बरेली: जनसुनवाई में लापरवाही पर तीन पुलिसकर्मी निलंबित
बरेली के एसएसपी अनुराग आर्य ने सीबीगंज थाने के थानाध्यक्ष सहित तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। पीड़िता की शिकायत पर एफआईआर दर्ज न...

बरेली उत्तर प्रदेश | संवाददाता: इज़हार आलम
द क्लिफ न्यूज़ | बरेली | 2 नवंबर 2026
बरेली में जनशिकायतों के निस्तारण में गंभीर लापरवाही बरतने और पीड़ित महिला की शिकायत पर तत्काल एफआईआर दर्ज न करने के मामले में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) अनुराग आर्य ने एक बड़ी कार्रवाई की है। एसएसपी ने सीबीगंज थाने के थानाध्यक्ष उपनिरीक्षक विनोद सिंह, वरिष्ठ उपनिरीक्षक जितेंद्र कुमार और उपनिरीक्षक अश्वनी शर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इन तीनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच के भी आदेश जारी किए गए हैं।
यह मामला तब प्रकाश में आया जब सीबीगंज थाना क्षेत्र की एक महिला पीड़िता ने 27 अक्टूबर 2026 को थाने पहुंचकर अपनी शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप है कि पुलिस ने प्रारंभिक तौर पर इस मामले में कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की। इसके बाद, 29 अक्टूबर को पुलिस कार्यालय से स्पष्ट निर्देश जारी होने के बावजूद, पीड़िता के सिर में गंभीर चोट होने जैसी स्थिति में भी प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। पुलिसकर्मियों की इस कार्यशैली को जनसुनवाई के प्रति गहरी उदासीनता और पदीय दायित्वों के घोर उल्लंघन के रूप में देखा जा रहा है।
जनसुनवाई की समीक्षा और सख्त निर्देश
एसएसपी अनुराग आर्य ने 28 अक्टूबर 2026 को पुलिस कार्यालय में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की थी। इस बैठक में उन्होंने विभिन्न थानों में प्राप्त शिकायतों के निस्तारण की प्रगति की गहन समीक्षा की थी। बैठक के दौरान, एसएसपी ने सभी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि जनसुनवाई को अत्यंत गंभीरता से लिया जाए और शिकायतों के निस्तारण में किसी भी स्तर पर कोई भी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके बावजूद, सीबीगंज थाने में सामने आई इस घोर लापरवाही पर एसएसपी ने कड़ा रुख अपनाते हुए तत्काल निलंबन की कार्रवाई की है।
जवाबदेही सुनिश्चित करने का संदेश
एसएसपी अनुराग आर्य की इस कार्रवाई को पुलिस महकमे में जनशिकायतों के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। यह घटना इस बात की ओर इशारा करती है कि पुलिसकर्मियों द्वारा पीड़ितों की शिकायतों को नजरअंदाज करना या उन पर समय पर कार्रवाई न करना अब भारी पड़ सकता है। इस कार्रवाई से उम्मीद की जा रही है कि पुलिसकर्मियों में फरियादियों के प्रति संवेदनशीलता बढ़ेगी और वे अपने कर्तव्यों का अधिक तत्परता से निर्वहन करेंगे।
