गौरझामर में झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई में देरी, जांच का आश्वासन
सागर जिले के गौरझामर में कथित झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई का इंतजार है। सात दिनों बाद भी अस्पताल संचालित हो रहे हैं, जबकि प्रशासन...

देवरी जिला सागर मध्यप्रदेश | संवाददाता: त्रिवेंद्र जाट
द क्लिफ न्यूज़ | 28 अक्टूबर 2026
मध्य प्रदेश के सागर जिले के गौरझामर क्षेत्र में कथित झोलाछाप डॉक्टरों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग लगातार तेज हो रही है। स्वास्थ्य विभाग की कथित उदासीनता के चलते इन तथाकथित डॉक्टरों के क्लीनिक और अस्पताल अब भी धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं, जहाँ मरीजों का उपचार जारी है। डॉ. टीके विश्वास और डॉ. अश्वनी मजूमदार के नाम से संचालित अस्पतालों में जिस प्रकार से मरीजों को इंजेक्शन और ड्रिप लगाकर उपचार दिया जा रहा है, उस पर स्थानीय लोगों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। यह स्थिति स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा को लेकर चिंताजनक है।
लगभग सात दिनों से अधिक समय बीत जाने के बावजूद, इस मामले में अब तक कोई निर्णायक कार्रवाई नहीं हो पाई है। सागर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, डॉ. देवेश पटेरिया, द्वारा कार्रवाई के आश्वासन दिए जाने के बावजूद, इन अस्पतालों में चिकित्सकीय गतिविधियां पूर्ववत जारी हैं। सूत्रों के अनुसार, इस मामले को लेकर स्वास्थ्य मंत्री द्वारा सागर कलेक्टर को स्पष्ट निर्देश भी जारी किए गए थे, परंतु जमीनी स्तर पर स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है।
स्वास्थ्य अधिकारियों की भूमिका पर उठे प्रश्न
देवरी ब्लॉक की स्वास्थ्य अधिकारी, डॉ. पूजा परमार, की कार्यप्रणाली पर भी इस पूरे प्रकरण में गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रभावी कार्रवाई न होने के कारण संबंधित अस्पताल संचालकों के हौसले बुलंद हैं। हालाँकि, इन अधिकारियों द्वारा कथित तौर पर संरक्षण प्रदान करने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है। इस बीच, प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की दिशा में स्थानीय निवासियों की निगाहें अब अनुविभागीय दंडाधिकारी (एसडीएम) के रुख पर टिकी हैं।
प्रशासनिक जांच और संभावित कार्रवाई
मामले की गंभीरता को संज्ञान में लेते हुए, जब देवरी एसडीएम को इस मुद्दे से अवगत कराया गया, तो उन्होंने अगले दिन विस्तृत जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई का पूर्ण आश्वासन दिया है। अब यह देखना अत्यंत महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन इन अस्पतालों का निरीक्षण कर उनके दस्तावेजों और संबंधित चिकित्सकों की चिकित्सकीय योग्यताओं की निष्पक्ष जांच करता है या नहीं। यदि जांच में नियमों का उल्लंघन प्रमाणित होता है, तो इन अस्पतालों को सील करने और कानूनी प्रक्रिया के तहत सख्त कदम उठाने की उम्मीद की जा रही है।
राजनीतिक संरक्षण के आरोपों की चर्चा
क्षेत्र में इस बात की भी चर्चा जोर-शोर से है कि कथित तौर पर कुछ प्रभावशाली नेताओं या जनप्रतिनिधियों का संरक्षण प्राप्त होने के कारण इन तथाकथित डॉक्टरों के विरुद्ध कार्रवाई प्रभावित हो रही है। हालाँकि, इन दावों की अभी तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है, पर निष्पक्ष जांच की मांग लगातार बढ़ रही है। गौरझामर के इस संवेदनशील मामले में सबसे अहम पहलू यह है कि स्वास्थ्य विभाग को तथ्यों के आधार पर तत्काल जांच प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए और आम नागरिकों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए। यदि अवैध चिकित्सा पद्धतियों का संचालन पाया जाता है, तो दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि आम नागरिकों के स्वास्थ्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ न हो सके। प्रशासन की आगामी कार्रवाई ही इस प्रकरण में उठे सवालों का जवाब देगी और क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था में विश्वसनीयता बहाल करने में सहायक सिद्ध होगी।
