बलरामपुर: डीएम ने आंगनबाड़ी में बच्चों संग किया भोजन, पोषण की गुणवत्ता परखी
बलरामपुर के डीएम ने रेहरा बाजार के आंगनबाड़ी केंद्र का निरीक्षण किया। उन्होंने बच्चों संग जमीन पर बैठकर भोजन की गुणवत्ता जांची और पोषण सेवाओं...

बलरामपुर उत्तर प्रदेश | संवाददाता: अनिरुद्ध प्रताप शुक्ल
द क्लिफ न्यूज़ | बलरामपुर | 4 नवंबर 2026
बलरामपुर जिले में बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा की स्थिति को बेहतर बनाने के प्रयासों के तहत, जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन ने विकासखंड रेहरा बाजार के ग्राम सरायखास का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने एक कम्पोजिट विद्यालय, डिजिटल लाइब्रेरी और आंगनबाड़ी केंद्र का गहन निरीक्षण किया। जिलाधिकारी की विशेष रुचि बच्चों को उपलब्ध कराए जा रहे भोजन की गुणवत्ता और पोषण संबंधी सेवाओं के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने में रही।
निरीक्षण के दौरान, जिलाधिकारी डॉ. जैन ने जोमैटो फीडिंग इंडिया द्वारा आपूर्ति किए जा रहे भोजन की वास्तविक गुणवत्ता का आकलन करने के लिए एक अभिनव कदम उठाया। उन्होंने स्वयं आंगनबाड़ी केंद्र पर बच्चों के साथ जमीन पर बैठकर दोपहर का भोजन किया। उन्होंने बच्चों के साथ कढ़ी-चावल और इडली-सांभर का स्वाद चखा और उनसे बातचीत कर भोजन की पौष्टिकता और स्वाद के बारे में जानकारी ली। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि बच्चों के स्वस्थ शारीरिक और मानसिक विकास के लिए संतुलित और पौष्टिक आहार अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो उनके भविष्य की मजबूत नींव तैयार करता है।
पोषण सेवाओं का विस्तार और प्रभावी क्रियान्वयन
वर्तमान में, रेहरा बाजार ब्लॉक के कुल 60 आंगनबाड़ी केंद्रों पर यह पोषण पहल सक्रिय रूप से संचालित हो रही है। जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि पोषण संबंधी व्यवस्थाओं में किसी भी स्तर पर कोई समझौता स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि जो बच्चे किन्हीं अपरिहार्य कारणों से आंगनबाड़ी केंद्रों पर नहीं पहुंच पाते, उन्हें उनके गांवों में ही पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाए। इसके अतिरिक्त, गर्भवती महिलाओं के लिए भी स्वच्छ और सुरक्षित तरीके से पैक किए गए भोजन की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए, ताकि उनके परिवारजन आसानी से भोजन प्राप्त कर सकें।
जिलाधिकारी ने आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों की उपस्थिति दर में वृद्धि के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को अभिभावकों के साथ निरंतर संवाद बनाए रखने का सुझाव दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि आंगनबाड़ी केंद्र केवल भोजन वितरण के स्थल मात्र नहीं हैं, बल्कि ये बच्चों के बौद्धिक और सामाजिक विकास के लिए महत्वपूर्ण शिक्षण और देखभाल के केंद्र भी हैं। इन केंद्रों का प्रभावी संचालन बच्चों के समग्र विकास में योगदान देता है। बच्चों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए, कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर अभिभावकों को जागरूक करने और उन्हें प्रेरित करने के निर्देश भी दिए गए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बच्चों के पोषण स्तर की नियमित निगरानी की जानी चाहिए और किसी भी कुपोषित बच्चे के पाए जाने पर तत्काल विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। प्रशासन यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि सभी बच्चों को उनकी आयु के अनुरूप उचित पोषण मिले।
गर्भवती महिलाओं और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों पर ध्यान
पोषण सेवाओं के विस्तार के क्रम में, जिलाधिकारी ने गर्भवती महिलाओं को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता और वितरण प्रणाली का भी बारीकी से जायजा लिया। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि भोजन स्वच्छ और पोषक तत्वों से भरपूर होना चाहिए, ताकि गर्भवती माताओं और उनके गर्भस्थ शिशुओं के स्वास्थ्य को बनाए रखा जा सके। यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए कि भोजन सुरक्षित पैकेटों में उपलब्ध हो, ताकि उनके परिवारजन बिना किसी झिझक के इसे ले जा सकें और घर पर उसका उपभोग कर सकें।
जिलाधिकारी ने उन बच्चों पर भी विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया जो किसी कारणवश आंगनबाड़ी केंद्रों तक नहीं पहुंच पाते। ऐसे बच्चों के लिए 'होम-डिलीवरी' पोषण की व्यवस्था को और मजबूत बनाने की बात कही गई। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बच्चा पोषण की कमी का शिकार न हो, विशेषकर उन दूरदराज के इलाकों में जहां आवागमन की समस्या हो सकती है। यह पहल ग्रामीण और वंचित समुदायों में पोषण सुरक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
शैक्षिक गुणवत्ता और डिजिटल पुस्तकालय का निरीक्षण
विद्यालय के निरीक्षण के दौरान, जिलाधिकारी ने शिक्षकों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित करने और उपलब्ध स्मार्ट क्लासरूम जैसी सुविधाओं का प्रभावी ढंग से उपयोग करने के निर्देश दिए। सरायखास स्थित डिजिटल लाइब्रेरी का निरीक्षण करते हुए, उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं से सीधा संवाद किया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक संसाधनों की उपलब्धता युवाओं को अपने भविष्य को बेहतर दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
डिजिटल लाइब्रेरी की उपयोगिता और पहुंच को बढ़ाने के उपायों पर भी चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने युवाओं को इन संसाधनों का भरपूर लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया और उन्हें सरकारी तथा गैर-सरकारी संस्थाओं द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी भी दी। उन्होंने कहा कि ज्ञान और कौशल ही आज के दौर में सफलता की कुंजी हैं, और डिजिटल लाइब्रेरी जैसे मंच उस दिशा में सहायक सिद्ध हो सकते हैं। इस अवसर पर खंड विकास अधिकारी, बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) और अन्य संबंधित विभागीय अधिकारी जिलाधिकारी के साथ मौजूद रहे। प्रशासन ने यह आश्वासन दिया है कि इन व्यवस्थाओं की निरंतर निगरानी की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सरकारी योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से और बिना किसी बाधा के पहुंचे। यह कदम जिले में सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।
