गुना में मसूर की नई किस्म से दलहन उत्पादन बढ़ाने पर जोर
गुना जिले के 150 किसानों को मसूर की उन्नत किस्म आर.वी.एल. 13-5 की खेती का प्रशिक्षण दिया गया। वैज्ञानिकों ने फसल सुरक्षा और मृदा स्वास्थ्य...

गुना | संवाददाता: राजा हतम वेग
द क्लिफ न्यूज़ | गुना | 23 अक्टूबर 2026
गुना जिले में दलहन उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, कृषि विज्ञान केंद्र आरोन ने 150 किसानों को मसूर की उन्नत किस्म आर.वी.एल. 13-5 के वैज्ञानिक तरीके से खेती करने का प्रशिक्षण प्रदान किया है। राष्ट्रीय दलहन विकास योजना के तहत आयोजित संकुल अग्रिम प्रदर्शन कार्यक्रम का उद्देश्य जिले में दलहनी फसलों के रकबे और उत्पादकता में वृद्धि करना है।
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में इमलिया, छीपोन, खामखेड़ा, रामगिर कला और आरोन सहित जिले के विभिन्न गांवों के किसानों ने हिस्सा लिया। प्रत्येक प्रतिभागी किसान को मसूर की इस नई किस्म का एक एकड़ क्षेत्र में रोपण करने के लिए 16 किलोग्राम बीज उपलब्ध कराए गए, साथ ही बीज शोधन के लिए आवश्यक फफूंदनाशक दवाएं भी वितरित की गईं।
उन्नत तकनीकों और मृदा स्वास्थ्य पर विशेषज्ञ मार्गदर्शन
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. धवेन्द्र सिंह ने किसानों को मसूर की आधुनिक उत्पादन तकनीकों से अवगत कराया। उन्होंने 'खेत बचाओ अभियान रबी 2026-27' के तहत मृदा स्वास्थ्य के संरक्षण और उर्वरकों के संतुलित उपयोग के महत्व पर जोर दिया। डॉ. सिंह ने बताया कि किस प्रकार मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखते हुए बेहतर उपज प्राप्त की जा सकती है।
वहीं, डॉ. अमित कुमार ने कीटनाशक प्रबंधन के प्रभावी उपायों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने किसानों को रासायनिक कीटनाशकों के दुष्प्रभावों से बचने और प्राकृतिक खेती की ओर उन्मुख होने के लाभों के बारे में जानकारी दी। विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक खेती न केवल पर्यावरण के लिए हितकारी है, बल्कि लंबे समय में किसानों की लागत भी कम करती है।
बेहतर गुणवत्ता और अधिक उत्पादन का लक्ष्य
वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी कि वे प्रदर्शन कार्यक्रम के तहत लगाई गई मसूर की फसल की प्रत्येक अवस्था पर बारीकी से निगरानी रखें। यह चरणबद्ध दृष्टिकोण फसल की गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ गुना जिले में दलहन उत्पादन के कुल रकबे को बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगा। इस प्रशिक्षण को दलहनी फसलों की उत्पादकता को एक नई दिशा देने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है। कृषि वैज्ञानिकों की टीम ने किसानों को खेत स्तर पर तकनीकी प्रबंधन के व्यावहारिक तरीके भी समझाए, जिससे वे भविष्य में उन्नत किस्मों से बेहतर आर्थिक लाभ अर्जित कर सकें।
