युवा सृजन संवाद: मध्यप्रदेश में पुलिस-महाविद्यालयों के बीच जागरूकता का प्रसार
मध्यप्रदेश पुलिस और उच्च शिक्षा विभाग की संयुक्त पहल 'जन सुरक्षा युवा सृजन संवाद' के तहत 60 हजार से अधिक विद्यार्थी कानून, नागरिक अधिकारों और...

पाण्डुर्ना | संवाददाता: आशीष नेमा
द क्लिफ न्यूज़ | पाण्डुर्ना | 29 अक्टूबर 2026
मध्यप्रदेश पुलिस और उच्च शिक्षा विभाग ने मिलकर 'जन सुरक्षा युवा सृजन संवाद' नामक एक अनूठी पहल का शुभारंभ किया है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रदेश भर के युवाओं को संविधान, कानून, नागरिक अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति संवेदनशील बनाना है, ताकि वे एक जिम्मेदार और सजग नागरिक के रूप में अपना योगदान दे सकें। राष्ट्रीय एकता दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित की जा रही इन गतिविधियों में अब तक 60 हजार से अधिक छात्र-छात्राएं सक्रिय रूप से भाग ले चुके हैं।
यह पहल पुलिस विभाग और उच्च शिक्षा विभाग के बीच हुए एक औपचारिक समझौता ज्ञापन का परिणाम है, जिसका लक्ष्य महाविद्यालयों और पुलिस तंत्र के बीच एक मजबूत और संस्थागत संवाद स्थापित करना है। सामुदायिक पुलिसिंग शाखा के तत्वावधान में संचालित यह योजना, विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक सद्भाव और नवीन आपराधिक न्याय विधान जैसे समकालीन और महत्वपूर्ण विषयों पर व्यावहारिक ज्ञान प्रदान कर रही है। यह संवाद छात्रों को न केवल कानूनी ढांचे की जानकारी देता है, बल्कि उन्हें समाज में सक्रिय और जागरूक हिस्सेदारी के लिए भी प्रोत्साहित करता है।
प्रशिक्षित प्राध्यापकों द्वारा कार्यशालाओं का आयोजन
कार्यक्रम को प्रभावी बनाने के लिए पुलिस मुख्यालय ने 10 अक्टूबर 2026 को एक राज्य स्तरीय प्रशिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया था। इस कार्यक्रम में प्रदेश के 66 शासकीय महाविद्यालयों के 136 प्राध्यापकों को गहन प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इन प्राध्यापकों का चयन इसलिए किया गया क्योंकि वे अपने-अपने शैक्षणिक संस्थानों में विद्यार्थियों के साथ सीधा संपर्क रखते हैं और उनकी समस्याओं तथा जिज्ञासाओं को बेहतर ढंग से समझते हैं। ये प्रशिक्षित प्राध्यापक अब अपने-अपने संस्थानों में विद्यार्थियों को कानून और जन सुरक्षा से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर जागरूक करने की महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, जिससे ज्ञान का प्रसार अधिक प्रभावी ढंग से हो रहा है।
इस योजना के तहत दो दिवसीय प्रारूप निर्धारित किया गया है। कार्यक्रम के पहले दिन महाविद्यालयों में विशेष कार्यशालाओं का आयोजन किया जाता है, जहाँ विशेषज्ञ पुलिस अधिकारी और प्रशिक्षित प्राध्यापक युवाओं को विभिन्न सुरक्षा संबंधी विषयों पर विस्तृत जानकारी देते हैं। इन कार्यशालाओं में डिजिटल माध्यमों के सुरक्षित उपयोग, ऑनलाइन धोखाधड़ी, सोशल मीडिया के दुरुपयोग से बचाव, और पहचान की चोरी जैसे विषयों पर विशेष जोर दिया जा रहा है, जो आज के डिजिटल युग में अत्यंत प्रासंगिक हैं। इसके अतिरिक्त, विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के महत्व और तनाव प्रबंधन के तरीकों के बारे में भी जागरूक किया जाता है, जो उनके समग्र कल्याण के लिए आवश्यक है।
थाना भ्रमण से पुलिस कार्यप्रणाली को समझना
