गुना में धनतेरस पर सफाई कर्मचारियों की हड़ताल, कचरे के ढेर से बिगड़ी स्थिति
गुना शहर धनतेरस पर तीन दिवसीय सफाई कर्मचारी हड़ताल के कारण गंदगी की चपेट में है। मुख्य बाजारों से लेकर गलियों तक कचरे के अंबार...

गुना | संवाददाता: राजा हतम वेग
द क्लिफ न्यूज़ | गुना | 6 नवंबर 2026
समृद्धि और स्वच्छता के पर्व धनतेरस पर गुना शहर गंदगी के ढेरों में तब्दील हो गया है। सफाई कर्मचारियों की प्रदेशव्यापी हड़ताल के आज तीसरे दिन भी शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप रही। मुख्य बाजारों से लेकर गली-मोहल्लों तक कचरे के अंबार लगे हुए हैं, जिससे नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासनिक अनदेखी और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी के कारण हालात लगातार बदतर होते जा रहे हैं।
धनतेरस के शुभ अवसर पर त्योहार की खरीदारी करने निकले व्यापारियों और ग्राहकों को कचरे की बदबू के बीच से गुजरना पड़ा। कुछ दुकानदारों ने मजबूरन सड़क पर ही कचरा डाल दिया, जबकि कई जागरूक व्यापारियों ने नैतिक जिम्मेदारी निभाते हुए कचरा डस्टबिन में एकत्र किया। विडंबना यह है कि हड़ताल पर बैठे कर्मचारी अपनी ऑनलाइन उपस्थिति रोजाना दर्ज करा रहे हैं। इस स्थिति ने यह दर्शाया है कि प्रशासन की ओर से इस समस्या के समाधान के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है, जिससे नागरिकों को दैनिक जीवन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
प्रशासन की उदासीनता के कारण स्वच्छता व्यवस्था ठप
शहर में पिछले तीन दिनों से जारी सफाई कर्मचारियों की हड़ताल ने पूरी तरह से स्वच्छता व्यवस्था को ठप कर दिया है। इसका सीधा असर सड़कों, बाजारों और रिहायशी इलाकों पर दिखाई दे रहा है, जहां कचरे के ढेर जमा हो गए हैं। धनतेरस जैसे महत्वपूर्ण त्योहार के मौके पर यह गंदगी न केवल शहर की सुंदरता को धूमिल कर रही है, बल्कि नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए भी एक बड़ा खतरा पैदा कर रही है। प्रशासनिक उदासीनता और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी इस स्थिति को और गंभीर बना रही है, क्योंकि अब तक कोई भी अधिकारी इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करते हुए समाधान की दिशा में आगे नहीं बढ़ा है।
लावारिस शवों के अंतिम संस्कार में भी बाधा
हड़ताल का एक अत्यंत संवेदनशील और अमानवीय पहलू यह है कि जिला अस्पताल के पीएम रूम में रखे दो लावारिस शवों का अंतिम संस्कार भी नहीं हो पा रहा है। बजरंगगढ़ पुलिस और जीआरपी द्वारा सूचना दिए जाने के बावजूद, नगरपालिका के जिम्मेदार अधिकारी हड़ताल का हवाला देकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं। पूर्व में, स्थानीय स्तर पर समझाइश देकर हड़तालें समाप्त करा ली जाती थीं, किंतु इस बार जिम्मेदार अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। यह स्थिति न केवल नागरिकों के लिए चिंता का विषय है, बल्कि यह प्रशासनिक अक्षमता को भी उजागर करती है। मृत व्यक्तियों के सम्मान के साथ अंतिम संस्कार का अधिकार एक मानवीय आवश्यकता है, जिसे प्रशासनिक उपेक्षा के चलते रोका जा रहा है।
वैकल्पिक व्यवस्थाओं का अभाव और जन आक्रोश
अन्य शहरों में जहां ऐसी हड़तालों के दौरान वैकल्पिक व्यवस्थाएं की जाती हैं, ताकि सार्वजनिक सेवाओं में व्यवधान न आए, वहीं गुना प्रशासन ने अब तक कर्मचारियों से कोई सार्थक वार्ता नहीं की है और न ही किसी प्रकार की वैकल्पिक व्यवस्था का कोई प्रबंध किया है। स्थानीय लोगों ने इस स्थिति पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है और त्वरित समाधान की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो शहर में स्वास्थ्य संबंधी संकट और अधिक गहरा सकता है। नागरिकों का कहना है कि त्योहारों के समय ऐसी अव्यवस्था स्वीकार्य नहीं है और प्रशासन को तत्काल इस समस्या का समाधान करना चाहिए।
