नर्मदापुरम में सुहागिनों ने की पति की दीर्घायु के लिए करवाचौथ पूजा
नर्मदापुरम में सुहागिन महिलाओं ने पति की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और सुखद वैवाहिक जीवन की कामना के साथ करवाचौथ का पर्व उत्साहपूर्वक मनाया। दिनभर...

Narmadapuram | संवाददाता: सुयश मिश्रा
द क्लिफ न्यूज़ | नर्मदापुरम | 29 अक्टूबर 2026
नर्मदापुरम में सुहागिन महिलाओं ने अपने पतियों की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और सुखद वैवाहिक जीवन की मंगल कामना के साथ करवाचौथ का पर्व उत्साहपूर्वक मनाया। इस वर्ष के करवाचौथ पर महिलाओं ने पूरे दिन निर्जला व्रत रखा और शाम को विधि-विधान से पूजा-अर्चना संपन्न की।
पर्व के अवसर पर महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों में सज-धजकर सोलह शृंगार किया। पूजा के लिए आकर्षक थालियां तैयार की गईं, जिनमें पारंपरिक सामग्री जैसे दीये, रोली, मोली, चंदन, अक्षत, मिठाई और फल आदि शामिल थे। महिलाओं ने श्रद्धापूर्वक भगवान गणेश, भगवान शिव, माता पार्वती और करवाचौथ माता का स्मरण किया। धार्मिक परंपराओं का पालन करते हुए करवाचौथ की कथा का श्रवण भी किया गया, जिसमें इस व्रत के महत्व और उत्पत्ति का वर्णन मिलता है। यह कथा महिलाओं को व्रत के नियमों और उसके आध्यात्मिक फल के बारे में बताती है, जिससे उनकी आस्था और दृढ़ होती है।
पारंपरिक अनुष्ठान और सांस्कृतिक महत्व
मीनाक्षी मिश्रा जैसे श्रद्धालुओं ने बताया कि करवाचौथ भारतीय संस्कृति में प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक है। यह पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह दांपत्य जीवन में आपसी प्रेम, सम्मान और एक-दूसरे के प्रति निष्ठा को व्यक्त करने का एक अनूठा माध्यम भी है। यह पर्व पारिवारिक रिश्तों में आत्मीयता को और अधिक मजबूत करता है, जहाँ पत्नी अपने पति के प्रति अपने गहरे स्नेह और समर्पण को दर्शाती है। महिलाओं ने दिनभर के निर्जला व्रत के बाद सायंकाल चंद्रोदय की प्रतीक्षा की, इस दौरान वे भजन-कीर्तन और अन्य पारंपरिक गतिविधियों में भी शामिल रहीं।
चंद्रोदय के बाद व्रत का पारण
रात्रि में चंद्रोदय होने के उपरांत, महिलाओं की प्रतीक्षा समाप्त हुई। पूर्णिमा के चंद्रमा के दर्शन के पश्चात, उन्होंने विधि-विधान से चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित किया और अपने पतियों के दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और सुखी जीवन के लिए प्रार्थना की। चंद्रमा को जल अर्पित करने के बाद, महिलाओं ने छलनी से अपने पति का चेहरा देखा और फिर पति के हाथों जल ग्रहण कर अपना करवाचौथ का व्रत खोला। इस पल का विशेष महत्व होता है, क्योंकि यह उनके व्रत की पूर्णता को दर्शाता है। पूरे दिन घरों में उत्सव और उल्लास का माहौल बना रहा, जहाँ परिवार के सदस्य इस शुभ अवसर में सहभागी हुए। इस आयोजन ने भारतीय मूल्यों और दांपत्य जीवन में अटूट विश्वास की महत्ता को पुनः जीवंत किया। पर्व के समापन पर महिलाओं में विशेष उत्साह देखा गया, जो अगले वर्ष के करवाचौथ की प्रतीक्षा करने लगे।
