इंदौर की झांकियों पर विशेष डाक टिकट की मांग, PM को लिखा पत्र
भाजपा नेता शैलेन्द्र महाजन ने इंदौर की 100 वर्ष पुरानी अनंत चतुर्दशी झांकियों पर विशेष डाक टिकट जारी करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और...

Indore | संवाददाता: आशीष नेमा
द क्लिफ न्यूज़ | इंदौर | 22 सितंबर 2026
इंदौर की अनंत चतुर्दशी पर निकलने वाली जीवंत और कलात्मक झांकियों की सदियों पुरानी परंपरा को अब एक विशेष डाक टिकट के माध्यम से राष्ट्रीय और वैश्विक पहचान दिलाने की मांग उठी है। भाजपा नेता शैलेन्द्र महाजन ने इस महत्वपूर्ण सांस्कृतिक धरोहर को सम्मानित करने हेतु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय संचार, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया को पत्र लिखा है।
महाजन ने अपने पत्र में तर्क दिया है कि इंदौर की झांकियां केवल एक धार्मिक उत्सव का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि यह सौ वर्षों से अधिक पुरानी सांस्कृतिक परंपरा और कलात्मकता का प्रतीक हैं। यह आयोजन होलकर शासनकाल में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के आह्वान पर गणेश उत्सव को सार्वजनिक स्वरूप देने के साथ आरंभ हुआ था। आज भी, कपड़ा मिलों के बंद होने के बावजूद, मालवा मिल, भंडारी मिल और स्वदेशी मिल जैसी संस्थाएं इस परंपरा को जीवित रखे हुए हैं।
कलात्मक विरासत को मिलेगा सम्मान
इन झांकियों का निर्माण एक श्रमसाध्य प्रक्रिया है, जिसमें स्थानीय कलाकार महीनों तक अथक परिश्रम करते हैं। रूपचंद पंजाबी और मिश्रीलाल वर्मा जैसे दिग्गज कलाकारों की विरासत को आगे बढ़ाने वाले कलाकार पच्चीस से तीस फीट ऊंची चलित झांकियों को विज्ञान, धर्म और राष्ट्रप्रेम के संदेशों के साथ साकार करते हैं। इन झांकियों के निर्माण में लाखों रुपये का व्यय आता है, जो शहर की कलात्मक क्षमता और सांस्कृतिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
वैश्विक पहचान और पर्यटन को बढ़ावा
भाजपा नेता ने यह भी रेखांकित किया कि भारतीय डाक विभाग ने पूर्व में महाकाल लोक और राम मंदिर जैसी महत्वपूर्ण धरोहरों के साथ-साथ देवी अहिल्याबाई होलकर जैसी विभूतियों पर भी डाक टिकट जारी किए हैं। उनका मानना है कि इंदौर की झांकी परंपरा, जो शहर की एक अनूठी पहचान है, को अभी तक वह उचित सम्मान नहीं मिला है। डाक टिकट जारी होने से न केवल इन समर्पित कलाकारों का उत्साहवर्धन होगा, बल्कि देश-विदेश में इंदौर की इस विशिष्ट सांस्कृतिक विरासत का प्रचार-प्रसार भी बढ़ेगा। इससे शहर में पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद है और यह कदम इंदौर की कलात्मक पहचान को इतिहास के पन्नों में स्थायी रूप से दर्ज करने में सहायक सिद्ध होगा।
