सेमीकॉन 2026 में एनआईटीटीटीआर भोपाल ने दिखाई सेमीकंडक्टर में तकनीकी क्षमता
एनआईटीटीटीआर भोपाल ने सेमीकॉन 2026 में सेमीकंडक्टर और ओएसएटी क्षेत्र में अपनी उन्नत तकनीकी क्षमताओं और नवाचारों का प्रदर्शन किया।

Bhopal | संवाददाता: डॉ. पीके पुरोहित
द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 23 सितंबर 2026
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी शिक्षक प्रशिक्षण और अनुसंधान संस्थान (एनआईटीटीटीआर), भोपाल ने प्रतिष्ठित सेमीकॉन 2026 प्रदर्शनी में अपनी उल्लेखनीय उपस्थिति दर्ज कराई। संस्थान ने सेमीकंडक्टर और आउट-ऑफ-फैब्रिकेशन-सेल (ओएसएटी) के क्षेत्र में अपनी शैक्षणिक विशेषज्ञता और तकनीकी कौशल का प्रभावी ढंग से प्रदर्शन किया।
एनआईटीटीटीआर भोपाल के सेंटर फॉर ओएसएटी ने प्रदर्शनी में उन्नत पैकेजिंग तकनीकों, अत्याधुनिक सुविधाओं और नवोन्मेषी समाधानों को प्रदर्शित किया। संस्थान द्वारा विशेष रूप से विकसित कस्टम-बिल्ट उपकरणों ने उद्योग के विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और छात्रों के बीच काफी उत्सुकता जगाई, जिन्होंने संस्थान की पहलों और विकास कार्यों में गहरी रुचि दिखाई।
ओएसएटी क्षेत्र में नवाचार और प्रशिक्षण पर जोर
प्रदर्शनी के दौरान, एनआईटीटीटीआर भोपाल के ओएसएटी-आधारित उन्नत प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम को विशेष रूप से सराहा गया। यह पाठ्यक्रम तेजी से उभरते सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए कुशल कार्यबल तैयार करने की संस्थान की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। इस पहल का उद्देश्य उद्योग की बढ़ती मांगों को पूरा करने के लिए प्रशिक्षित पेशेवरों की एक नई पीढ़ी तैयार करना है।
उद्योग जगत से संवाद और भविष्य की संभावनाएं
एनआईटीटीटीआर भोपाल के निदेशक श्री सी. सी. त्रिपाठी के नेतृत्व में, डॉ. पी. के. खन्ना, डॉ. अजय शंकर, डॉ. सीमा वर्मा, डॉ. शिल्पी श्रीवास्तव और उनकी टीम ने आयोजन के दौरान विभिन्न हितधारकों के साथ महत्वपूर्ण संवाद स्थापित किया। इस दौरान संस्थान की अनुसंधान, विकास गतिविधियों और सेमीकंडक्टर पैकेजिंग के क्षेत्र में चल रहे कार्यों पर विस्तृत चर्चा हुई।
सेमीकॉन 2026 में संस्थान की भागीदारी ने ओएसएटी और सेमीकंडक्टर पैकेजिंग के क्षेत्र में एनआईटीटीटीआर भोपाल की अकादमिक और कौशल विकास संबंधी भूमिका को और मजबूत किया है। इस प्रदर्शन ने मध्य प्रदेश सहित पूरे भारत के तेजी से विकसित हो रहे सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम में संस्थान के महत्वपूर्ण योगदान और तकनीकी दक्षता को प्रभावी ढंग से रेखांकित किया है। इन प्रयासों से भविष्य में उद्योग और शिक्षा जगत के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होने की संभावनाएं प्रबल हुई हैं, जो भारत के सेमीकंडक्टर मिशन को गति प्रदान करेगा।
