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कलाई के हुक ऑफ हैमेट फ्रैक्चर को न करें नजरअंदाज: जानें लक्षण और उपचार

कलाई की हैमेट हड्डी के हुक में होने वाला फ्रैक्चर, हुक ऑफ हैमेट फ्रैक्चर, गंभीर दर्द और पकड़ की ताकत में कमी का कारण बन सकता है। समय पर पहचान और उचित उपचार आवश्यक है।

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कलाई के हुक ऑफ हैमेट फ्रैक्चर को न करें नजरअंदाज: जानें लक्षण और उपचार

द क्लिफ न्यूज़ | 25 सितंबर 2026

कलाई के छोटे से दिखने वाले दर्द को अक्सर लोग सामान्य चोट समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यह लापरवाही कलाई की हैमेट हड्डी के हुक में होने वाले फ्रैक्चर, जिसे 'हुक ऑफ हैमेट फ्रैक्चर' कहा जाता है, का कारण बन सकती है। यह फ्रैक्चर, जो हैमेट हड्डी के 'हैम्युलस' नामक हिस्से में होता है, कलाई की पकड़ और कई महत्वपूर्ण तंत्रिकाओं तथा टेंडन के लिए चिकित्सकीय रूप से महत्वपूर्ण है। इसके लक्षणों को पहचानना और समय पर उचित उपचार प्राप्त करना अत्यंत आवश्यक है, ताकि गंभीर जटिलताओं से बचा जा सके।

हैमेट कलाई की आठ कार्पल हड्डियों में से एक है और इसका हुक हथेली के छोटी उंगली की तरफ (अलनर-वोलर) और हथेली की ओर स्थित होता है। यह संरचना हाथों की पकड़ की मजबूती और दैनिक गतिविधियों में अहम भूमिका निभाती है। इस खास हिस्से में चोट लगने या फ्रैक्चर होने पर कलाई के उस विशेष भाग पर गंभीर दर्द हो सकता है, जो अक्सर आम कलाई दर्द से भिन्न होता है।

खेलों में बढ़ जाता है जोखिम

हुक ऑफ हैमेट फ्रैक्चर का एक प्रमुख कारण हथेली के निचले हिस्से, यानी हाइपोथेनर क्षेत्र पर सीधी चोट लगना है। हालांकि, गोल्फ, बेसबॉल, हॉकी और रैकेट वाले खेलों में इसका जोखिम काफी बढ़ जाता है। इन खेलों में बार-बार क्लब, बैट या रैकेट के हैंडल का हैमेट के हुक वाले हिस्से पर दबाव पड़ना, धीरे-धीरे चोट या फ्रैक्चर का कारण बन सकता है। लगातार पड़ने वाला यह दबाव हड्डी पर सूक्ष्म दरारें डाल सकता है, जो अंततः फ्रैक्चर में तब्दील हो जाती हैं।

क्या हैं प्रमुख लक्षण?

हुक ऑफ हैमेट फ्रैक्चर के लक्षणों में कलाई के छोटी उंगली की तरफ और हथेली के निचले हिस्से में तेज दर्द शामिल है। यह दर्द हैमेट के हुक पर दबाव पड़ने से और बढ़ जाता है। इसके अलावा, मुट्ठी बंद करने या किसी वस्तु को मजबूती से पकड़ने में अत्यधिक तकलीफ महसूस होती है, जिससे पकड़ की ताकत कम हो जाती है। बैट, क्लब या रैकेट जैसी वस्तुएं पकड़ते समय दर्द का बढ़ना भी एक विशिष्ट लक्षण है। कुछ मामलों में, चौथी और पांचवीं उंगली में झुनझुनी या सुन्नपन की अनुभूति भी हो सकती है, जो अल्नर नर्व पर दबाव का संकेत हो सकता है।

पहचान की चुनौतियां और निदान

इस तरह के फ्रैक्चर की पहचान करना कभी-कभी चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि सामान्य कलाई के एक्स-रे में हुक ऑफ हैमेट फ्रैक्चर अक्सर दिखाई नहीं देता। चिकित्सक कुछ विशेष परीक्षणों का सहारा ले सकते हैं, जैसे कि हुक ऑफ हैमेट पुल टेस्ट, जिसमें रिंग और छोटी उंगली को मोड़ने के लिए प्रतिरोध के विरुद्ध प्रयास कराया जाता है। यदि इस दौरान दर्द बढ़ता है, तो हुक ऑफ हैमेट की चोट का संदेह प्रबल हो जाता है।

यदि संदेह बना रहता है और एक्स-रे सामान्य आता है, तो सीटी स्कैन (CT Scan) फ्रैक्चर की स्थिति, हड्डी के टुकड़े और उनके विस्थापन को बेहतर ढंग से देखने के लिए अधिक उपयोगी साबित होता है। आसपास के कोमल ऊतकों (सॉफ्ट टिश्यू) या टेंडन में चोट की आशंका होने पर एमआरआई (MRI) भी की जा सकती है, जो सटीक निदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

उपचार के विकल्प

हुक ऑफ हैमेट फ्रैक्चर का उपचार फ्रैक्चर की प्रकृति, हड्डी के विस्थापन की मात्रा और लक्षणों की गंभीरता पर निर्भर करता है। हाल ही में हुए और बिना खिसके फ्रैक्चर के मामलों में, कलाई और हाथ को स्प्लिंट या कास्ट के माध्यम से स्थिर रखने की सलाह दी जाती है। इसके साथ ही, भारी वस्तुएं पकड़ने से बचने और खेल गतिविधियों को कुछ समय के लिए रोकने की हिदायत दी जाती है। नियमित रूप से चिकित्सकीय और रेडियोलॉजिकल फॉलो-अप द्वारा हड्डी के जुड़ने की प्रक्रिया पर नजर रखी जाती है।

यदि फ्रैक्चर खिसक गया हो या हड्डी के ठीक से न जुड़ पाने (नॉन-यूनियन) के कारण लगातार दर्द बना रहे, तो सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है। ऐसे मामलों में, लक्षण वाले नॉन-यूनियन की स्थिति में हुक के टूटे हुए हिस्से को निकालना एक विकल्प हो सकता है। वहीं, कुछ विशिष्ट परिस्थितियों में, खासकर जब हुक के बड़े और स्वस्थ हिस्से को बचाना महत्वपूर्ण हो या कलाई में अस्थिरता हो, तो ओपन रिडक्शन और इंटरनल फिक्सेशन (ORIF) जैसी सर्जरी की जाती है।

दीर्घकालिक जटिलताओं से बचाव

समय पर पहचान और उचित उपचार न मिलने की स्थिति में दीर्घकालिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इनमें लंबे समय तक बने रहने वाले नॉन-यूनियन, अल्नर-साइड (छोटी उंगली की तरफ) कलाई में लगातार दर्द, अल्नर नर्व पर दबाव पड़ने से संबंधित समस्याएं, फ्लेक्सर टेंडन में जलन या क्षति, और पकड़ की ताकत में कमी शामिल हैं। विशेष रूप से खिलाड़ियों के लिए, ये समस्याएं उनके खेल प्रदर्शन को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती हैं। इसलिए, खेल के दौरान या सामान्य दैनिक गतिविधियों में हथेली की तरफ कलाई में लगातार दर्द, पकड़ बनाने में असहजता या उंगलियों में झुनझुनी को सामान्य चोट मानकर नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। ऐसी किसी भी स्थिति में तत्काल चिकित्सकीय सलाह लेना ही समझदारी है।