एक पैर में फ्रैक्चर, दूसरे में कम्पार्टमेंट सिंड्रोम का खतरा: तत्काल सर्जरी की आवश्यकता
ऊंचाई से गिरने पर एक पैर में फ्रैक्चर के बाद दूसरे पैर में अचानक तेज दर्द और सूजन कम्पार्टमेंट सिंड्रोम का संकेत हो सकता है, जो एक सर्जिकल इमरजेंसी है।

द क्लिफ न्यूज़ | 30 अक्टूबर 2026
एक गंभीर दुर्घटना में, यदि किसी व्यक्ति को एक पैर में फ्रैक्चर होता है, तो यह संभव है कि दूसरे पैर में भी जानलेवा चोट लग जाए, जिसकी तत्काल पहचान और उपचार की आवश्यकता हो। इस स्थिति का एक प्रमुख उदाहरण एक्यूट कम्पार्टमेंट सिंड्रोम है, जो एक पैर में लगी चोट के बावजूद दूसरे पैर में विकसित हो सकता है। यह एक ऐसी सर्जिकल आपात स्थिति है जिसमें शरीर के भीतर मांसपेशियों के चारों ओर एक सख्त आवरण में दबाव बहुत बढ़ जाता है। इस बढ़े हुए दबाव के कारण रक्त प्रवाह बाधित होता है, जिससे नसों और मांसपेशियों को स्थायी नुकसान हो सकता है।
चिकित्सकीय जानकारी के अनुसार, दाहिने फीमर (जांघ की हड्डी) के गर्दन और शाफ्ट में फ्रैक्चर होने के बाद, यदि बाईं पिंडली (The Calf) में अचानक अत्यधिक दर्द और कठोर सूजन विकसित होती है, तो एक्यूट कम्पार्टमेंट सिंड्रोम की आशंका पर तुरंत ध्यान देना चाहिए। हालांकि, यह समझना महत्वपूर्ण है कि एक पैर में फ्रैक्चर सीधे तौर पर दूसरे पैर में कम्पार्टमेंट सिंड्रोम का कारण नहीं बनता है। यह चोट लगने के तरीके, जैसे कि गिरते समय दूसरे पैर पर अतिरिक्त वजन पड़ना, सीधा प्रहार, किसी चीज के नीचे फंसना, या आंतरिक रक्तस्राव के कारण हो सकता है। इसके अतिरिक्त, दुर्घटना के बाद लंबे समय तक एक ही स्थिति में पड़े रहने, ऑपरेशन के दौरान अतिरिक्त दबाव, या पहले बाधित रक्त प्रवाह के अचानक फिर से शुरू होने से भी प्रभावित मांसपेशियों में सूजन बढ़ सकती है। चिंताजनक बात यह है कि एक्स-रे में फ्रैक्चर का पता न चलने पर भी गंभीर मांसपेशीय चोट संभव है।
पिंडली के कम्पार्टमेंट और उनके कार्य
मानव पिंडली में मुख्य रूप से चार कम्पार्टमेंट होते हैं, जिनमें मांसपेशियां, नसें और रक्त वाहिकाएं स्थित होती हैं। प्रत्येक कम्पार्टमेंट का अपना विशिष्ट कार्य होता है और यह अलग-अलग तंत्रिकाओं द्वारा नियंत्रित होता है। एंटीरियर कम्पार्टमेंट में टिबियालिस एंटीरियर मांसपेशी और डीप पेरोनियल नर्व होती है, जो पैर की उंगलियों को ऊपर उठाने का कार्य करती है। लेटरल कम्पार्टमेंट में पेरोनियल मांसपेशियां और सुपरफिशियल पेरोनियल नर्व होती है। पीछे की ओर, सुपरफिशियल पोस्टीरियर कम्पार्टमेंट में गैस्ट्रोक्नीमियस और सोलियस मांसपेशियां होती हैं, जबकि डीप पोस्टीरियर कम्पार्टमेंट में टिबियालिस पोस्टीरियर मांसपेशी और उंगलियों को मोड़ने वाली गहरी मांसपेशियां होती हैं। यदि सूजन जांघ के क्षेत्र में भी मौजूद है, तो वहां के अलग कम्पार्टमेंट का मूल्यांकन भी आवश्यक है।
खतरे के स्पष्ट संकेत
