संविधान और लोकतंत्र को कमजोर कर रही भाजपा सरकार: महबूबा मुफ्ती का आरोप
चुनावी धांधली, बेरोजगारी और केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग पर उठाए सवाल, मताधिकार की रक्षा के लिए एकजुटता का आह्वान

द क्लिफ़ न्यूज़, नई दिल्ली।
नई दिल्ली के रामलीला मैदान में रविवार, 1 नवंबर 2026 को आयोजित ‘इंडिया’ गठबंधन की ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली में पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की प्रमुख एवं जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भाग लिया। उन्होंने विपक्ष के चुनावी पारदर्शिता और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े विरोध प्रदर्शन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
महबूबा मुफ्ती ने आरोप लगाया कि भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार देश के संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और निष्पक्षता लोकतंत्र की बुनियाद है। यदि इन संस्थाओं का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल होता है, तो नागरिकों के अधिकार और लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित होती है।
महबूबा मुफ्ती ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि चुनावों से पहले ही परिणामों को प्रभावित करने की कोशिशें की जा रही हैं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों का उल्लेख करते हुए मतदाता सूचियों की पारदर्शिता और प्रत्येक पात्र नागरिक के मतदान अधिकार की सुरक्षा को आवश्यक बताया।
उन्होंने देश में बढ़ती बेरोजगारी को भी गंभीर समस्या बताया। साथ ही आरोप लगाया कि प्रवर्तन निदेशालय सहित केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं पर राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है। उनके अनुसार, लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करना प्रत्येक नागरिक और राजनीतिक दल का संवैधानिक अधिकार है।
जम्मू-कश्मीर की परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए मुफ्ती ने वर्ष 2019 के बाद हुए संवैधानिक और राजनीतिक बदलावों पर चिंता जताई। उन्होंने नागरिक अधिकारों और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि संविधान की रक्षा केवल राजनीतिक दलों की नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
महारैली में जुटे समर्थकों की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताते हुए महबूबा मुफ्ती ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के प्रति जनता की बढ़ती जागरूकता से जोड़ा। उन्होंने संविधान, मताधिकार और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए व्यापक एकजुटता की आवश्यकता पर बल दिया।
