फीमर के दोहरे फ्रैक्चर में डीवीटी और पल्मोनरी एम्बोलिज्म का जानलेवा खतरा
डीवीटी ऐसी स्थिति है, जिसमें पैर की गहरी नसों में रक्त का थक्का बन जाता है।

गंभीर सड़क दुर्घटनाओं या ऊँचाई से गिरने जैसी उच्च ऊर्जा वाली चोटों में जब एक ही पैर की जांघ की हड्डी के ऊपरी हिस्से (Femoral Neck) और मुख्य शाफ्ट (Femoral Shaft) दोनों में फ्रैक्चर हो जाता है, तो मरीज के सामने हड्डियों को जोड़ने के अलावा कई गंभीर चिकित्सकीय चुनौतियाँ उत्पन्न होती हैं। इनमें डीप वेन थ्रॉम्बोसिस (DVT) और पल्मोनरी एम्बोलिज्म (PE) विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। दोनों फ्रैक्चर एक साथ होने पर व्यापक ऊतक क्षति, बड़ी सर्जरी और लंबे समय तक गतिहीनता के कारण रक्त के थक्के बनने का खतरा बढ़ सकता है।
डीवीटी ऐसी स्थिति है, जिसमें पैर की गहरी नसों में रक्त का थक्का बन जाता है। यदि इस थक्के का कोई हिस्सा टूटकर रक्तप्रवाह के माध्यम से फेफड़ों की धमनियों में पहुँच जाए, तो पल्मोनरी एम्बोलिज्म विकसित हो सकता है। गंभीर मामलों में फेफड़ों में रक्तप्रवाह बाधित होने से ऑक्सीजन की कमी, रक्तचाप में गिरावट, हृदय पर दबाव और अचानक मृत्यु तक हो सकती है।
उच्च ऊर्जा वाली चोट के दौरान रक्तवाहिकाओं की अंदरूनी परत क्षतिग्रस्त हो सकती है। आसपास की मांसपेशियों में रक्तस्राव, सूजन और शरीर की सूजन संबंधी प्रतिक्रिया रक्त जमने की प्रक्रिया को सक्रिय करती है। इसके अतिरिक्त इंट्रामेडुलरी नेलिंग जैसी सर्जरी, लंबे समय तक बिस्तर पर रहना और पैर की मांसपेशियों की गतिविधि कम होना जोखिम बढ़ाते हैं। निर्जलीकरण तथा अन्य चिकित्सकीय समस्याएँ इस स्थिति को और जटिल बना सकती हैं।
डीवीटी अथवा पल्मोनरी एम्बोलिज्म विकसित होने का कोई निश्चित पोस्टऑपरेटिव दिन नहीं होता। दुर्घटना के शुरुआती 24–48 घंटों में भी थक्का बन सकता है। ऑपरेशन के दूसरे से सातवें दिन तक विशेष निगरानी आवश्यक है। इसके अतिरिक्त अगले दो से छह सप्ताह तक, विशेषकर कम चलने-फिरने वाले मरीजों में, खतरा बना रह सकता है। कुछ मरीजों में डीवीटी बिना स्पष्ट लक्षणों के भी विकसित हो सकता है।
डीवीटी के प्रमुख संकेतों में एक पैर की पिंडली अथवा जांघ में असामान्य सूजन, दर्द, गर्माहट और लालिमा शामिल हैं। दूसरी ओर अचानक साँस फूलना, ऑक्सीजन सैचुरेशन कम होना, हृदय गति बढ़ना, छाती में दर्द, चक्कर या बेहोशी पल्मोनरी एम्बोलिज्म की चेतावनी हो सकते हैं। रक्तचाप गिरने और शॉक की स्थिति में तत्काल आपातकालीन चिकित्सा आवश्यक है।
डीवीटी की पुष्टि के लिए कम्प्रेशन डुप्लेक्स वेनस अल्ट्रासाउंड उपयोगी है। स्थिर मरीजों में पल्मोनरी एम्बोलिज्म की जाँच के लिए सीटी पल्मोनरी एंजियोग्राफी (CTPA) प्रमुख परीक्षण है। अस्थिर मरीजों में तत्काल पुनर्जीवन उपचार, बेडसाइड इकोकार्डियोग्राफी और विशेषज्ञ मूल्यांकन महत्वपूर्ण हैं। बड़े फ्रैक्चर एवं सर्जरी के बाद डी-डाइमर बढ़ सकता है, इसलिए केवल इसकी बढ़ी हुई मात्रा से थक्के की पुष्टि नहीं की जा सकती।
विशेष सावधानी तब आवश्यक है, जब ऑपरेशन के तीसरे दिन मरीज का रक्तचाप लगभग 90/60 mmHg, ऑक्सीजन सैचुरेशन 90–94 प्रतिशत और दूसरे पैर में अत्यधिक दर्द तथा तनावयुक्त सूजन हो। ऐसी स्थिति में पल्मोनरी एम्बोलिज्म, छिपे रक्तस्राव, फैट एम्बोलिज्म सिंड्रोम और कम्पार्टमेंट सिंड्रोम की तत्काल जाँच जरूरी है। सामान्य नाड़ी होने पर भी कम्पार्टमेंट सिंड्रोम की संभावना समाप्त नहीं होती। इसमें सर्जिकल मूल्यांकन और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल ऑपरेशन जीवन तथा अंग बचाने के लिए आवश्यक हो सकता है।
बचाव के लिए अस्पताल में भर्ती होते ही रक्त के थक्के और रक्तस्राव के जोखिम का मूल्यांकन करना चाहिए। उपयुक्त मरीजों में मैकेनिकल थ्रॉम्बोप्रोफिलैक्सिस तथा रक्तस्राव नियंत्रित होने पर चिकित्सकीय देखरेख में लो-मॉलिक्यूलर-वेट हेपेरिन जैसी दवाओं का उपयोग किया जाता है। स्पाइनल या एपिड्यूरल एनेस्थीसिया के बाद इन दवाओं का समय विशेष सावधानी से निर्धारित किया जाता है।
चिकित्सकीय अनुमति मिलने पर शीघ्र चलना-फिरना, टखनों के व्यायाम और नियमित निगरानी महत्वपूर्ण हैं। कुछ बड़ी हिप फ्रैक्चर सर्जरी में लगभग 28–35 दिनों तक थ्रॉम्बोप्रोफिलैक्सिस आवश्यक हो सकती है, लेकिन दोहरे फीमर फ्रैक्चर में अवधि व्यक्तिगत जोखिम के अनुसार निर्धारित होनी चाहिए। निष्कर्षतः समय पर पहचान, उचित रोकथाम और नए लक्षणों पर तत्काल उपचार से इन जानलेवा जटिलताओं का जोखिम कम किया जा सकता है।