कम्पार्टमेंट सिंड्रोम का सबसे प्रमुख और चिंताजनक लक्षण चोट की गंभीरता की तुलना में बहुत अधिक और लगातार बना रहने वाला दर्द है। यदि निष्क्रिय रूप से पैर की उंगलियों या टखने को हिलाने पर भी दर्द बढ़ता है, पिंडली असामान्य रूप से तनी हुई और कठोर महसूस होती है, या दर्द निवारक दवाओं के बावजूद आराम नहीं मिलता है, तो यह एक गंभीर चेतावनी संकेत है। इसके अलावा, झुनझुनी, सुन्नपन और मांसपेशियों में कमजोरी भी इस स्थिति के लक्षण हो सकते हैं। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि पैर में नाड़ी का महसूस होना कम्पार्टमेंट सिंड्रोम की संभावना को पूरी तरह से खारिज नहीं करता है, क्योंकि नाड़ी का गायब होना अक्सर स्थिति के देर से प्रकट होने वाला संकेत होता है।
अन्य संभावित कारण और निदान
दूसरे पैर में सूजन के पीछे डीप वेन थ्रॉम्बोसिस (DVT), मांसपेशियों में गंभीर रक्तस्राव, रक्त वाहिकाओं को नुकसान, नस पर दबाव या रैब्डोमायोलाइसिस जैसे अन्य कारण भी हो सकते हैं। इसलिए, बार-बार चिकित्सकीय परीक्षण और लक्षणों में होने वाले बदलावों का सावधानीपूर्वक रिकॉर्ड रखना अत्यंत आवश्यक है। पूर्ण रक्त गणना (CBC), हीमोग्लोबिन स्तर, सीरम क्रिएटिन काइनेज (CK), किडनी फंक्शन टेस्ट और इलेक्ट्रोलाइट्स की जांच से संबंधित जटिलताओं की पहचान में मदद मिल सकती है। यदि रक्त वाहिकाओं को नुकसान का संदेह हो, तो डॉप्लर अल्ट्रासाउंड या सीटी एंजियोग्राफी उपयोगी हो सकती है। हालांकि, केवल वेनस डॉप्लर से कम्पार्टमेंट सिंड्रोम का पता लगाना संभव नहीं है।
तत्काल कार्रवाई और उपचार
यदि मरीज की स्थिति अस्पष्ट है या वह बेहोश है, तो कम्पार्टमेंट प्रेशर की नियमित और लगातार निगरानी अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। डायस्टोलिक रक्तचाप और कम्पार्टमेंट प्रेशर के बीच के अंतर को 'डेल्टा प्रेशर' कहा जाता है। यदि यह अंतर 30 mmHg या उससे कम हो जाता है, तो यह चिंता का विषय हो सकता है। हालांकि, किसी भी निर्णय के लिए केवल इस संख्या पर निर्भर नहीं रहा जा सकता। यदि मरीज को एनेस्थीसिया दिया गया है या नर्व ब्लॉक लगा है, तो दर्द का संकेत दब सकता है। ऐसे मामलों में, नियमित शारीरिक परीक्षण और प्रेशर की निगरानी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
संदिग्ध कम्पार्टमेंट सिंड्रोम के मामले में, एक वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक या ट्रॉमा सर्जन को तुरंत बुलाया जाना चाहिए। चिकित्सकीय निगरानी में, यदि किसी पट्टी या प्लास्टर के कारण दबाव बढ़ रहा है, तो उसे तुरंत ढीला किया जाना चाहिए। प्रभावित पैर को हृदय के स्तर के लगभग समान ऊंचाई पर रखना चाहिए और रक्तचाप को स्थिर बनाए रखना चाहिए। यदि कम्पार्टमेंट सिंड्रोम की पुष्टि हो जाती है या इसके स्पष्ट चिकित्सकीय संकेत मिलते हैं, तो प्रभावित पिंडली के चारों कम्पार्टमेंट को खोलने के लिए 'फासिओटॉमी' नामक एक सर्जरी समय पर की जानी चाहिए। एमआरआई या अन्य जांचों के लिए इंतजार करने में कीमती समय बर्बाद करना खतरनाक हो सकता है, जिससे स्थायी अंग क्षति हो सकती है।
निष्कर्ष यह है कि एक पैर में फ्रैक्चर होने से दूसरे पैर की निगरानी की आवश्यकता समाप्त नहीं हो जाती। समय पर इस गंभीर स्थिति की पहचान और उचित उपचार न केवल अंग को बचा सकता है, बल्कि उसकी कार्यक्षमता को भी संरक्षित कर सकता है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ ऑर्थोपेडिक सर्जन्स (AAOS) और AO Foundation जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के दिशानिर्देश भी इन स्थितियों के प्रबंधन में शीघ्र हस्तक्षेप के महत्व पर जोर देते हैं।
