श्रावस्ती में आयुर्वेद दिवस का भव्य आयोजन, पूर्व सांसद ने किया शुभारंभ
श्रावस्ती में आयुष विभाग द्वारा आयुर्वेद दिवस का आयोजन किया गया, जिसमें पूर्व सांसद दद्दन मिश्र मुख्य अतिथि रहे। उन्होंने आयुर्वेद के लाभ बताए और...

बलरामपुर उत्तर प्रदेश | संवाददाता: अनिरुद्ध प्रताप शुक्ल
द क्लिफ न्यूज़ | बलरामपुर | 23 सितंबर 2026
श्रावस्ती जनपद में बुधवार को आयुर्वेद दिवस का आयोजन उत्साहपूर्वक संपन्न हुआ। आयुष विभाग द्वारा भिनगा स्थित अलक्षेन्द्र इंटर कॉलेज परिसर में आयोजित इस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर पूर्व सांसद एवं जिला पंचायत अध्यक्ष दद्दन मिश्र ने शिरकत की। उन्होंने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया।
इस अवसर पर श्री मिश्र ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए आयुर्वेद की प्राचीन परंपराओं और इसके स्वास्थ्य लाभों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आयुर्वेद केवल एक चिकित्सा पद्धति न होकर, जीवन जीने की एक उत्कृष्ट कला है जो शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को संतुलित रखती है। उन्होंने बताया कि कैसे आयुर्वेद अपने समग्र दृष्टिकोण से व्यक्ति के जीवन की गुणवत्ता में सुधार कर सकता है, केवल रोगों के उपचार तक ही सीमित न रहकर, निवारक स्वास्थ्य देखभाल पर भी ध्यान केंद्रित करता है।
आयुर्वेद के महत्व और स्वस्थ जीवनशैली पर चर्चा
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न वक्ताओं ने आयुर्वेद की अमूल्य परंपराओं, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की आवश्यकता तथा पर्यावरण संरक्षण में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका पर विस्तृत चर्चा की। वक्ताओं ने युवाओं को आधुनिक जीवनशैली के दुष्प्रभावों के प्रति सचेत करते हुए प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति को अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि कैसे आयुर्वेद सदियों से मानव समाज के स्वास्थ्य और कल्याण का आधार रहा है, जिसमें जड़ी-बूटियों, आहार, योग और ध्यान के माध्यम से रोगों को दूर रखने और शरीर को आंतरिक रूप से मजबूत बनाने की विद्या समाहित है।
इस अवसर पर यह भी रेखांकित किया गया कि कैसे आयुर्वेद का दर्शन प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करने पर बल देता है, जो आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अत्यंत आवश्यक है। एक संतुलित जीवनशैली, जिसमें उचित दिनचर्या, पौष्टिक आहार और नियमित व्यायाम शामिल हो, न केवल शारीरिक बीमारियों से बचाती है, बल्कि मानसिक शांति और स्पष्टता भी प्रदान करती है। वक्ताओं ने व्यक्तिगत स्वास्थ्य के साथ-साथ सामुदायिक स्वास्थ्य में भी आयुर्वेद की भूमिका पर प्रकाश डाला, यह बताते हुए कि कैसे यह स्थानीय संसाधनों का उपयोग करके स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बना सकता है।
पर्यावरण संरक्षण और संतुलित समाज में आयुर्वेद की भूमिका
समारोह में उपस्थित सभी लोगों को एक स्वस्थ, संतुलित और पर्यावरण के अनुकूल समाज के निर्माण का संकल्प दिलाया गया। आयोजन के दौरान क्षेत्रीय आयुर्वेद एवं यूनानी अधिकारी, स्थानीय नागरिक, स्वास्थ्य कर्मी और छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में मौजूद रहे। सभी ने सामूहिक रूप से आयुर्वेद को जन-जन तक पहुंचाने और पृथ्वी के कल्याण के लिए इसे दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाने का आह्वान किया। यह केवल एक स्वास्थ्य प्रणाली नहीं है, बल्कि एक जीवन दर्शन है जो प्रकृति का सम्मान करता है और उसके साथ सद्भाव में रहने की शिक्षा देता है।
वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि आयुर्वेद प्रकृति से प्राप्त संसाधनों का उपयोग करता है और अपव्यय को कम करने पर जोर देता है, जिससे पर्यावरण संरक्षण में इसकी भूमिका स्वतः ही महत्वपूर्ण हो जाती है। एक स्वस्थ पर्यावरण एक स्वस्थ समाज की नींव रखता है, और आयुर्वेद इस संबंध को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आयुर्वेद के प्रति जागरूकता फैलाना और लोगों को प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति की ओर प्रेरित करना था, जिसमें स्थानीय निवासियों ने सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की। कार्यक्रम के समापन पर सभी ने आयुर्वेद को अपनाकर बेहतर भविष्य की दिशा में सामूहिक संकल्प लिया, जिसमें व्यक्तिगत स्वास्थ्य और ग्रह के स्वास्थ्य दोनों का ध्यान रखा जा सके।
