बलरामपुर में 65 हजार टन कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण को करोड़ों की मंजूरी
बलरामपुर नगर पालिका परिषद ने वर्षों से जमा 65 हजार मीट्रिक टन लिगेसी वेस्ट के निपटान के लिए दो करोड़ से अधिक की मशीनरी को...

बलरामपुर उत्तर प्रदेश | संवाददाता: अनिरुद्ध शुक्ल
द क्लिफ न्यूज़ | बलरामपुर | 2 अक्टूबर 2026
बलरामपुर नगर पालिका परिषद क्षेत्र में दशकों से जमा हो रहे लगभग 65,000 मीट्रिक टन पुराने कचरे, जिसे 'लिगेसी वेस्ट' कहा जाता है, के वैज्ञानिक निस्तारण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। प्रदेश सरकार ने इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए दो करोड़ 62 लाख 94 हजार रुपये की प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है। इस धनराशि से अत्याधुनिक प्रोसेसिंग मशीनरी की स्थापना की जाएगी, जो नगर में जमा कचरे के विशाल ढेर को वैज्ञानिक पद्धति से छांटकर, संसाधित करके और निस्तारित करके समस्या का स्थायी समाधान प्रस्तुत करेगी।
यह निर्णय नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. धीरेन्द्र प्रताप सिंह ‘धीरू’ के निरंतर प्रयासों का प्रतिफल है, जिन्हें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और नगर विकास मंत्री अरविंद कुमार शर्मा का महत्वपूर्ण मार्गदर्शन और सहयोग प्राप्त हुआ है। प्रस्तावित आधुनिक मशीनरी के माध्यम से कचरे के विभिन्न घटकों को अलग-अलग किया जाएगा और निर्धारित सरकारी नियमों के अनुसार उनका निपटान सुनिश्चित होगा। इस प्रक्रिया के पूरा होने से न केवल कचरा निस्तारण स्थलों पर जमा पुराने कचरे का बोझ कम होगा, बल्कि शहर की समग्र स्वच्छता व्यवस्था भी अधिक प्रभावी और सुदृढ़ बनेगी।
लिगेसी वेस्ट निस्तारण से स्वच्छता में सुधार का लक्ष्य
नगर पालिका प्रशासन का प्राथमिक लक्ष्य बलरामपुर को एक स्वच्छ, सुंदर और कूड़ा-मुक्त नगर के रूप में विकसित करना है। इस दिशा में लिगेसी वेस्ट का वैज्ञानिक निस्तारण एक मील का पत्थर साबित होगा। नगर पालिका अध्यक्ष डॉ. धीरेन्द्र प्रताप सिंह ‘धीरू’ ने इस वित्तीय स्वीकृति को वर्षों पुरानी समस्या का एक स्थायी समाधान बताते हुए कहा कि नागरिकों को बेहतर और स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराना नगर पालिका की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह परियोजना पूरी होने के उपरांत बलरामपुर की स्वच्छता व्यवस्था को एक नई दिशा मिलेगी और स्वच्छता के क्षेत्र में नगर की एक विशिष्ट पहचान स्थापित होगी। भविष्य में भी शहर के सौंदर्यीकरण और विकास के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य जारी रखने का संकल्प दोहराया गया है। यह पहल शहरी विकास और पर्यावरण प्रबंधन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।
