एनएसएस शिविर में युवाओं को जामवंत बनकर विकसित भारत का निर्माण करने की प्रेरणा
ग्वालियर के जीवाजी विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना शिविर के छठे दिन युवाओं को अपनी छिपी क्षमताओं को पहचानने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने...

Gwalior | संवाददाता: संजय पांडेय
द क्लिफ न्यूज़ | ग्वालियर | 2 अक्टूबर 2026
ग्वालियर के जीवाजी विश्वविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के नेतृत्व एवं प्रशिक्षण शिविर के छठे दिन, युवाओं को अपनी सुप्त क्षमताओं को पहचानकर 'जामवंत' बनने और 'विकसित भारत' के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया गया। इस अवसर पर कुलगुरु डॉ. दिवाकर सिंह राजपूत और विशेषज्ञ डॉ. शिवेश प्रताप सिंह ने युवाओं को राष्ट्र निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देने हेतु प्रोत्साहित किया।
शिविर के छठे दिन की शुरुआत प्रभात फेरी, योग और स्वच्छता अभियान जैसी गतिविधियों के साथ हुई, जो युवाओं में अनुशासन और सामुदायिक सेवा की भावना को विकसित करने के उद्देश्य से आयोजित की गईं। मुख्य अतिथि के तौर पर बोलते हुए कुलगुरु डॉ. दिवाकर सिंह राजपूत ने रामायण के प्रसंग का उल्लेख करते हुए युवाओं को अपनी आंतरिक शक्ति को पहचानने और उसे राष्ट्रहित के कार्यों में लगाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि एक विकसित भारत के निर्माण के लिए निरंतर विमर्श और कर्तव्य के प्रति निष्ठा अत्यंत आवश्यक है।
तकनीकी प्रगति के युग में मानवीय मूल्यों का महत्व
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. शिवेश प्रताप सिंह ने भारतीय युवाओं को 'जेन बी' अर्थात् 'जनरेशन फॉर विकसित भारत' की संज्ञा दी। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि देश की प्रगति केवल तकनीकी उन्नति पर निर्भर नहीं करती, बल्कि यह मानवीय संवेदनाओं, पारिवारिक मूल्यों और नैतिक आधारों पर भी टिकी होनी चाहिए। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे तकनीकी प्रगति के साथ-साथ इन महत्वपूर्ण मानवीय पहलुओं को भी बनाए रखें ताकि एक समग्र और मजबूत राष्ट्र का निर्माण हो सके।
इस प्रशिक्षण शिविर के दौरान, राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों और अधिकारियों द्वारा किए गए उत्कृष्ट कार्यों को सम्मानित किया गया। इस पहल का उद्देश्य युवाओं को उनके समर्पण और कड़ी मेहनत के लिए प्रोत्साहित करना था। कार्यक्रम का मंच संचालन प्रो. मुदिता मिश्रा ने कुशलतापूर्वक किया, जबकि डॉ. मनोज अवस्थी ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। शिविर में विश्वविद्यालय के अनेक प्रमुख शैक्षणिक पदाधिकारी भी उपस्थित रहे, जो युवाओं को मार्गदर्शन देने के लिए प्रतिबद्ध थे।