कार्यक्रम के दूसरे दिन, विद्यार्थी स्थानीय पुलिस थानों का भ्रमण करते हैं। यह भ्रमण उन्हें पुलिस की दैनिक कार्यप्रणाली, जांच प्रक्रियाओं, शिकायत निवारण तंत्र, नागरिक सहायता सेवाओं और समग्र सुरक्षा व्यवस्था को करीब से समझने का अवसर प्रदान करता है। इस दौरान, वे एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया, यातायात नियमों का उल्लंघन होने पर होने वाली कार्रवाई, और विभिन्न अपराधों की जांच में पुलिस की भूमिका को प्रत्यक्ष रूप से देखते हैं। अधिकारियों के साथ प्रत्यक्ष संवाद के माध्यम से विद्यार्थियों की विभिन्न जिज्ञासाओं का समाधान होता है, और उनके मन में सुरक्षा के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है। यह अनुभव उन्हें कानून के प्रति सम्मान और समाज की सुरक्षा में अपनी भूमिका के बारे में अधिक जागरूक बनाता है।
यह पहल सामुदायिक पुलिसिंग के उस सिद्धांत को मजबूत करती है, जहाँ पुलिस और आम जनता के बीच विश्वास का एक मजबूत सेतु निर्मित होता है। जब युवा पीढ़ी पुलिसिंग की वास्तविकताओं को समझती है, तो उनके मन में भय की जगह सम्मान और सहयोग की भावना पनपती है। शैक्षणिक संस्थानों को जन जागरूकता और नागरिक शिक्षा के केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है। विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण और व्यापक भागीदारी यह दर्शाती है कि युवा वर्ग कानून का सम्मान करने और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तत्पर है। यह न केवल वर्तमान पीढ़ी को लाभान्वित कर रहा है, बल्कि भविष्य के लिए भी एक सुरक्षित और जिम्मेदार समाज की नींव रख रहा है।
नवीन आपराधिक न्याय विधान और नागरिक अधिकार
इस 'जन सुरक्षा युवा सृजन संवाद' कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण पहलू नवीन आपराधिक न्याय विधान की जानकारी देना है। भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम जैसे नए कानूनों के बारे में विद्यार्थियों को अवगत कराया जा रहा है। प्रशिक्षित प्राध्यापक और पुलिस अधिकारी इन नए कानूनों के प्रावधानों, उनके उद्देश्यों और आम नागरिकों पर उनके प्रभाव को सरल भाषा में समझाते हैं। यह जानकारी छात्रों को उनके अधिकारों और जिम्मेदारियों के प्रति अधिक सचेत करती है, और उन्हें न्याय प्रणाली की कार्यप्रणाली को बेहतर ढंग से समझने में मदद करती है।
इसके साथ ही, नागरिक अधिकारों और कर्तव्यों पर भी विस्तार से चर्चा की जाती है। विद्यार्थियों को भारतीय संविधान में वर्णित मौलिक अधिकारों, जैसे कि स्वतंत्रता का अधिकार, समानता का अधिकार, और जीवन का अधिकार, के बारे में बताया जाता है। साथ ही, उन्हें राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों, जैसे कि मतदान करना, कानून का पालन करना, और राष्ट्र की संपत्ति की रक्षा करना, के महत्व को भी समझाया जाता है। यह सत्र छात्रों में नागरिक चेतना को जागृत करता है और उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में समाज में योगदान देने के लिए प्रेरित करता है।
भविष्य की दिशा और व्यापकता
प्रशासन का मानना है कि भविष्य में इस कार्यक्रम की निरंतरता और इसके प्रभाव का विस्तृत आकलन किया जाएगा, जिसके आधार पर गतिविधियों को और अधिक व्यापक एवं प्रभावी बनाया जाएगा। इसमें ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं और महाविद्यालयों को भी शामिल करने की योजना है, ताकि जन सुरक्षा और जागरूकता का संदेश प्रदेश के कोने-कोने तक पहुंच सके। प्रशिक्षण कार्यक्रमों को अद्यतन किया जाएगा ताकि वे समसामयिक मुद्दों और चुनौतियों के अनुरूप हों। वर्तमान में, यह प्रयास प्रदेश के युवाओं को एक जिम्मेदार, कानून-सजग और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाले नागरिक के रूप में ढालने में अत्यंत सफल सिद्ध हो रहा है। यह पहल न केवल युवाओं को शिक्षित कर रही है, बल्कि उन्हें समाज की सुरक्षा में एक सक्रिय भागीदार बनने के लिए भी प्रेरित कर रही है, जो एक सुरक्षित और समृद्ध भविष्य के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
