कंधे के टेंडन में सूजन या आंशिक फटने को हल्के में न लें: जानें लक्षण और बचाव
कंधे के दर्द, हाथ उठाने में परेशानी और रात में तकलीफ को अक्सर सामान्य मान लिया जाता है, पर यह रोटेटर कफ टेंडिनोपैथी या टेंडन का आंशिक फटना हो सकता है।

द क्लिफ न्यूज़ | 27 अक्टूबर 2026
कंधे में होने वाले दर्द, हाथ उठाते समय महसूस होने वाली परेशानी या रात में करवट बदलते समय उठने वाली तकलीफ को अक्सर सामान्य थकान या नींद की मुद्रा में असुविधा समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। हालांकि, कई बार यह लक्षण कंधे के रोटेटर कफ में सूजन (टेंडिनोपैथी) या टेंडन के आंशिक फटने (पार्शियल टियर) की ओर इशारा करते हैं। रोटेटर कफ, जो चार प्रमुख टेंडनों से मिलकर बनता है, कंधे के जोड़ को स्थिर रखने, हाथ को ऊपर उठाने और घुमाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
जब इन टेंडनों पर लगातार दबाव पड़ता है या उम्र बढ़ने के साथ उनमें प्राकृतिक बदलाव आते हैं, तो उनकी संरचना प्रभावित हो सकती है, जिसे टेंडिनोपैथी कहते हैं। इसे केवल सूजन मान लेना हमेशा सही नहीं होता। आंशिक फटने की स्थिति में टेंडन के कुछ रेशे क्षतिग्रस्त होते हैं, पूरा टेंडन नहीं। यह समस्या खेलकूद के दौरान चोट लगने, किसी दुर्घटना, अचानक अत्यधिक भारी वजन उठाने या लंबे समय तक सिर से ऊपर हाथ रखकर काम करने जैसी गतिविधियों से बढ़ सकती है।
आयु वर्ग के अनुसार जोखिम
कंधे के टेंडनों से जुड़ी समस्याएं विभिन्न आयु समूहों में अलग-अलग कारणों से उत्पन्न हो सकती हैं। बीस से उनतालीस वर्ष की आयु के लोगों में, जो अक्सर जिम जाते हैं या विभिन्न प्रकार के खेल खेलते हैं, चोट लगने की आशंका अधिक होती है। वहीं, चालीस से उनसठ वर्ष की उम्र के लोगों में, उम्र के साथ होने वाले प्राकृतिक बदलाव और दोहराव वाले शारीरिक कार्यों के कारण इन समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है। साठ वर्ष की आयु पार करने के बाद, आंशिक या पूर्ण रूप से टेंडन फटने की संभावना काफी बढ़ जाती है। यह ध्यान देने योग्य है कि टेंडन के फटने के बावजूद हर मामले में दर्द हो या तत्काल ऑपरेशन की आवश्यकता पड़े, यह जरूरी नहीं है।
अन्य स्वास्थ्य स्थितियां और जीवनशैली का प्रभाव
कई अन्य स्वास्थ्य स्थितियां भी कंधे के टेंडनों की समस्याओं को बढ़ा सकती हैं। डायबिटीज, मोटापा, कोलेस्ट्रॉल का बढ़ा हुआ स्तर और कुछ प्रकार के थायरॉइड विकार टेंडन के स्वास्थ्य को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करते पाए गए हैं। धूम्रपान, जो शारीरिक ऊतकों के समग्र स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, चोट लगने के बाद ठीक होने की प्रक्रिया को भी धीमा कर सकता है। इसके अतिरिक्त, हड्डियों की गुणवत्ता, विशेषकर यदि सर्जरी की आवश्यकता पड़े, तो यह एक महत्वपूर्ण कारक बन जाती है। हालांकि, यह समझना महत्वपूर्ण है कि ये सभी कारक मिलकर भी हर किसी में टेंडन फटने का कारण नहीं बनते।
शरीर के ऊतकों की मरम्मत और मजबूती में पोषण की भी अहम भूमिका होती है। दालें, दूध, पनीर और अंडे जैसे प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ ऊतकों के पुनर्निर्माण में सहायक होते हैं। विटामिन सी कोलेजन के निर्माण में मदद करता है, जो टेंडनों की संरचना के लिए आवश्यक है। विटामिन डी हड्डियों और मांसपेशियों को स्वस्थ रखने के लिए महत्वपूर्ण है, जबकि कैल्शियम और आयरन की आवश्यकता व्यक्ति की शारीरिक स्थिति के अनुसार भिन्न हो सकती है। बिना डॉक्टरी सलाह के सप्लीमेंट्स का सेवन उचित नहीं है, और केवल विटामिन लेने से फटे हुए टेंडन अपने आप नहीं जुड़ते।
