नर्मदापुरम: दशलक्षण पर्व पर उत्तम संयम धर्म की आराधना
नर्मदापुरम में दिगंबर जैन समाज ने दशलक्षण महापर्व के छठवें दिन उत्तम संयम धर्म की आराधना की। श्रद्धालुओं ने इंद्रियों और विचारों पर नियंत्रण का...

द क्लिफ न्यूज़ डेस्क | संवाददाता: मुकेश भदौरिया
द क्लिफ न्यूज़ | नर्मदापुरम | 21 सितंबर 2026
नर्मदापुरम में दिगंबर जैन समाज द्वारा आयोजित दशलक्षण पर्युषण महापर्व के छठवें दिन उत्तम संयम धर्म की श्रद्धापूर्वक आराधना की गई। इस अवसर पर स्थानीय जिनालयों में विशेष पूजा, अभिषेक और शांतिधारा जैसे धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन हुआ। धर्मसभा में उपस्थित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने संयम के महत्व को आत्मसात करने का संकल्प लिया।
वक्ताओं ने अपने प्रवचनों में स्पष्ट किया कि संयम का वास्तविक अर्थ केवल बाहरी इंद्रियों का निग्रह नहीं है, बल्कि मन, वचन और कर्म को पूर्णतः अनुशासित करना है। उन्होंने कहा कि विषय-वासनाओं पर नियंत्रण रखकर ही आत्मशांति और संतोष की प्राप्ति संभव है। क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे कषायों को नियंत्रित करना ही जीवन को धर्म और सदाचार की दिशा में अग्रसर करता है। यही संयम आत्मशुद्धि का आधार है और मोक्षमार्ग को प्रशस्त करता है, जैसा कि धर्मग्रंथों में बताया गया है।
संयम: आत्मशुद्धि और मोक्षमार्ग का आधार
कार्यक्रम में उपस्थित समाज के अध्यक्ष संतोष जैन ने कहा कि पर्युषण आत्मचिंतन का महापर्व है। उन्होंने वर्तमान भागदौड़ भरे जीवन में अपने खान-पान, व्यवहार और विचारों में संयम रखने की आवश्यकता पर बल दिया। उनके अनुसार, संयमित आचरण परिवार एवं समाज में शांति स्थापित करने के लिए अनिवार्य है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से दैनिक जीवन में संयम को अपनाने का आह्वान किया, क्योंकि यही वह मार्ग है जो व्यक्ति को आंतरिक शांति की ओर ले जाता है।
पर्युषण महापर्व के दौरान जिनालयों में सुबह से ही भक्तिमय वातावरण रहा। श्रद्धालुओं ने इस आयोजन को स्वयं के भीतर झांकने और सकारात्मक परिवर्तन लाने का माध्यम बताया। कई श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से उत्तम संयम धर्म की आराधना की और अपने जीवन में इसे उतारने का दृढ़ संकल्प लिया। उनका मानना था कि इंद्रियों और विचारों पर नियंत्रण रखकर ही जीवन को सदाचार के मार्ग पर आगे बढ़ाया जा सकता है।
आभार और आगामी कार्यक्रमों की आशा
कार्यक्रम के अंत में, समाज के सचिव आलोक जैन और प्रवक्ता अभिषेक जैन ने आयोजन में सहयोग देने वाले सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने समाज की सक्रिय भागीदारी की सराहना करते हुए आगामी कार्यक्रमों में भी इसी प्रकार उत्साह बनाए रखने का आग्रह किया। संपूर्ण आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष आध्यात्मिक उल्लास देखा गया, जो उत्तम संयम धर्म की महत्ता को दर्शाता है। जैन समाज इस पर्व के माध्यम से सामाजिक समरसता और व्यक्तिगत आध्यात्मिक उन्नति पर जोर देता है।
