गुना पीजी कॉलेज में परीक्षा परिणामों में धांधली के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन
गुना के शासकीय स्नातकोत्तर कॉलेज में बीए, बीएससी प्रथम वर्ष के परीक्षा परिणामों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों के विरोध में छात्रों ने प्रदर्शन किया।...

गुना | संवाददाता: राजा हतम वेग
द क्लिफ न्यूज़ | गुना | 29 अक्टूबर 2026
गुना के शासकीय स्नातकोत्तर कॉलेज में विद्यार्थी संगठन 'डीएसओ' (डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन) के नेतृत्व में छात्रों ने परीक्षा परिणामों में धांधली और व्यापक गड़बड़ियों के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी छात्रों ने कॉलेज के प्राचार्य को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें विश्वविद्यालय के कुलपति से तत्काल प्रभाव से परिणामों में सुधार कर संशोधित सूची पुनः घोषित करने की मांग की गई है।
डीएसओ के कार्यकर्ताओं का आरोप है कि हाल ही में घोषित बीए और बीएससी प्रथम वर्ष के परीक्षा परिणामों में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को जानबूझकर सप्लीमेंट्री या शून्य अंक देकर फेल कर दिया गया है। छात्रों के अनुसार, न केवल मुख्य विषयों में, बल्कि फाउंडेशन कोर्स और व्यावसायिक विषयों में भी फेल होने वाले छात्रों की संख्या बहुत अधिक है। छात्रों ने परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्रों में पाई गई विसंगतियों की ओर भी इशारा किया, जिसमें 'भारत बोध' के प्रश्नपत्र में एक ही प्रश्न चार बार दोहराया गया था और अन्य प्रश्नपत्रों में हिंदी अनुवाद की कमी थी। उस समय विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा दिए गए आश्वासन कि छात्रों का कोई नुकसान नहीं होगा, अब झूठे साबित हुए हैं।
बीए और बीएससी प्रथम वर्ष के परिणामों में छात्रों को फेल करने का आरोप
छात्रों का कहना है कि परीक्षा के दौरान कुछ प्रश्नपत्रों में गंभीर त्रुटियां थीं, जैसे कि 'भारत बोध' विषय के प्रश्नपत्र में एक ही प्रश्न चार बार दोहराया गया था। इसके अतिरिक्त, कुछ अन्य विषय के प्रश्नपत्रों में हिंदी अनुवाद भी उपलब्ध नहीं था, जिससे छात्रों को समझने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ा। इन विसंगतियों के बावजूद, विश्वविद्यालय प्रशासन ने तब यह आश्वासन दिया था कि छात्रों के भविष्य पर इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। हालांकि, जारी किए गए परिणामों ने इन आश्वासनों की पोल खोल दी है, जिसमें बड़ी संख्या में छात्रों को अनुत्तीर्ण घोषित किया गया है।
विश्वविद्यालय प्रशासन की लापरवाही के कारण छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ है
छात्र संगठन ने शिक्षा व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि नई शिक्षा नीति के बड़े-बड़े दावों के बावजूद, जमीनी हकीकत कुछ और है। कॉलेजों में न तो पाठ्यक्रम की पुस्तकें उपलब्ध हैं और न ही कक्षाओं का नियमित संचालन हो पा रहा है। शिक्षकों की भारी कमी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में विद्यार्थियों का भविष्य अनिश्चित होता जा रहा है। इन परीक्षाओं के परिणामों में हुई गड़बड़ियां इस बात का स्पष्ट प्रमाण हैं कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों के भविष्य को लेकर गंभीर नहीं है। यह स्थिति छात्रों के शैक्षणिक और व्यावसायिक भविष्य पर गहरा असर डाल रही है, क्योंकि वे अगले वर्ष के लिए आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं और अनिश्चितता के माहौल में जी रहे हैं।
डीएसओ ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि इन गंभीर विसंगतियों को शीघ्र दूर नहीं किया गया, तो प्रभावित छात्रों के अधिकारों के लिए एक उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा। संगठन ने मांग की है कि सभी उत्तर पुस्तिकाओं का पुनः मूल्यांकन किया जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो। इस विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शामिल थे, जिन्होंने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाज़ी भी की।
