चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर मचे घमासान पर संबित पात्रा का पलटवार
भाजपा सांसद संबित पात्रा ने चुनाव आयोग के आयुक्तों के बीच SIR फैसलों पर हुए पत्राचार को संस्थागत प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा बताया, वहीं विपक्ष के आरोपों पर पलटवार किया।

द क्लिफ न्यूज़ | नई दिल्ली | 23 सितंबर 2026
चुनाव आयोग में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े फैसलों को लेकर उठे विवाद के बीच भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने बुधवार को कांग्रेस सहित विपक्षी दलों के आरोपों पर तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के तीनों आयुक्तों के बीच विचार-विमर्श और पत्राचार एक लोकतांत्रिक संस्थागत प्रक्रिया का स्वाभाविक हिस्सा है।
पात्रा ने चुनाव आयोग द्वारा जारी हालिया स्पष्टीकरण का हवाला देते हुए कहा कि आयोग के सदस्यों के बीच पिछले 10 महीनों में कई बार आधिकारिक पत्राचार हुआ है। उन्होंने विशेष रूप से 14 बार हुए पत्राचार का उल्लेख करते हुए कहा कि अलग-अलग मुद्दों पर सवाल उठाना, टिप्पणियां करना और अपने विचार व्यक्त करना किसी भी स्वायत्त संस्था में एक सामान्य प्रक्रिया है।
आंतरिक मतभेदों को बताया सामान्य प्रक्रिया
भाजपा सांसद ने कहा कि जब चुनाव आयोग के आयुक्त आपस में चर्चा करते हैं और किसी विषय पर अलग-अलग राय रखते हैं, तो विपक्ष इसे संस्था की निष्पक्षता पर सवाल उठाने का आधार बनाता है। वहीं, यदि सभी आयुक्त एकमत दिखें तो भी विपक्ष इसे एकतरफा प्रक्रिया कहकर आयोग की कार्यप्रणाली पर अंगुली उठाता है। पात्रा ने इसे एक विरोधाभासी रवैया बताते हुए कहा कि विचारों का आदान-प्रदान ही एक मजबूत लोकतांत्रिक संस्था की पहचान है।
यह पूरा विवाद उन रिपोर्टों के बाद सामने आया था, जिनमें दावा किया गया था कि दो चुनाव आयुक्तों ने SIR से संबंधित कुछ फैसलों और आदेशों पर पिछले 10 महीनों में कई बार आपत्तियां या टिप्पणियां दर्ज की थीं। इन रिपोर्टों के आधार पर विपक्ष ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे।
चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण और विपक्ष पर आरोप
चुनाव आयोग ने बाद में एक विस्तृत स्पष्टीकरण जारी कर इन चिंताओं को दूर करने का प्रयास किया। आयोग ने कहा कि आंतरिक टिप्पणियां और अलग-अलग राय निर्णय प्रक्रिया का एक सामान्य हिस्सा हैं। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय हमेशा आयोग की सामूहिक प्रक्रिया के तहत ही लिए जाते हैं, जिसमें सभी आयुक्तों की सहमति या विचार-विमर्श शामिल होता है।
आयोग ने अपने बयान में जोर देकर कहा कि उसके सभी आदेश और प्रशासनिक निर्देश कड़े कानूनी प्रक्रियाओं के अनुरूप ही जारी किए जाते हैं। आयोग के अनुसार, पिछले एक वर्ष में लिए गए विभिन्न निर्णय और किए गए चुनाव सुधार पूर्ण आयोग के सर्वसम्मत निर्णयों का ही परिणाम हैं।
संबित पात्रा ने कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर सीधे आरोप लगाया कि वे चुनावी प्रक्रिया को निष्पक्ष और स्वतंत्र बनाए रखने वाली संस्थाओं की विश्वसनीयता को लगातार कटघरे में खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने विपक्षी दलों से आग्रह किया कि उन्हें केवल संस्थाओं पर आरोप लगाने के बजाय, चुनाव आयोग द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण और उनकी कार्यप्रणाली को भी जनता के सामने रखना चाहिए।
