भिंड कलेक्टर ने जनसुनवाई में सुनीं समस्याएं, दिव्यांग को मौके पर मिली बैसाखी
भिंड में जनसुनवाई में कलेक्टर ने 72 से अधिक आवेदन सुने। एक दिव्यांग को मौके पर बैसाखी मिली। गंभीर बीमारियों, बिजली बिल, पेंशन, अवैध कब्जे...

भिण्ड | संवाददाता: दीपेंद्र बौहरे
द क्लिफ न्यूज़ | 22 सितंबर 2026
भिंड कलेक्ट्रेट कार्यालय में आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई के दौरान कलेक्टर किरोड़ीलाल मीणा ने आमजन की समस्याओं को गंभीरता से सुना और उनके तत्काल, समयबद्ध तथा गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के लिए संबंधित अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए। इस अवसर पर अपर कलेक्टर एल.के. पाण्डेय, राजन बी नाडिया और डिप्टी कलेक्टर अखिलेश शर्मा भी उपस्थित रहे और उन्होंने आवेदकों की समस्याओं पर विचार-विमर्श किया।
जनसुनवाई में कुल 72 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें विभिन्न विभागों से जुड़ी शिकायतें शामिल थीं। कलेक्टर मीणा ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे प्राप्त आवेदनों पर तत्काल कार्यवाही सुनिश्चित करें। उन्होंने विशेष रूप से ग्राम अमलेड़ी निवासी श्रीमती राधा राजावत की बैसाखी के लिए की गई मांग पर संज्ञान लिया। सामाजिक न्याय विभाग के अधिकारियों को तुरंत निर्देश जारी किए गए, जिसके फलस्वरूप आवेदिका को जनसुनवाई के दौरान ही बैसाखी प्रदान कर दी गई। यह तत्परता आमजन को राहत पहुंचाने की दिशा में प्रशासन की प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जहाँ तात्कालिक आवश्यकताओं को प्राथमिकता दी गई।
विभिन्न विभागों से जुड़ी शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई के निर्देश
कलेक्टर किरोड़ीलाल मीणा ने जनसुनवाई के दौरान प्राप्त विभिन्न प्रकार की जनशिकायतों पर गहरी संवेदनशीलता दिखाई। इनमें गंभीर बीमारियों के इलाज हेतु सहायता की मांग, विद्युत बिलों में सुधार की आवश्यकता, खराब हैंडपंपों के संधारण, पेंशन संबंधी लंबित मामले, सड़क दुर्घटनाओं के बाद मिलने वाली सहायता, हितग्राही मूलक योजनाओं से संबंधित आवेदन, बीपीएल राशन कार्ड जारी करने की प्रक्रिया और जमीन पर हुए अवैध कब्जों को हटाने जैसे मुद्दे शामिल थे। इन सभी प्रकरणों पर कलेक्टर ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को अविलंब और प्रभावी कार्रवाई करने के स्पष्ट आदेश जारी किए।
यह सुनिश्चित किया गया कि जनसुनवाई केवल एक औपचारिकता बनकर न रह जाए, बल्कि शिकायतों का वास्तविक और संतुष्टिपूर्ण समाधान हो। कलेक्टर मीणा ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि प्रत्येक शिकायत के निस्तारण के उपरांत, संबंधित आवेदकों को की गई कार्यवाही से विस्तृत रूप से अवगत कराया जाए। इस पारदर्शिता का मुख्य उद्देश्य आवेदकों को बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने से बचाना और उन्हें अपनी समस्याओं के समाधान की स्थिति से सीधे अवगत कराना था।
प्रशासन की ओर से प्राप्त सभी आवेदनों को एक व्यवस्थित प्रणाली के तहत दर्ज किया गया है। इन आवेदनों के प्रभावी और समय पर निराकरण के लिए संबंधित अधिकारियों को विधिवत जिम्मेदारी सौंपी गई है। जनसुनवाई का आयोजन इसी मंशा के साथ किया गया था कि आमजन की समस्याओं को सुना जाए और उनका समाधान प्राथमिकता के आधार पर सुनिश्चित हो, ताकि उन्हें न्याय मिले और वे अपने दैनिक जीवन की कठिनाइयों से उबर सकें। अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया गया कि वे आवेदक केंद्रित दृष्टिकोण अपनाएं और उनकी समस्याओं को मानवीय दृष्टिकोण से देखें।
