बलरामपुर सीएचसी में 11 कर्मचारी अनुपस्थित, सीएमओ ने वेतन रोकने का आदेश दिया
बलरामपुर सीएचसी शिवपुरा में सीएमओ डॉ. मुकेश कुमार रस्तोगी ने निरीक्षण में 11 कर्मचारियों को अनुपस्थित पाया। उन्होंने वेतन रोकने के निर्देश दिए व मरीजों...

बलरामपुर उत्तर प्रदेश | संवाददाता: अनिरुद्ध प्रताप शुक्ल
द क्लिफ न्यूज़ | बलरामपुर | 23 अक्टूबर 2026
बलरामपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) शिवपुरा में शुक्रवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. मुकेश कुमार रस्तोगी द्वारा किए गए औचक निरीक्षण ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का मार्ग प्रशस्त किया है। निरीक्षण के दौरान 11 अधिकारी और कर्मचारी अपने निर्धारित ड्यूटी समय पर अनुपस्थित पाए गए, जिसके परिणामस्वरूप सीएमओ ने उनकी अनुपस्थिति अवधि का वेतन रोकने के तत्काल निर्देश जारी किए हैं। इस कार्रवाई का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं में जवाबदेही और नियमितता सुनिश्चित करना है।
यह निरीक्षण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की कार्यप्रणाली, मरीजों को उपलब्ध कराई जा रही स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता और कर्मचारियों की उपस्थिति की जमीनी हकीकत परखने के लिए किया गया था। सीएमओ डॉ. रस्तोगी ने स्वयं अस्पताल परिसर का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और खामियों को उजागर किया। अनुपस्थित कर्मचारियों की सूची में वरिष्ठ पदों पर आसीन लोगों से लेकर सहायक कर्मचारियों तक शामिल हैं, जो व्यवस्थागत अनुशासन की कमी को दर्शाता है।
अस्पताल परिसर में सुधार के कड़े निर्देश
निरीक्षण के दौरान सीएमओ ने अधीक्षक डॉ. सुजीत कुमार पाण्डेय को स्पष्ट निर्देश दिए कि भविष्य में सभी कर्मचारी निर्धारित समय पर अस्पताल में अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करें। उन्होंने अस्पताल परिसर में साफ-सफाई बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया और सभी चिकित्सा कर्मियों को निर्धारित वर्दी पहनने के स्पष्ट निर्देश दिए। सीएमओ का मानना है कि बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए न केवल डॉक्टरों और नर्सों की सक्रियता आवश्यक है, बल्कि एक स्वच्छ और व्यवस्थित वातावरण भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि मरीजों को उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना अस्पताल प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इसमें किसी भी प्रकार की कोताही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मरीजों को बाहर भेजने पर पूर्ण प्रतिबंध
स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता के संबंध में सीएमओ ने एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी करते हुए कहा कि किसी भी मरीज को जांच (डायग्नोस्टिक टेस्ट) या दवा के लिए अस्पताल से बाहर नहीं भेजा जाना चाहिए। सीएमओ के अनुसार, सभी आवश्यक दवाएं और नैदानिक सुविधाएं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के भीतर ही उपलब्ध होनी चाहिए। इस निर्देश का उद्देश्य मरीजों को अनावश्यक आर्थिक बोझ से बचाना और उन्हें तत्काल चिकित्सा सहायता प्रदान करना है। अक्सर यह देखा जाता है कि छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों में आवश्यक संसाधनों की कमी के कारण मरीजों को बाहर रेफर कर दिया जाता है, जिससे उन पर अतिरिक्त व्यय का भार पड़ता है। सीएमओ ने वित्तीय और प्रशासनिक अभिलेखों को अद्यतन रखने का भी निर्देश दिया, ताकि पारदर्शिता और सुचारू प्रबंधन सुनिश्चित हो सके।
किन कर्मचारियों पर हुई कार्रवाई
जिन 11 कर्मचारियों को ड्यूटी से अनुपस्थित पाया गया, उनमें डॉ. आनंद कुमार आर्य, नेत्र परीक्षण अधिकारी सैयद सलीम हुसैन, लैब टेक्नीशियन विनोद कुमार, वरिष्ठ सहायक अशोक कुमार और सुरेंद्र पाल सिंह वर्मा शामिल हैं। इनके अतिरिक्त, वार्ड आया तन्वी श्रीवास्तव, स्वीपर राकेश कुमार, एएनएम रुचि तिवारी तथा स्टाफ नर्स मनीष, वंदना और इला शुक्ला भी कर्तव्य पालन में लापरवाही के दोषी पाए गए। इन सभी के खिलाफ वेतन रोकने की कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। यह कदम स्वास्थ्य विभाग में अनुशासन स्थापित करने और अन्य कर्मचारियों को कर्तव्य के प्रति सजग करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
निरीक्षण के दौरान की स्थिति
निरीक्षण के समय तक, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शिवपुरा की ओपीडी (आउट पेशेंट डिपार्टमेंट) में कुल 89 मरीजों का उपचार किया जा चुका था। आईपीडी (इनपेशेंट डिपार्टमेंट) में छह मरीज भर्ती थे और इस दौरान तीन सफल प्रसव संपन्न हुए थे। पैथोलॉजी विभाग में 27 मरीजों की जांच की गई। इस निरीक्षण के दौरान जिला स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी अरविंद मिश्र और सहायक शोध अधिकारी सिद्धार्थ गुप्ता सहित अन्य चिकित्सा कर्मी भी सीएमओ के साथ मौजूद थे। सीएमओ ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है और सभी अधिकारियों को अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ करने की हिदायत दी गई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में भी व्यवस्थाओं में निरंतर सुधार बनाए रखने के लिए इस प्रकार के औचक निरीक्षणों का सिलसिला जारी रहेगा।
