एल्गिन अस्पताल में नवजात के हाथ में फ्रैक्चर, कांग्रेस ने की जांच की मांग
जबलपुर के एल्गिन अस्पताल में सिजेरियन प्रसव के दौरान नवजात के हाथ में फ्रैक्चर का मामला सामने आया है। कांग्रेस ने निष्पक्ष जांच और मुआवजे...

Jabalpur | संवाददाता: शफी ख़ान
द क्लिफ न्यूज़ | जबलपुर | 23 सितंबर 2026
जबलपुर के प्रतिष्ठित एल्गिन अस्पताल में सिजेरियन प्रसव के दौरान एक नवजात शिशु के हाथ की हड्डी के दो टुकड़ों में टूटने का गंभीर मामला सामने आया है। इस घटना ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसके चलते नगर कांग्रेस कमेटी ने जिला प्रशासन से निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
घटना के संबंध में स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने अतिरिक्त कलेक्टर श्रीमती नीता राठौर को एक ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में कहा गया है कि 18 सितंबर 2026 को इस घटना की जानकारी मिलने के बाद, कांग्रेस प्रवक्ता रिज़वान अली कोटी ने मुख्य स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी (सीएमएचओ) से फोन पर संपर्क किया था। सीएमएचओ द्वारा इसे प्रसव की सामान्य जटिलता बताए जाने के तर्क को कांग्रेस ने सिरे से खारिज कर दिया है।
सोनाग्राफी रिपोर्ट पर सवाल, लापरवाही का आरोप
कांग्रेस का आरोप है कि 17 सितंबर 2026 को हुई नवजात की सोनोग्राफी रिपोर्ट में प्रसव संबंधी किसी भी प्रकार की जटिलता का कोई उल्लेख नहीं था। ऐसे में, प्रसव के दौरान नवजात के हाथ का फ्रैक्चर होना सीधे तौर पर अस्पताल प्रबंधन या संबंधित चिकित्सकों की लापरवाही की ओर इशारा करता है। परिजनों ने भी अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है।
कांग्रेस की प्रमुख मांगें
कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने जिला प्रशासन से इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। यदि जांच में किसी भी चिकित्सक या अस्पताल कर्मचारी की लापरवाही या गलती पाई जाती है, तो उनके विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए। इसके अतिरिक्त, कांग्रेस ने पीड़ित नवजात के निःशुल्क इलाज की व्यवस्था करने और प्रभावित परिवार को उचित मुआवजा प्रदान करने का भी आग्रह किया है। ज्ञापन सौंपने के दौरान बादल पंजवानी, एजाज़ अंसारी, कुणाल भाटिया, अदनान अंसारी, सिंकदर खान और शफ़ी खान सहित कई अन्य कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित थे।
प्रशासन ने मामले की गंभीरता को समझते हुए, जांच का आश्वासन दिया है। अब सभी की निगाहें इस मामले की जांच के निष्कर्ष और प्रशासन द्वारा की जाने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
