MP: नवीन कर्मचारियों के वेतन कटौती पर बढ़ा बवाल,HC के आदेश की अनदेखी का आरोप
मध्य प्रदेश में नवीन नियुक्त शासकीय कर्मचारियों के वेतन कटौती के विरोध में भारतीय ब्राह्मण सनातन एकता मंच ने राज्य शासन पर उच्च न्यायालय के...

भोपाल | संवाददाता: पंडित सुमित्रा शुक्ला
द क्लिफ न्यूज़ | भोपाल | 1 नवंबर 2026
मध्य प्रदेश में नवीन नियुक्त शासकीय कर्मचारियों के वेतन में की जा रही कटौती और एरियर के भुगतान को लेकर विवाद गहरा गया है। भारतीय ब्राह्मण सनातन एकता मंच, भारतवर्ष की राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित सुमित्रा शुक्ला ने राज्य शासन की नीतियों पर कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए इसे कर्मचारियों के साथ शोषणकारी व्यवहार बताया है। उनका तर्क है कि परिविक्षा अवधि के दौरान पहले तीन वर्षों में क्रमशः 70, 80 और 90 प्रतिशत वेतन देने की व्यवस्था कर्मचारियों के अधिकारों का हनन है।
पंडित सुमित्रा शुक्ला ने इस मामले में जबलपुर और इंदौर उच्च न्यायालय द्वारा पहले दिए गए ऐतिहासिक निर्णयों का हवाला दिया है। उन्होंने सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 12 दिसंबर 2019 को जारी किए गए सर्कुलर को भेदभावपूर्ण बताते हुए कहा कि उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि परिविक्षा अवधि में कर्मचारियों को कम वेतन देने का कोई तार्किक आधार नहीं है। न्यायालय ने 'समान कार्य के लिए समान वेतन' के सिद्धांत को दोहराते हुए कहा है कि कर्मचारी पूर्ण वेतन के हकदार हैं। राज्य सरकार बनाम दिल्लीराज भिलाला मामले में भी न्यायालय ने ऐसी व्यवस्था को पूर्व में खारिज कर दिया था।
न्यायालय के आदेशों के पालन की मांग
संगठन का आरोप है कि न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद मैदानी स्तर पर इन आदेशों का पालन नहीं किया जा रहा है। इससे कर्मचारियों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। भारतीय ब्राह्मण सनातन एकता मंच ने राज्य सरकार से मांग की है कि 2019 के इस अन्यायपूर्ण सर्कुलर को तत्काल निरस्त किया जाए। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जाए कि सभी प्रभावित कर्मचारियों को उनका 100 प्रतिशत मूल वेतन मिले।
90 दिनों में एरियर भुगतान की मांग
पंडित सुमित्रा शुक्ला ने जोर देकर कहा कि परिविक्षा अवधि के दौरान रोकी गई वेतन राशि का बकाया एरियर 90 दिनों के भीतर कर्मचारियों को भुगतान किया जाए। उन्होंने राज्य शासन को चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में तत्काल कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया, तो भारतीय ब्राह्मण सनातन एकता मंच कर्मचारियों के हक की लड़ाई लड़ने के लिए सड़कों पर उतरकर एक व्यापक आंदोलन करने के लिए मजबूर होगा। वर्तमान में यह मुद्दा राज्य के प्रशासनिक और न्यायिक गलियारों में गंभीर चर्चा का विषय बना हुआ है।
