जौरा में गांधी जयंती पर गूंजा अहिंसा और ग्राम स्वराज का संदेश
जौरा स्थित महात्मा गांधी सेवा आश्रम में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर सर्वधर्म प्रार्थना और चरखा कताई का प्रदर्शन किया...

JOURA DISTRICT-MORENA | संवाददाता: दिनेश सिकरवार
द क्लिफ न्यूज़ | मुरैना | 2 अक्टूबर 2026
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के उपलक्ष्य में 2 अक्टूबर 2026 को मुरैना जिले के जौरा स्थित महात्मा गांधी सेवा आश्रम में अहिंसा, ग्राम स्वराज और सर्वधर्म समभाव के संदेशों को पुनः स्थापित करने के उद्देश्य से विविध गरिमापूर्ण कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस अवसर पर महात्मा गांधी के साथ-साथ पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री, गांधीवादी शांति दूत स्वर्गीय डॉ. एस.एन. सुब्बाराव ‘भाई जी’ और डॉ. रन सिंह के चित्रों पर सूत की मालाएं अर्पित कर श्रद्धाजंलि दी गई। इसके अतिरिक्त, भाई जी की समाधि पर पुष्पांजलि का कार्यक्रम भी संपन्न हुआ, जिसने इस पवित्र भूमि पर उनके कार्यों और योगदान को स्मरण कराया।
कार्यक्रम का संचालन आश्रम के सचिव दिलीप जैन ने कुशलतापूर्वक किया। सर्वधर्म प्रार्थना सभा का आयोजन विशेष आकर्षण का केंद्र रहा, जहाँ 'रघुपति राघव राजा राम' और 'ईश्वर अल्लाह तेरो नाम' जैसे भजनों का सामूहिक गायन कर सत्य, अहिंसा और सर्वधर्म समभाव के सार्वभौमिक मूल्यों पर जोर दिया गया। इस प्रार्थना सभा के माध्यम से उपस्थित नागरिकों ने न केवल विश्व शांति की कामना की, बल्कि सभी के सुखी एवं समृद्ध जीवन के लिए भी प्रार्थना की, जो गांधीवादी विचारधारा का मूल तत्व है।
गांधीवादी आदर्शों की प्रासंगिकता पर जोर
जौरा एक्सीलेंस विद्यालय के प्राचार्य मुन्नालाल यादव ने अपने संबोधन में महात्मा गांधी के जीवन को आज के समाज के लिए एक अमूल्य प्रेरणा स्रोत बताया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि सत्य, अहिंसा और नैतिकता पर आधारित गांधीजी की जीवनशैली आज भी उतनी ही प्रासंगिक है, जितनी उनके समय में थी। यह दर्शाता है कि उनके सिद्धांत किसी विशेष कालखंड तक सीमित नहीं, बल्कि शाश्वत हैं।
इस अवसर पर उत्तराखंड से पधारे पूर्व कुलपति डॉ. धीरेन्द्र शर्मा ने जौरा को भाई जी की तपोस्थली के रूप में रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह भूमि सामाजिक परिवर्तन और रचनात्मक कार्यों की एक महत्वपूर्ण साक्षी रही है। डॉ. शर्मा ने एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया कि अहिंसा के महत्व को गहराई से समझने और अगली पीढ़ी में इसके प्रति जागरूकता फैलाने के लिए गांधीवादी आदर्शों को स्कूली पाठ्यक्रम में प्रमुखता से शामिल किया जाना चाहिए। यह सुझाव शिक्षा प्रणाली के माध्यम से सामाजिक मूल्यों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम हो सकता है।
ग्राम स्वराज और श्रम की गरिमा
वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. जगदीश शुक्ला ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि गांधी जी ने सत्य और अहिंसा जैसे अहिंसक हथियारों के बल पर शक्तिशाली ब्रिटिश साम्राज्य को चुनौती देने का असाधारण साहस दिखाया। उन्होंने ग्राम स्वराज और स्वावलंबन को गांधीवादी दर्शन के आधार स्तंभों के रूप में परिभाषित किया, जो स्थानीय स्वशासन और आत्मनिर्भरता पर बल देते हैं। यह दर्शाता है कि गांधीजी केवल राजनीतिक स्वतंत्रता ही नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक स्वतंत्रता के भी प्रबल समर्थक थे।
पूर्व विधायक महेश दत्त मिश्रा ने लाल बहादुर शास्त्री और महात्मा गांधी के जीवन से जुड़े प्रसंगों को साझा करते हुए श्रम की गरिमा पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने स्पष्ट किया कि चरखा केवल वस्त्र निर्माण का एक उपकरण मात्र नहीं है, बल्कि यह आत्मनिर्भरता, आर्थिक स्वतंत्रता और श्रम के सम्मान का एक शक्तिशाली प्रतीक है। यह संदेश आज के उपभोक्तावादी समाज में श्रम के महत्व को पुनः स्थापित करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
नई पीढ़ी से गांधीवादी विचारों को अपनाने का आह्वान
इस विशेष आयोजन के दौरान आश्रम के संयुक्त सचिव प्रफुल्ल श्रीवास्तव ने स्वयं चरखे पर सूत कातकर खादी के महत्व और उसके आर्थिक-सामाजिक प्रभावों को प्रत्यक्ष रूप से प्रदर्शित किया। यह प्रदर्शन खादी के पुनरुत्थान और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में एक प्रेरणा का स्रोत बना। कार्यक्रम में डॉ. राजगोपाल पी.वी. का एक महत्वपूर्ण संदेश भी पढ़ा गया, जिसमें उन्होंने नई पीढ़ी से गांधी जी के विचारों और सिद्धांतों को केवल स्मरण करने के बजाय अपने दैनिक जीवन में व्यवहार में उतारने का सशक्त आह्वान किया।
भाई जी बाल मंदिर इंग्लिश मीडियम स्कूल के विद्यार्थियों, शिक्षकों और स्थानीय नागरिकों ने इस आयोजन में अत्यंत उत्साहपूर्वक भाग लिया। बच्चों को विशेष रूप से गांधी जी के जीवन मूल्यों, स्वच्छता के महत्व और अहिंसा के सिद्धांतों के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई, ताकि वे इन महान आदर्शों को आत्मसात कर सकें। कार्यक्रम के अंत में, भाई जी बाल मंदिर के संचालक जिम्मी जार्ज ने सभी उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों, प्रतिभागियों और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर हाजी साकिर हमीद भाई, लक्ष्मीनारायण शर्मा, कुलदीप तिवारी, नरेश शाक्य, सुधांशु मुदगल, संजय सिंह जादौन, मुनेश सिंह जाटव, महेंद्र सिंह जादौन और एडवोकेट दिनेश सिंह सिकरवार सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। संपूर्ण वातावरण गांधीवादी विचारों की सार्थकता और उनके द्वारा दिखाए गए सत्य एवं अहिंसा के मार्ग के प्रति गहरी प्रतिबद्धता से ओत-प्रोत नजर आया। आश्रम परिसर में आयोजित यह कार्यक्रम राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के दर्शन को जन-जन तक पहुंचाने और उन्हें व्यवहार में लाने के एक महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में सफल सिद्ध हुआ।
