ऑपरेशन FAST 2.0: मध्य प्रदेश पुलिस की फर्जी सिम नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई
मध्य प्रदेश पुलिस ने 'ऑपरेशन FAST 2.0' के तहत फर्जी दस्तावेजों और बायोमेट्रिक के दुरुपयोग से जारी सिम कार्ड के खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई की है। कई जिलों में कार्रवाई कर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 21 सितंबर 2026
साइबर अपराधों की रोकथाम और उनसे जुड़े फर्जी सिम कार्डों की सप्लाई चेन को तोड़ने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा चलाए जा रहे 'ऑपरेशन FAST 2.0' (Forged–Activated–SIM–Termination) के तहत सूबे भर में प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। इस ऑपरेशन के माध्यम से पुलिस ने फर्जी दस्तावेजों, आधार कार्ड, फोटो और बायोमेट्रिक जानकारी का दुरुपयोग कर सिम कार्ड जारी कराने वाले व्यक्तियों, पॉइंट ऑफ सेल (POS) एजेंटों और ऐसे सिम उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क की पहचान कर उनके खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की है। पुलिस मुख्यालय के जनसंपर्क कक्ष द्वारा जारी समाचार के अनुसार, पिछले माह में इस ऑपरेशन के तहत महत्वपूर्ण गिरफ्तारियां और प्रकरण दर्ज किए गए हैं।
यह कार्रवाई विशेष रूप से उन गिरोहों को निशाना बना रही है जो आम नागरिकों की पहचान संबंधी जानकारी का दुरुपयोग कर अवैध रूप से सिम कार्ड जारी करवाते हैं और इनका इस्तेमाल साइबर धोखाधड़ी, वित्तीय अपराधों और अन्य अवैध गतिविधियों में किया जाता है। ऑपरेशन में तकनीकी विश्लेषण और साइबर अपराधों से जुड़े डेटा का गहन अध्ययन शामिल है, जिससे संदिग्ध सिम और उनके पीछे सक्रिय नेटवर्क तक प्रभावी ढंग से पहुंचा जा सके।
विभिन्न जिलों में कार्रवाई का विवरण
ऑपरेशन FAST 2.0 के तहत मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में पुलिस ने सराहनीय कदम उठाए हैं। ग्वालियर पुलिस ने फर्जी सिम जारी करने वाले विक्रेताओं के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए नौ प्रकरण दर्ज किए हैं। जांच में यह खुलासा हुआ कि आधार, फोटो और फिंगरप्रिंट का दुरुपयोग कर जारी किए गए इन फर्जी सिम्स का उपयोग विभिन्न राज्यों में साइबर फ्रॉड से जुड़े मामलों में किया जा रहा था। प्रारंभिक जांच में इन मामलों का संबंध लगभग 12.20 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड से सामने आया है।
इंदौर पुलिस ने भी एक बड़े फर्जी सिम नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है, जिसमें 151 संदिग्ध सिम्स की पहचान की गई है। इन सिम्स का उपयोग 212 साइबर धोखाधड़ी की शिकायतों में पाया गया। जांच के दौरान यह बात सामने आई कि जींस-पैंट की थोक बिक्री या फ्रेंचाइजी का झांसा देकर लोगों से ठगी की जाती थी और पैसों के लालच में सिम कार्ड आगे उपलब्ध कराए जाते थे। इस मामले में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।
राज्य साइबर सेल और अन्य जिलों की महत्वपूर्ण गिरफ्तारियां
राज्य साइबर सेल, जोन इंदौर ने ऑपरेशन FAST 2.0 के तहत एक ऐसे आरोपी को गिरफ्तार किया है, जिसने अन्य व्यक्तियों के आधार कार्ड पर अपने फोटो का उपयोग करके 101 सिम कार्ड फर्जी तरीके से एक्टिवेट कराए थे। आरोपी, जो एक POS एजेंट के रूप में सिम एक्टिवेशन का कार्य करता था, ग्राहकों के KYC दस्तावेजों का दुरुपयोग कर रहा था। वह लाइव फोटो के स्थान पर अपना या अन्य व्यक्तियों का फोटो अपलोड कर सिम जारी करता था। इस कृत्य के लिए आरोपी के विरुद्ध धोखाधड़ी और आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया है।
छतरपुर के थाना गढ़ीमलहरा पुलिस ने ग्राहकों के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर फर्जी सिम एक्टिवेट करने और उन्हें साइबर अपराधों में उपयोग के लिए उपलब्ध कराने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सतना पुलिस ने अवैध SIM पोर्टिंग और साइबर फ्रॉड गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनके पास से 20 से अधिक अवैध सिम की सप्लाई का खुलासा हुआ। इन दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किए जाने के बाद जेल भेज दिया गया है।
टीकमगढ़ पुलिस ने ऑनलाइन फ्रॉड और साइबर अपराधों के लिए सिम उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसी तरह, कटनी पुलिस ने एक POS एजेंट को गिरफ्तार किया है, जिसने दो व्यक्तियों के नाम पर फर्जी सिम जारी कर उन्हें अन्य व्यक्तियों को बेच दिया था। आरोपी के पास से 98 मोबाइल सिम, बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट मशीन और तीन मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। इस मामले में एक अन्य आरोपी की तलाश जारी है। थाना कुठला पुलिस ने भी आधार कार्ड और फिंगरप्रिंट का दुरुपयोग कर फर्जी सिम जारी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। झाबुआ पुलिस ने भी फर्जी दस्तावेज और बायोमेट्रिक का दुरुपयोग कर सिम एक्टिवेट करने वाले तीन POS संचालकों/एजेंटों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किए हैं, जिनमें से एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है।
KYC और बायोमेट्रिक के दुरुपयोग पर कड़ी निगरानी
मध्य प्रदेश पुलिस, ऑपरेशन FAST 2.0 के माध्यम से उन नेटवर्कों पर कड़ी नजर रख रही है, जो आम नागरिकों की पहचान दस्तावेजों और बायोमेट्रिक जानकारी का दुरुपयोग कर फर्जी सिम तैयार करवाते हैं। तकनीकी विश्लेषण के माध्यम से इन फर्जी सिम्स के उपयोग और उनसे जुड़े साइबर अपराधों की कड़ियों की जांच की जा रही है। पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे सिम जारी कराते समय e-KYC और बायोमेट्रिक प्रक्रिया में सावधानी बरतें, OTP और वेरिफिकेशन की पुष्टि स्वयं करें, अपने नाम पर जारी मोबाइल नंबरों की समय-समय पर जांच करें, अपनी पहचान संबंधी जानकारी या दस्तावेज किसी अनधिकृत व्यक्ति को न दें और अपनी पहचान पर किसी अन्य व्यक्ति को सिम जारी न कराएं। फर्जी सिम की पहचान, उनके स्रोत तक पहुंचने और साइबर अपराधों में इनके उपयोग से जुड़े नेटवर्क के विरुद्ध कार्रवाई मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा लगातार जारी है।
