भोपाल में नेपाल के प्राध्यापकों का प्रशिक्षण संपन्न, तकनीकी शिक्षा को मिलेगी नई दिशा
भोपाल स्थित एनआईटीटीटीआर में नेपाल के आठ विश्वविद्यालयों के 31 प्राध्यापकों ने पांच दिवसीय प्रशिक्षण में भाग लिया, जिसका उद्देश्य तकनीकी शिक्षा को अंतरराष्ट्रीय मानकों...

द क्लिफ न्यूज़ डेस्क | संवाददाता: डॉ. पीके पुरोहित
द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 5 नवंबर 2026
भोपाल स्थित राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (एनआईटीटीटीआर) में पांच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। एक से पांच नवंबर 2026 तक चले इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स और सिविल इंजीनियरिंग कार्यक्रमों के लिए आउटकम बेस्ड करिकुलम डेवलपमेंट (OBBD) के दूसरे चरण को आगे बढ़ाना था। इस कार्यक्रम का आयोजन नेपाल इंजीनियरिंग काउंसिल के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
इस प्रशिक्षण के दूसरे चरण में नेपाल के आठ प्रमुख विश्वविद्यालयों के कुल 31 प्राध्यापकों ने भाग लिया। पहले चरण में निर्धारित सैद्धांतिक आधारों को व्यावहारिक रूप देते हुए, प्रतिभागियों ने गहन सत्रों में हिस्सा लिया। उन्होंने कोर्स आउटकम्स की मैपिंग, प्रभावी लर्निंग मेथोडोलॉजीज का चयन और कैपस्टोन प्रोजेक्ट्स की रूपरेखा तैयार करने जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर कार्य किया। इसके अतिरिक्त, प्रतिभागियों ने प्रोजेक्ट्स के मूल्यांकन के लिए रूब्रिक्स विकसित करने और आउटकम असेसमेंट हेतु उच्च स्तरीय प्रश्न पत्र तैयार करने का कार्य भी सफलतापूर्वक पूरा किया।
तकनीकी शिक्षा को अंतरराष्ट्रीय मानकों पर लाने का प्रयास
एनआईटीटीटीआर भोपाल के निदेशक प्रो. सी. सी. त्रिपाठी और अकादमिक अधिष्ठाता डॉ. संजय अग्रवाल ने इस प्रशिक्षण पहल को क्षेत्रीय तकनीकी शिक्षा को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप सुदृढ़ करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने इस कार्यक्रम के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यह भारत और नेपाल के बीच शैक्षणिक सहयोग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
कार्यक्रम में नेपाल के त्रिभुवन विश्वविद्यालय, काठमांडू विश्वविद्यालय, पोखरा विश्वविद्यालय, पूर्वांचल विश्वविद्यालय, मनमोहन टेक्निकल कॉलेज, फार-वेस्टर्न विश्वविद्यालय, मिड-वेस्टर्न विश्वविद्यालय और लुम्बिनी विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि शामिल हुए। इस अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का कुशल संयोजन और संचालन एनआईटीटीटीआर भोपाल के संकाय सदस्यों प्रो. ए. एस. वालके, प्रो. एस. एस. केदार, डॉ. आर. के. दीक्षित और प्रो. चंचल मेहरा द्वारा किया गया।
