीत करने के कारण बच्चे अब घर की चारदीवारी में अधिक कैद रहने लगे हैं। इसके समानांतर, फास्ट फूड, पैकेटबंद खाद्य पदार्थों और मीठे पेय पदार्थों के बढ़ते चलन ने उनके पोषण स्तर को बुरी तरह प्रभावित किया है। इन परिस्थितियों में, बच्चों की हड्डियों के स्वस्थ विकास के लिए आवश्यक विटामिन-डी और कैल्शियम की कमी एक विकराल चुनौती के रूप में उभर रही है, जिसके परिणामस्वरूप पोषण संबंधी रिकेट्स (सूखा रोग) जैसी बीमारियां बढ़ रही हैं।
रिकेट्स एक ऐसी स्थिति है जिसमें बच्चों की बढ़ती हड्डियों में कैल्शियम और फास्फोरस जैसे महत्वपूर्ण खनिजों का उचित जमाव नहीं हो पाता। विटामिन-डी इस प्रक्रिया में आंतों से इन खनिजों के अवशोषण को सुगम बनाने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विटामिन-डी की गंभीर कमी या भोजन में कैल्शियम की अपर्याप्त मात्रा हड्डियों को कमजोर, लचीला और विकृत बना सकती है। यह समझना महत्वपूर्ण है कि रिकेट्स केवल फास्ट फूड के सेवन से नहीं होता, बल्कि असंतुलित आहार, सूर्य के प्रकाश के संपर्क में कमी, और कुछ विशिष्ट चिकित्सीय स्थितियों के कारण भी यह बीमारी उत्पन्न हो सकती है।
स्क्रीन टाइम का प्रभाव और धूप का अभाव
आधुनिक जीवनशैली का एक प्रमुख पहलू यह है कि आजकल अधिकांश बच्चे बाहर खेलने या शारीरिक गतिविधियों में भाग लेने के बजाय अपना अधिकांश समय मोबाइल फोन और कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बिता रहे हैं। इसके कारण प्राकृतिक सूर्य के प्रकाश के संपर्क में उनकी कमी हो जाती है, जो विटामिन-डी का एक प्राकृतिक स्रोत है। रोचक बात यह है कि मोटापे से ग्रस्त बच्चों में भी विटामिन-डी की कमी एक सामान्य समस्या देखी जा रही है। यह भी ध्यान देने योग्य है कि सूर्य से प्राप्त होने वाले विटामिन-डी की मात्रा त्वचा के रंग, मौसम की स्थिति, पहने गए कपड़ों, भौगोलिक स्थान और अन्य कई कारकों पर निर्भर करती है। इसलिए, केवल धूप में बैठना पर्याप्त मात्रा में विटामिन-डी मिलने की गारंटी नहीं देता है।
रिकेट्स के प्रमुख लक्षण और पहचान
रिकेट्स से प्रभावित बच्चों में शारीरिक विकास में धीमापन, चलने में देरी, हड्डियों में दर्द, मांसपेशियों में कमजोरी, तथा कलाई और टखनों के आसपास हड्डियों का चौड़ा होना जैसे लक्षण स्पष्ट दिखाई दे सकते हैं। गंभीर मामलों में, पैरों का बाहर की ओर मुड़ना (बो लेग्स) या घुटनों का आपस में टकराना (नॉक नी) जैसी विकृतियां उत्पन्न हो सकती हैं। इसके अतिरिक्त, माथे का आगे की ओर उभरना और हड्डियों की अन्य विकृतियां भी देखी जा सकती हैं। अत्यधिक कैल्शियम की कमी की स्थिति में, बच्चों को दौरे पड़ने जैसी गंभीर आपातकालीन स्थिति का भी सामना करना पड़ सकता है, जिसके लिए तत्काल चिकित्सकीय हस्तक्षेप की आवश्यकता होती है।
ऑर्थोपेडिक दृष्टिकोण से यह महत्वपूर्ण है कि पैरों का टेढ़ापन हमेशा रिकेट्स का संकेत नहीं होता; कुछ आयु वर्गों में यह बच्चों के सामान्य शारीरिक विकास का एक हिस्सा भी हो सकता है। बीमारी की सटीक पुष्टि के लिए, चिकित्सक द्वारा शारीरिक परीक्षण के साथ-साथ रक्त जांच (विटामिन-डी, कैल्शियम, फास्फोरस, अल्कलाइन फॉस्फेटेज और पैराथायरॉइड हार्मोन के स्तर की जांच) की जाती है। आवश्यकता पड़ने पर, कलाई या घुटने का एक्स-रे कराया जाता है, जिसमें हड्डियों के बढ़ने वाले सिरों का चौड़ा होना, कटोरीनुमा आकार और अनियमित किनारे देखे जा सकते हैं।
रोकथाम और उपचार के उपाय
रिकेट्स से बचाव के लिए, बच्चों के आहार में पौष्टिक तत्वों को प्राथमिकता देना अत्यंत आवश्यक है। उनके भोजन में दूध, दही, पनीर, रागी, विभिन्न प्रकार की दालें, अंडे और अन्य पोषक खाद्य पदार्थों को शामिल किया जाना चाहिए। विटामिन-डी और कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थों का पर्याप्त सेवन सुनिश्चित करना चाहिए। बच्चों को नियमित रूप से बाहरी खेलकूद, साइकिल चलाने और अन्य सुरक्षित शारीरिक गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करना आज की एक बड़ी आवश्यकता है। स्कूलों में भी शारीरिक शिक्षा और संतुलित पोषण को बढ़ावा दिया जाना चाहिए ताकि बच्चों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित किया जा सके।
विटामिन-डी की दैनिक आवश्यकताएं बच्चे की आयु और उसके जोखिम कारकों के अनुसार भिन्न होती हैं। सामान्यतः शिशुओं के लिए प्रतिदिन 400 अंतर्राष्ट्रीय यूनिट (IU) विटामिन-डी की सलाह दी जाती है, जबकि बड़े बच्चों के लिए यह मात्रा भिन्न हो सकती है। यदि रिकेट्स की पुष्टि हो जाती है, तो उपचार के लिए निर्धारित खुराकें भिन्न होती हैं। बिना चिकित्सकीय परामर्श के 60,000 IU जैसी उच्च खुराक का बार-बार सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।
रिकेट्स का उपचार बीमारी के मूल कारण और उसकी गंभीरता पर निर्भर करता है। इसमें विटामिन-डी और कैल्शियम सप्लीमेंट्स के साथ-साथ नियमित चिकित्सकीय निगरानी शामिल है। सक्रिय बीमारी के नियंत्रण के बाद भी यदि पैरों का गंभीर टेढ़ापन बना रहता है, तो गाइडेड ग्रोथ सर्जरी या करेक्टिव ऑस्टियोटॉमी जैसी सर्जिकल प्रक्रियाओं पर विचार किया जा सकता है।
अभिभावकों को यह समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है कि बच्चों का स्वस्थ और उज्ज्वल भविष्य केवल उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों पर निर्भर नहीं करता, बल्कि एक मजबूत और स्वस्थ शरीर भी इसका अभिन्न अंग है। मजबूत हड्डियां एक स्वस्थ बचपन की नींव होती हैं। आज, बच्चों को मोबाइल की आभासी दुनिया से निकालकर वापस खेल के मैदान तक लाना एक निर्णायक आवश्यकता बन गई है, जो उनके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए अनिवार्य है।
