फर्रुखाबाद में महिला होमगार्ड की टक्कर, पुलिस पर पक्षपात का आरोप
फर्रुखाबाद के छोटी जेल चौराहे पर महिला होमगार्ड की स्कूटी से साइकिल सवार बृजेश कुमार घायल हो गए। पुलिस पर होमगार्ड को बचाने और पीड़ित...

फर्रुखाबाद | संवाददाता: संदीप तिवारी
द क्लिफ न्यूज़ | फर्रुखाबाद | 22 सितंबर 2026
फर्रुखाबाद के छोटी जेल चौराहे के निकट हुई एक सड़क दुर्घटना ने स्थानीय ट्रैफिक पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मानिकपुर निवासी बृजेश कुमार अपनी साइकिल से एक आवश्यक कार्य के लिए जा रहे थे, तभी स्कूटी सवार एक महिला होमगार्ड ने उनकी साइकिल में जोरदार टक्कर मार दी। इस टक्कर के परिणामस्वरूप बृजेश कुमार सड़क पर गिरकर घायल हो गए और उनकी साइकिल भी काफी हद तक क्षतिग्रस्त हो गई।
घटनास्थल पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब इस दुर्घटना की सूचना ट्रैफिक पुलिस को दी गई, तो मौके पर पहुंची पुलिस ने कथित तौर पर महिला होमगार्ड के विरुद्ध कोई भी कार्रवाई नहीं की। इसके बजाय, महिला होमगार्ड को सुरक्षित रूप से घटनास्थल से जाने दिया गया। पीड़ित बृजेश कुमार ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने महिला होमगार्ड को रोकने या उससे पूछताछ करने के बजाय, उन्हें ही धमकाना और डांटना शुरू कर दिया।
छोटी जेल चौराहे पर हुई दुर्घटना
दुर्घटना का शिकार हुए बृजेश कुमार ने बताया कि वह छोटी जेल चौराहे के पास से अपनी साइकिल से गुजर रहे थे। तभी स्कूटी संख्या यूपी ७६ एएम ५८९५ पर तेज गति से आ रही एक महिला होमगार्ड ने लापरवाही से उनकी साइकिल को टक्कर मार दी। अचानक हुए इस हमले से बृजेश कुमार अपना संतुलन खो बैठे और सड़क पर गिर पड़े। उन्हें गंभीर चोटें आईं और उनकी साइकिल भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे उसका पहिया टेढ़ा हो गया और वह चलने लायक नहीं रही।
पुलिस की भूमिका पर उठते सवाल
घटना के तुरंत बाद, आसपास के लोगों ने ट्रैफिक पुलिस को सूचित किया। प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि पुलिस के जवान मौके पर पहुंचे तो उन्होंने घायल बृजेश कुमार की मदद करने के बजाय, स्कूटी चला रही महिला होमगार्ड का पक्ष लिया। पुलिस ने महिला होमगार्ड को पूछताछ के लिए रोका या उनके खिलाफ कोई प्रारंभिक कार्रवाई की, ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। इसके विपरीत, बृजेश कुमार का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें ही डांटा और धमकाया, यह कहते हुए कि वह गलती से सड़क पर आ गए थे। एक गंभीर सड़क दुर्घटना के पीड़ित को इस तरह का व्यवहार मिलने से लोगों में पुलिस के प्रति नाराजगी है।
पीड़ित को नहीं मिली सहायता
घायल बृजेश कुमार ने जब पुलिस से मदद की गुहार लगाई तो उन्हें स्पष्ट रूप से सहायता देने से मना कर दिया गया। अपनी चोटिल अवस्था में, टूटी हुई साइकिल के साथ खड़े बृजेश कुमार ने पुलिस की इस एकतरफा कार्रवाई को सरासर पक्षपातपूर्ण बताया है। उनका कहना है कि एक सरकारी वर्दीधारी अधिकारी द्वारा की गई गलती को छिपाने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि एक आम नागरिक को ही परेशान किया जा रहा है। यह व्यवहार न केवल गैर-जिम्मेदाराना है, बल्कि पुलिस के प्रति जनता के भरोसे को भी कम करता है।
जनता में आक्रोश और सुरक्षा व्यवस्था पर चिंता
स्थानीय निवासियों के बीच इस घटना को लेकर तीव्र चर्चा है। लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि एक सरकारी कर्मचारी की गलती को नजरअंदाज कर एक आम नागरिक को क्यों प्रताड़ित किया गया। इस घटना ने न केवल सड़क सुरक्षा के नियमों के उल्लंघन पर, बल्कि पुलिस के मानवीय दृष्टिकोण और निष्पक्षता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। जनता में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि एक ओर जहां आम नागरिकों से यातायात नियमों का सख्ती से पालन कराने का दावा किया जाता है, वहीं दूसरी ओर सरकारी कर्मचारियों की गलतियों पर पर्दा डालने का प्रयास किया जाता है। इस घटना ने फर्रुखाबाद में सुरक्षा व्यवस्था की हकीकत को उजागर किया है और पुलिस के कामकाज के तरीकों पर गंभीर चिंताएं व्यक्त की जा रही हैं।
