ग्वालियर में चलित वाहनों में गणेश विसर्जन, तालाबों को प्रदूषण से बचाने की पहल
ग्वालियर में माधव महाविद्यालय की एनएसएस इकाई ने जल स्रोतों को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए चलित वाहनों में गणेश विसर्जन की अनूठी पहल की।...

Gwalior | संवाददाता: संजय पांडेय
द क्लिफ न्यूज़ | ग्वालियर | 26 सितंबर 2026
ग्वालियर महानगर में जल स्रोतों को प्रदूषण मुक्त रखने की दिशा में एक अनूठी पहल की गई है। माधव महाविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई ने गणेश विसर्जन के दौरान चलित वाहनों के माध्यम से स्वच्छता अभियान चलाया, जिसका मुख्य उद्देश्य बड़े जलाशयों में विसर्जन को रोकना और जलीय जीवों को सुरक्षित रखना है। जिला प्रशासन और नगर निगम के सहयोग से कटोरा ताल पर आयोजित इस कार्यक्रम में अस्थायी कुंडों का उपयोग किया गया।
वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी डॉ. संजय कुमार पाण्डेय के नेतृत्व में एनएसएस के स्वयंसेवकों ने पिछले पंद्रह वर्षों से चली आ रही इस परंपरा को आगे बढ़ाया है। यह अभियान विशेष रूप से गणेश मूर्तियों के विसर्जन से होने वाले जल प्रदूषण को कम करने पर केंद्रित है, जिससे तालाबों और अन्य जल निकायों में रहने वाले जलीय जीवों को किसी भी प्रकार की हानि न पहुंचे। इस वर्ष भी युवाओं ने इस महत्वपूर्ण पर्यावरण संरक्षण कार्य में अपना अमूल्य योगदान दिया।
पर्यावरण संरक्षण में स्वयंसेवकों की सक्रिय भूमिका
इस वर्ष के स्वच्छता अभियान में माधव महाविद्यालय के छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। डॉ. प्रशांत साहू, उज्जवल गुप्ता, अंकित तिवारी, कृष्ण रजक, दिशांत प्रजापति, सुमित रजक, अशोक और दीपक बंजारा जैसे स्वयंसेवकों ने इस पहल को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अतिरिक्त, पार्वती बाई गोखले विज्ञान महाविद्यालय की स्वयंसेविका कुमारी मिनी कुशवाह और गरिमा झा ने भी इस पुनीत कार्य में अपना सहयोग दिया। सभी प्रतिभागियों ने सामूहिक रूप से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया और जनमानस को इस दिशा में जागरूक करने का संकल्प लिया।
अन्य क्षेत्रों के लिए एक अनुकरणीय पहल
जिला प्रशासन के सहयोग से आयोजित यह अभियान न केवल ग्वालियर शहर के लिए बल्कि अन्य महानगरों के लिए भी एक प्रेरणा स्रोत बन सकता है। यह पहल सीधे तौर पर पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा से जुड़ी हुई है, जो आज के समय की एक गंभीर आवश्यकता है। माधव महाविद्यालय की इस सक्रिय और निरंतर भागीदारी ने स्वच्छता अभियान को एक नई दिशा प्रदान की है, जिससे सार्वजनिक जागरूकता बढ़ी है और जल निकायों के संरक्षण में मदद मिली है।
