मुरैना में टी.बी. मुक्त भारत अभियान शुरू, जिला प्रशासन जुटा
मुरैना जिले को क्षय रोग से मुक्त बनाने के लिए 'टी.बी. मुक्त भारत अभियान' के तहत जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने कमर कसी है।...

district,morena | संवाददाता: दिनेश सिकरवार
द क्लिफ न्यूज़ | मुरैना | 23 सितंबर 2026
मुरैना जिले को क्षय रोग (टी.बी.) से मुक्त करने के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जिला प्रशासन ने 'टी.बी. मुक्त भारत अभियान' के तहत एक व्यापक मुहिम शुरू की है। कलेक्टर लोकेश कुमार रामचंद्र जांगिड़ के कुशल नेतृत्व में, स्वास्थ्य विभाग के साथ मिलकर, जिला प्रशासन इस संक्रामक बीमारी के उन्मूलन के लिए विभिन्न रणनीतियों पर कार्य कर रहा है। इस प्रयास का मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप, जनप्रतिनिधियों, समाजसेवियों और नागरिकों के सक्रिय सहयोग से जिले को पूर्णतः टी.बी. मुक्त बनाना है।
अभियान की प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए, जिला प्रशासन ने एक विशेष 'डिस्ट्रिक्ट टी.बी. फोरम' का गठन किया है। यह फोरम क्षय रोग उन्मूलन से संबंधित सभी गतिविधियों की निरंतर निगरानी करेगा और आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करेगा। इस फोरम के माध्यम से सुनिश्चित किया जाएगा कि टी.बी. उन्मूलन के प्रयासों में कोई कमी न रहे और निर्धारित लक्ष्य समयबद्ध तरीके से पूरे हों।
निक्षय मित्र योजना से रोगियों को पोषण और आर्थिक संबल
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पद्मेश उपाध्याय ने बताया कि टी.बी. का इलाज पूरी तरह से संभव है और यदि मरीज नियमित रूप से दवाएं लें तो वे पूर्ण स्वस्थ हो सकते हैं। उन्होंने 'टी.बी. हारेगा देश जीतेगा' के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि विभाग का प्रयास है कि समाज में टी.बी. को लेकर फैली भ्रांतियों और अंधविश्वासों को समाप्त किया जाए।
जिला क्षय अधिकारी डॉ. नरेंद्र उपाध्याय ने अभियान के एक महत्वपूर्ण पहलू 'निक्षय मित्र योजना' पर प्रकाश डाला। कलेक्टर के मार्गदर्शन में, इस योजना के तहत दानदाताओं को टी.बी. रोगियों को गोद लेने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इन 'निक्षय मित्रों' द्वारा क्षय रोगियों को 'फूड बास्केट' के रूप में पोषण आहार उपलब्ध कराया जाता है, जो उनके स्वास्थ्य सुधार में सहायक होता है। इसके अतिरिक्त, जांच में टी.बी. पॉजिटिव पाए जाने वाले प्रत्येक मरीज को इलाज की पूरी अवधि के दौरान पर्याप्त पोषण के लिए सीधे उनके खाते में एक हजार रुपये प्रति माह की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।
निःशुल्क जांच और दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच
स्वास्थ्य केंद्रों, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सी.एच.ओ.) और आयुष्मान आरोग्य केंद्रों पर टी.बी. की जांच पूर्णतः निःशुल्क की जा रही है। यह सुविधा सुनिश्चित करती है कि आर्थिक स्थिति की परवाह किए बिना कोई भी व्यक्ति जांच से वंचित न रहे। जिले के प्रोग्राम को-ऑर्डिनेटर ब्रजेश सिंह राजपूत के अनुसार, लगभग 238 आयुष्मान आरोग्य केंद्रों पर परामर्श सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं।
शासन द्वारा उपलब्ध कराई गई आधुनिक पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों का उपयोग दूरस्थ ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में टी.बी. की त्वरित स्क्रीनिंग के लिए किया जा रहा है। इन मशीनों को आसानी से उन जगहों तक ले जाया जा सकता है जहाँ स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुँच सीमित है, जिससे बीमारी का प्रारंभिक चरण में ही पता लगाया जा सके।
टी.बी. एक संक्रामक रोग: बचाव और उपचार
टी.बी. एक संक्रामक बीमारी है जो 'माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस' नामक जीवाणु के कारण होती है। यह मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है, लेकिन शरीर के अन्य हिस्सों को भी संक्रमित कर सकती है। यह खांसने या छींकने से हवा में फैलने वाले सूक्ष्म कणों के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में आसानी से फैल जाती है।
चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि डॉट्स (DOTS) प्रणाली के तहत छह से आठ महीने का उचित उपचार लेने पर मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है। उल्लेखनीय है कि उपचार शुरू होने के लगभग पंद्रह दिनों के भीतर ही टी.बी. के संक्रमण को फैलाने का खतरा काफी हद तक समाप्त हो जाता है।
जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे सार्वजनिक स्थानों पर खांसते या छींकते समय अपने मुंह को रुमाल या टिश्यू से ढकें। इसके अलावा, डॉक्टर की सलाह के बिना इलाज को कभी भी बीच में न छोड़ें। खुले में थूकना न केवल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, बल्कि यह संक्रमण के प्रसार को भी बढ़ावा देता है, इसलिए थूकदान का उपयोग अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए। प्रशासन ने नागरिकों से 'निक्षय मित्र' बनकर इस राष्ट्रीय अभियान में योगदान देने का आह्वान किया है, ताकि मुरैना को टी.बी. मुक्त बनाने के लक्ष्य को शीघ्र प्राप्त किया जा सके।
