वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में 114 साल बाद चीतों की वापसी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 7 अक्टूबर 2026 को सागर के वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में बोत्सवाना से लाए गए एक नर और मादा चीते को विशेष बाड़े में छोड़ा।

द क्लिफ न्यूज़ | सागर | 8 अक्टूबर 2026
मध्य प्रदेश के वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में 114 से 116 साल के लंबे अंतराल के बाद चीतों की वापसी हुई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 7 अक्टूबर 2026 को बोत्सवाना से लाए गए एक नर और एक मादा चीते को रिजर्व के विशेष बाड़े में छोड़ा। इन चीतों का नामकरण 'व्योम' (नर) और 'नीरा' (मादा) के रूप में किया गया है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस ऐतिहासिक पल को मध्य प्रदेश के वन्यजीव संरक्षण और प्राकृतिक विरासत के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि करार दिया। उन्होंने कहा कि वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीतों का पुनर्वास बुंदेलखंड क्षेत्र में जैव-विविधता और वन्यजीव पर्यटन को एक नई दिशा प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री ने स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी के साथ संरक्षण और पर्यटन संबंधी गतिविधियों को आगे बढ़ाने पर भी बल दिया, ताकि इस पहल का अधिकतम लाभ स्थानीय लोगों तक पहुँच सके।
बुंदेलखंड में वन्यजीव संरक्षण को नई ऊर्जा
सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिलों में विस्तृत यह टाइगर रिजर्व, चीतों की वापसी के साथ बुंदेलखंड के वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक नया अध्याय लिख रहा है। उपलब्ध ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार, 1912 के बाद यह पहली बार है जब चीते बुंदेलखंड अंचल में लौटे हैं। इस वापसी को न केवल वन्यजीवों के लिए बल्कि इस क्षेत्र की पारिस्थितिकी के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐतिहासिक रूप से, चीतों का मध्य प्रदेश के जंगलों में विचरण रहा है, लेकिन समय के साथ उनकी आबादी में भारी गिरावट आई और वे विलुप्तप्राय हो गए। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में इन चीतों का पुनर्वास इस विलुप्तप्राय प्रजाति को फिर से स्थापित करने की दिशा में एक साहसिक कदम है। यह पहल क्षेत्र के वन्यजीव पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन को बहाल करने में भी सहायक हो सकती है।
पर्यटन और रोजगार के नए अवसर
चीतों की मौजूदगी से वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में वन्यजीव पर्यटन को महत्वपूर्ण बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे न केवल पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और आजीविका के नए अवसर भी सृजित होंगे। प्रशासन द्वारा रिजर्व में चीतों के संरक्षण और उनके लिए एक अनुकूल प्राकृतिक वातावरण बनाए रखने के लिए विशेष ध्यान देने की योजना है, ताकि वे सुरक्षित और स्वस्थ जीवन जी सकें। इसके तहत, चीतों की निगरानी, उनके शिकार के लिए पर्याप्त शाकाहारी वन्यजीवों की उपलब्धता सुनिश्चित करना और किसी भी प्रकार के मानवीय हस्तक्षेप को कम करने जैसे कदम उठाए जाएंगे।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, चीतों के लिए सुरक्षित गलियारे विकसित किए जाएंगे और स्थानीय समुदायों को संरक्षण प्रयासों में शामिल करने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। इन चीतों के सफल पुनर्वास से न केवल बुंदेलखंड का गौरव बढ़ेगा, बल्कि यह क्षेत्र वन्यजीव पर्यटन के नक्शे पर एक प्रमुख स्थान हासिल करेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस बात पर भी जोर दिया कि चीतों के आने से क्षेत्र में एक सकारात्मक पारिस्थितिकीय संदेश जाएगा, जो अन्य वन्यजीवों के संरक्षण के प्रति भी लोगों को प्रेरित करेगा। यह परियोजना भारत की चीता पुनर्वास योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो देश भर में चीतों की आबादी को बढ़ाने का लक्ष्य रखती है।