पहचानें दर्द के सामान्य लक्षण
कंधे के टेंडनों की समस्या के सामान्य लक्षणों में सबसे प्रमुख है हाथ को ऊपर उठाते समय दर्द का अनुभव होना। प्रभावित कंधे के बल सोने में कठिनाई, कपड़े पहनने या बाल संवारने जैसे रोजमर्रा के काम करने में परेशानी और हाथ में कमजोरी महसूस होना भी इसके आम लक्षण हैं। कुछ मामलों में, कंधे को घुमाते समय एक कटक या चरमराहट की आवाज भी सुनाई दे सकती है। हालांकि, यह भी महत्वपूर्ण है कि गर्दन से संबंधित समस्याएं या जोड़ की जकड़न भी इसी तरह के दर्द का कारण बन सकती है, इसलिए सही निदान आवश्यक है।
निदान और उपचार की प्रक्रिया
चिकित्सक रोगी के लक्षणों, चोट के इतिहास और प्रभावित कंधे की गतिशीलता तथा मांसपेशियों की ताकत की गहन जांच करते हैं। गंभीर या जटिल मामलों में, स्थिति की स्पष्ट तस्वीर प्राप्त करने के लिए अल्ट्रासाउंड या एमआरआई जैसी इमेजिंग तकनीकों का सहारा लिया जा सकता है। हालांकि, हर मरीज को तुरंत इन जांचों की आवश्यकता नहीं होती। उपचार का तरीका फटने की गंभीरता, दर्द के स्तर, रोगी की उम्र और उसके दैनिक कामकाज पर पड़ने वाले प्रभाव के आधार पर तय किया जाता है।
कई रोगियों को शुरुआती चरणों में ही गतिविधियों में बदलाव लाने, डॉक्टर की सलाह पर दर्द निवारक दवाओं का सेवन करने और व्यवस्थित फिजियोथेरेपी के माध्यम से राहत मिल जाती है। फिजियोथेरेपी में नियंत्रित ढंग से कंधे की गतिशीलता को बढ़ाना और मांसपेशियों की ताकत को मजबूत करने वाले व्यायाम शामिल होते हैं। कॉर्टिकोस्टेरॉइड इंजेक्शन अस्थायी रूप से दर्द से राहत दे सकता है, लेकिन यह फटे हुए टेंडन को ठीक नहीं करता। इंजेक्शन के फायदे और संभावित जोखिमों के बारे में डॉक्टर से विस्तार से चर्चा करनी चाहिए। बार-बार इंजेक्शन लगवाने से बचना चाहिए।
सर्जरी और बचाव के उपाय
बड़े टियर की स्थिति में, दुर्घटना के बाद अचानक गंभीर कमजोरी महसूस होने पर, या उचित रूढ़िवादी उपचार के बावजूद यदि समस्या बनी रहती है, तो विशेषज्ञ डॉक्टर सर्जरी की संभावना पर विचार कर सकते हैं। बचाव के लिए, अचानक अत्यधिक वजन उठाने से बचना चाहिए। ऊंचाई पर काम करते समय नियमित अंतराल पर विराम लेना महत्वपूर्ण है। व्यायाम की तीव्रता को धीरे-धीरे बढ़ाना चाहिए और यदि डायबिटीज है, तो उसे नियंत्रित रखना अत्यंत आवश्यक है। धूम्रपान छोड़ना और संतुलित व पौष्टिक आहार का सेवन करना भी टेंडन के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है।
दर्द के बावजूद जोर लगाकर कसरत करना या तीव्र मालिश कराना स्थिति को और बिगाड़ सकता है। यदि चोट लगने के बाद हाथ अचानक उठना बंद हो जाए, स्पष्ट रूप से कमजोरी महसूस हो, या दर्द बहुत तेज़ी से बढ़े, तो तत्काल एक ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। विशेष रूप से बुजुर्गों और शारीरिक श्रम करने वाले व्यक्तियों को अपने कंधे के लगातार बने रहने वाले दर्द को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। सही समय पर रोग की पहचान, उचित चिकित्सा उपचार और नियमित पुनर्वास के माध्यम से अधिकांश रोगी अपने दर्द को कम कर सकते हैं और कंधे की कार्यक्षमता को बेहतर बनाए रख सकते हैं।
