राहुल गांधी ने चुनाव आयोग पर उठाए सवाल, मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर अनियमितताओं का आरोप लगाया और उनके इस्तीफे की मांग की। कांग्रेस ने 25 सितंबर को निर्वाचन कार्यालयों पर प्रदर्शन का ऐलान किया है।

द क्लिफ न्यूज़ | नई दिल्ली | 24 सितंबर 2026
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने गुरुवार को निर्वाचन आयोग पर गंभीर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए कहा कि यह मुद्दा लोकतंत्र और संविधान की बुनियाद से जुड़ा है। राहुल गांधी ने यह भी दावा किया कि उनके पास अपने आरोपों के समर्थन में पर्याप्त सबूत मौजूद हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि वे लंबे समय से चुनावों में कथित 'वोट चोरी' का मुद्दा उठाते रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूचियों में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVMs) से संबंधित प्रक्रियाओं के माध्यम से चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित किया जा रहा है। उन्होंने सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें पद से इस्तीफा देना चाहिए। राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि यदि चुनाव आयोग के भीतर उठाई जा रही आपत्तियां सही हैं, तो आयोग के कामकाज की गंभीरता से जांच होनी चाहिए।
निर्वाचन आयोग पर आरोप और कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं को लगातार कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं और कांग्रेस इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगी। इस पूरे घटनाक्रम के बीच, निर्वाचन आयोग और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद कांग्रेस ने इस मुद्दे को और मुखरता से उठाने की बात कही है। पार्टी की ओर से 25 सितंबर को विभिन्न राज्यों में निर्वाचन कार्यालयों के समक्ष प्रदर्शन का कार्यक्रम भी घोषित किया गया है।
चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों का ज़िक्र
इस दौरान, राहुल गांधी ने निर्वाचन आयोग के भीतर कथित मतभेदों का भी उल्लेख किया। हाल ही में एक रिपोर्ट सामने आई थी जिसमें दावा किया गया था कि दो निर्वाचन आयुक्तों ने आयोग की कुछ प्रक्रियाओं और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। इन आपत्तियों में नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाताओं के नाम हटाने और पुनः जोड़ने तथा विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) से जुड़े मुद्दे शामिल बताए गए थे।
आयोग का पक्ष और संवैधानिक जिम्मेदारी
हालांकि, निर्वाचन आयोग ने इन रिपोर्टों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया है कि आयोग एक बहुसदस्यीय संवैधानिक संस्था है और सदस्यों द्वारा विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग सुझाव या टिप्पणियां देना संस्थागत प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है। आयोग का कहना है कि उसके निर्णय निर्धारित संवैधानिक और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत ही लिए जाते हैं। राहुल गांधी ने कहा कि मतदाता का अधिकार लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव है और चुनाव प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करना निर्वाचन आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि मतदाता सूची से जुड़े किसी भी विवाद का समाधान निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से होना चाहिए।
आगे की रणनीति और राजनीतिक गरमा गरमी
चुनाव आयोग से जुड़े इस विवाद में अब मुख्य मुद्दे मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण की प्रक्रिया, चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता का स्तर और आयोग के निर्णयों को लेकर उठे सवाल हैं। आने वाले दिनों में इन मुद्दों पर राजनीतिक और संस्थागत बहस के और तेज होने की प्रबल संभावना है। कांग्रेस पार्टी द्वारा 25 सितंबर को प्रस्तावित प्रदर्शन इस मामले को और हवा देगा, जिससे राष्ट्रीय राजनीति में सरगर्मी बढ़ने की उम्मीद है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि निर्वाचन आयोग इन आरोपों पर किस प्रकार आगे प्रतिक्रिया देता है और क्या इस मामले में कोई उच्च-स्तरीय जांच की मांग उठती है।
