मंदसौर: मिलावटी दूध की डेयरी सील, स्वास्थ्य संकट का खुलासा
मंदसौर जिले में मिलावटी दूध का कारोबार उजागर हुआ है। बरखेड़ा अम्बेका की एक डेयरी से हाइड्रोजन पेरोक्साइड सहित कई संदिग्ध सामग्रियां जब्त की गईं।...

गरोठ मंदसौर | संवाददाता: राजकुमार कोटवार
द क्लिफ न्यूज़ | 2 नवंबर 2026
मंदसौर जिले के गरोठ क्षेत्र में एक बार फिर मिलावटी दूध के गोरखधंधे का पर्दाफाश हुआ है। बरखेड़ा अम्बेका गांव स्थित एक डेयरी पर प्रशासन की औचक छापेमारी में भारी मात्रा में मिलावटी सामग्री के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक माने जाने वाले हाइड्रोजन पेरोक्साइड की बरामदगी ने स्थानीय निवासियों की सेहत पर मंडरा रहे गंभीर संकट को उजागर कर दिया है। इस कार्रवाई से जिले में दूध की आपूर्ति श्रृंखला में मिलावट की गहरी जड़ों पर सवाल उठ खड़े हुए हैं।
मुखबिर से मिली गुप्त सूचना के आधार पर, गरोठ एसडीएम राहुल चौहान ने नायब तहसीलदार जिनेंद्र निगम के साथ मिलकर बरखेड़ा अम्बेका गांव में संचालित एक डेयरी का निरीक्षण किया। छापेमारी के दौरान, डेयरी परिसर से लगभग एक किलोग्राम घी, दूध पाउडर, राइस ऑयल और किसानों से एकत्रित किया गया दूध जब्त किया गया। इसके अतिरिक्त, कई अन्य संदिग्ध सामग्रियां भी बरामद हुईं, जिनकी जांच की जा रही है। हालांकि, सबसे चिंताजनक सामग्री के तौर पर हाइड्रोजन पेरोक्साइड की मौजूदगी ने मिलावट के भयावह पैमाने को दर्शाया है।
डेयरी संचालक हिरासत में, जांच शुरू
सूचना मिलने पर गरोठ थाना प्रभारी बलवीर यादव अपने दल के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति को अपने नियंत्रण में लिया। पुलिस ने डेयरी के संचालक विनोद गुर्जर को तत्काल हिरासत में ले लिया है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी को बुलाकर जब्त की गई विभिन्न सामग्रियों के नमूने लिए गए हैं, जिन्हें प्रयोगशाला भेजा जाएगा। इन नमूनों की विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा कि किन-किन पदार्थों का इस्तेमाल मिलावट के लिए किया जा रहा था और वे कितने खतरनाक थे। गरोठ पुलिस ने आरोपी विनोद गुर्जर के खिलाफ भारतीय दंड विधान की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई प्रारंभ कर दी है।
जिले में पांचवां मामला, सप्लाई चेन पर संदेह
मंदसौर जिले में मिलावटी दूध के खिलाफ यह इस वर्ष की पांचवीं बड़ी कार्रवाई है। इससे पूर्व भी जिले की विभिन्न तहसीलों जैसे डूंगरखेड़ी, चचावदा पठारी, आमरा और कोटड़ा बुजुर्ग में इस तरह के मिलावट के मामलों का भंडाफोड़ हो चुका है। बरखेड़ा अम्बेका में सामने आया यह नया मामला इस बात की पुष्टि करता है कि मिलावटखोरों का संगठित गिरोह जिले के विभिन्न हिस्सों में सक्रिय है और इनका नेटवर्क काफी फैला हुआ है। जांच एजेंसियों को इस बात की प्रबल आशंका है कि इस विशेष डेयरी से तैयार किए गए नकली दूध की सप्लाई न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि शामगढ़, भानपुरा और गरोठ जैसी तहसीलों के दर्जनों गांवों तक भी की जा रही थी। ग्रामीण अंचलों में संचालित छोटी चाय की दुकानों तक भी यह मिलावटी दूध पहुंचने की संभावना है, जिससे आम उपभोक्ता अनजाने में ही गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों का सामना कर रहे हैं।
हाइड्रोजन पेरोक्साइड का प्रयोग: स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा
डेयरी से हाइड्रोजन पेरोक्साइड जैसे खतरनाक औद्योगिक रसायन की बरामदगी विशेष रूप से चिंता का विषय है। यह रसायन खाद्य पदार्थों में मिलावट के लिए उपयोग किया जाता है, जो मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, हाइड्रोजन पेरोक्साइड के सीधे संपर्क में आने से त्वचा और आंखों में गंभीर जलन हो सकती है। यदि इसे निगल लिया जाए, तो यह शरीर के आंतरिक अंगों को गंभीर क्षति पहुंचा सकता है। बच्चों और बुजुर्गों जैसे कमजोर प्रतिरक्षा वाले व्यक्तियों के लिए यह विशेष रूप से घातक साबित हो सकता है। इसका सेवन दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं जैसे गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल विकारों और अन्य गंभीर बीमारियों को जन्म दे सकता है।
जनमानस के स्वास्थ्य की चिंता, जिम्मेदारियों पर सवाल
इस प्रकार की कार्रवाई ने क्षेत्र में दूध की आपूर्ति श्रृंखला की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय निवासियों और जागरूक नागरिकों के मन में यह प्रश्न उठ रहा है कि क्या प्रशासन की यह छापेमारी केवल कुछ संचालकों को पकड़ने तक सीमित रहेगी, या फिर इस पूरे संगठित गिरोह की जड़ों तक पहुंचकर इसे पूरी तरह से समाप्त किया जाएगा। कई लोगों का मानना है कि यदि यह मिलावट का कारोबार लंबे समय से चल रहा था, तो खाद्य विभाग और स्थानीय प्रशासन के अन्य जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी भनक क्यों नहीं लगी? इस पूरे मामले की गहन जांच होनी चाहिए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। प्रशासन को अब केवल डेयरी संचालकों पर कार्रवाई करने के बजाय, दूध सप्लाई करने वाले बिचौलियों और उन दुकानों की भी गहन जांच करनी चाहिए जहां यह मिलावटी दूध बेचा जा रहा था। इससे आम जनता के स्वास्थ्य के साथ होने वाले इस खिलवाड़ को प्रभावी ढंग से रोका जा सकेगा। अंतिम जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि इस 'ज़हरीले' दूध ने कितने लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित किया है।
